अजीतः एक फ्लॉप हीरो से कैसे बने सुपर खलनायक

क्या आप हामिद अली खान को जानते हैं? वह आदमी, जिनका फिल्मी नाम अजीत था. हीरो बनना चाहते थे, पर बन गए सुपर खलनायक.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Oct 22, 2020, 14:08 PM IST

फिल्मों में खलनायक की भूमिका निभाने वाले अजीत (Ajit) को गुजरे आज 22 साल हो गए हैं, पर आज भी उनके बोले डॉयलाग काफी लोकप्रिय हैं. अजीत ने अपना फिल्मी करियर बतौर खलनायक शुरू नहीं किया था. वह हैदराबाद से भागकर मुंबई फिल्मों में हीरो बनने आए थे. उनके अब्बा जान नहीं चाहते थे कि उनका बेटा कलाकार बने.

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मशहूर हैं कई डॉयलाग

Many dialogues are famous

अजीत के कुछ डॉयलाग आज भी मशहूर हैं. जैसे- 'मोना डार्लिंग सोना कहां है', 'सारा शहर मुझे लॉयन के नाम से जानता है', 'कुत्ता जब पागल हो जाता है तो उसे गोली मार देते हैं...'

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रियल एस्टेट में पैसे लगाने का था शौक

He was fond of investing in real estate

अजीत अकसर अपनी कमाई के पैसे रियल एस्टेट में लगाते थे. वह पुराने फ्लैट कम दाम में खरीद कर उन्हें नया बनाकर बेचते थे. उन्हें इस काम में भी काफी मुनाफा मिलता था.

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हीरो से ज्यादा कमाते थे अजीत

Ajit used to earn more than Hero

सत्तर के दशक में एक ऐसा वक्त भी था, जब फिल्मों में अजीत को हीरो से ज्यादा पैसे मिलते थे. सुभाष घई के निर्देशन में बनी पहली फिल्म 'कालीचरण' में अजीत को हीरो शत्रुघ्न सिन्हा के मुकाबले डेढ़ गुना अधिक पारिश्रमिक मिला था. 

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सुपर खलनायक

Super villain

राजेन्द्र और सलीम ने अजीत को खलनायक के रोल करने की सलाह दी. अजीत मान गए. अजीत की 'सूरज', 'जंजीर', 'यादों की बारात' जैसी कई फिल्में इतनी हिट हुईं कि वह रातों-रात सुपर खलनायक बन गए.

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दोस्तों का मिला साथ

Got friends Support

अजीत को साठ के दशक में फिल्में मिलने लगी थीं, पर वह हीरो के तौर पर कभी सफल नहीं हो पाए. तब उनकी मदद को आगे आए उनके दोस्त एक्टर राजेंद्र कुमार और सलमान खान के पिता सलीम खान (Salim Khan).

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अजीत के नाम से हुए मशहूर

Famous as Ajit

नानाभाई ने उन्हें अपना नाम बदलने के लिए कहा. कहा कि हामिद नाम फिल्मों में नहीं चलेगा. नानाभाई ने ही उन्हें अजीत नाम दिया था. नानाभाई निर्माता-निर्देशक महेश भट्ट के पिता थे.

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नानाभाई के संपर्क में आए अजीत

Ajit came in contact with Nanabhai

हामिद ने मुंबई में शुरुआती कई सालों तक संघर्ष किया. सड़क पर सोए, गुंडा-गर्दी की, फिर कहीं जा कर उनकी मुलाकात निर्माता नानाभाई भट्ट से हुई. नाना ने उन्हें अपनी फिल्म में हीरो का रोल दिया, पर एक शर्त के साथ.