Caste Census पर सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र का हलफनामा, 'OBC की अलग से गणना बेहद कठिन'

जाति आधारित जनगणना ( Caste Census) का मामला एक बार फिर सुलग उठा है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में इस मामले में केन्द्र के हलफनामे के बाद बिहार के साथ पूरे देश की सियासत गर्म हो गई है.

Caste Census पर सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र का हलफनामा, 'OBC की अलग से गणना बेहद कठिन'
Caste Census पर सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र का हलफनामा (फाइल फोटो)

Patna: जाति आधारित जनगणना ( Caste Census) का मामला एक बार फिर सुलग उठा है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में इस मामले में केन्द्र के हलफनामे के बाद बिहार के साथ पूरे देश की सियासत गर्म हो गई है. केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया है और कहा है कि 'ओबीसी की अलग से जनगणना प्रशासनिक तौर पर बेहद कठिन है. हम 2011 की जनगणना को आधार बनाकर आगे नहीं बढ़ सकते, क्योंकि उसे विश्वसनीय नहीं माना जा सकता. तार्किक तौर पर देखा जाए तो उसमें कई त्रुटियां हैं.'

केन्द्र सरकार के इस हलफनामे से विपक्षी दल आक्रामक हो गए हैं और केन्द्र सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं. RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने इसको लेकर एक ट्वीट किया. लालू ने सरकार पर पिछड़ी जातियों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया. विपक्षी दल सरकार से स्पष्ट जवाब मांग रहे हैं कि आखिर जानवरों की गिनती हो सकती है, तो इंसानों की क्यों नहीं?

 'आंकड़ों के आधार पर आरक्षण ठीक नहीं'

केन्द्र सरकार ने कोर्ट में हलफनामा दायर कर जातीय जनगणना को कठिन बताया. इसके अलावा भी सरकार ने कोर्ट के सामने कई तर्क दिए. सरकार ने कहा कि 'देश में जितनी जातियां बताई जाती हैं या राज्य सरकारें जो जानकारी देती हैं, उससे कहीं ज्यादा जातियां वास्तव में हैं. जातियों की कई उपजातियां भी हैं. एक ही इलाके में कई जातियां और उप-जातियां बदल जाती हैं. यहां तक कि स्पेलिंग में थोड़े से बदलाव से जाति बदल जाती है. ऐसे में इस तरह की जनगणना को व्यवहारिक नहीं माना जा सकता.'

इसके साथ ही केन्द्र सरकार ने जाति आधारित जनगणना से होने वाली समस्याओं पर भी इशारा किया. सरकार ने कहा कि 'जाति से संबंधित जनगणना के रिकॉर्ड के आधार पर हम रोज़गार या स्थानीय चुनाव में आरक्षण नहीं दे सकते. इन आंकड़ों के आधार पर आरक्षण देना उपयुक्त नहीं है.'

'राजनीति करने वालों की दुकानें होंगी बंद' 

केन्द्र सरकार के फैसले के बाद BJP ने विरोधी दलों पर जमकर हमला बोला. BJP ने कहा कि 'ये उन सभी लोगों के लिए झटका है जो जाति की राजनीति करते हैं. जातिगत भेदभाव पैदा कर जो अपनी राजनीति की दुकान चलाते हैं, उनको अब अपनी दुकान बंद करनी पड़ेगी. अब देश में सिर्फ विकास की राजनीति होगी. गरीबी मिटाने की बात होगी. हमारी सरकार जाति नहीं, बल्कि गरीबों की पहचान कर उनकी समस्या का समाधान करेगी.'

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एक तरफ BJP जाति आधारित जनगणना न होने के तर्क दे रही है, तो सहयोगी JDU अब भी उम्मीद लगाए बैठी है. JDU का कहना है कि 'अभी हमें केन्द्र सरकार पर पूरा भरोसा है. केन्द्र सरकार की तरफ से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है. अभी तो कोर्ट में हलफनामा दिया गया है. जब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं होता, हमारी उम्मीदें कायम हैं.'

विपक्ष हुआ हमलावर

केन्द्र सरकार के फैसले पर विपक्षी दल हमलावर हैं. बिहार में मुख्य विपक्षी दल RJD ने तो BJP के साथ JDU पर भी हमला बोल दिया है. RJD ने मांग की है कि JDU तत्काल इस पर फैसला करे. RJD का कहना है कि 'अगर JDU अब भी BJP के साथ गठबंधन में रहती है, तो ये माना जाएगा कि उसके मन में भी खोट है. अगर वाकई JDU इस मामले में ईमानदार है तो तत्काल NDA से बाहर आए और जाति आधारित जनगणना को लेकर जन आंदोलन में शामिल हो.'

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हालांकि अभी सुप्रीम कोर्ट की तरफ से क्या आदेश आता है, उस पर भी सबकी निगाहें लगी रहेंगी, लेकिन सियासी दल अभी से ही आक्रामक हो गए हैं. इन सबके बीच केन्द्र के स्टैंड से जाति आधारित जनगणना फिलहाल मुमकिन नजर नहीं आती.