झारखंड: मतदाताओं ने रघुवर दास के हाथ से ताज छीनकर हेमंत सोरेन को पहनाया, बनेंगे अगले CM

विपक्षी गठबंधन झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), कांग्रेस और राजद गठबंधन 45 सीटों पर बढ़त के साथ बहुमत से आगे निकल गया है.

झारखंड: मतदाताओं ने रघुवर दास के हाथ से ताज छीनकर हेमंत सोरेन को पहनाया, बनेंगे अगले CM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड चुनाव में जीत के लिए हेमंत सोरेन और जेएमएम गठबंधन को बधाई दी है.(फोटो- ANI)

नई दिल्‍ली: झारखंड विधानसभा चुनाव (Jharkhand Assembly Election 2019) के सोमवार को मतगणना के दौरान मुख्यमंत्री रघुवर दास और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) हेमंत सोरेन ने भले ही जनादेश का सम्मान करने की बात कही, लेकिन इस जनादेश से अब स्पष्ट है कि मतदाता ने रघुवर दास के हाथ से राज छीनकर हेमंत को ताज पहना दिया. ऐसी स्थिति में राज्य में महागठबंधन की जीत लगभग सुनिश्चित दिख रही है और हेमंत सोरेन का मुख्यमंत्री बनना तय है, जबकि दूसरी ओर सत्ताधारी भाजपा की इन चुनावों में करारी हार हुई है.

रुझानों में झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस व राजद संयुक्त रूप से 81 सीटों में से 46 निर्वाचन क्षेत्रों में जीत की तरफ बढ़ रहे हैं. झामुमो 21 सीटें जीत चुकी है और 9 पर आगे चल रही है. कांग्रेस 10 सीटें जीत चुकी है और छह पर आगे चल रही है. राजद एक सीट जीत चुकी है. भाजपा ने 17 सीटों पर जीत दर्ज की है और आठ सीटों पर आगे है. ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) ने दो सीटें जीती है. झारखंड विकास मोर्चा-प्रजातांत्रिक (जेवीएम-पी) एक सीट जीत चुकी है और दो पर आगे चल रही है.बहुमत का जादुई आंकड़ा 41 है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड चुनाव में जीत के लिए हेमंत सोरेन और जेएमएम गठबंधन को बधाई दी है. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि बीजेपी को कई वर्ष तक राज्य में काम करने का मौके देने के लिए लोगों का धन्यवाद. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं का भी आभार जताया.

हेमंत सोरेन ने जीत के बाद प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि जनता ने स्पष्ट बहुमत दिया है. जनादेश के लिए झारखंड की जनता का धन्यवाद है. झारखंड विधानसभा के चुनाव परिणामों से स्पष्ट है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की अगुवाई वाले गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है और हेमंत सोरेन, झारखंड का अगला मुख्यमंत्री बनने की ओर अग्रसर हैं. वह अपने राजनीतिक करियर में दूसरी बार मुख्यमंत्री बनेंगे. 2019 के चुनाव में सोरेन अपनी राजनीतिक पार्टी के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए लड़ रहे थे.

राज्‍य की 81 सीटों में से बीजेपी 26 सीटों पर आगे है. क्षेत्रीय दलों सुदेश महतो की पार्टी आजसू-3 और बाबूलाल मरांडी की झारखंड विकास मोर्चा (JVM)-3 सीटों पर आगे चल रही है. 4 सीटों पर निर्दलीय आगे चल रहे हैं. इस बीच चुनावी बढ़त के बीच हेमंत सोरेन ने पिता शिबू सोरेन से मुलाकात की. वहीं अगर महत्‍वपूर्ण सीटों की बात की जाए तो मुख्‍यमंत्री रघुबर दास, जमशेदपुर पूर्व सीट से पीछे चल रहे हैं. इस सीट पर बीजेपी के बागी उम्‍मीदवार सरयू राय आगे चल रहे हैं. जेएमएम नेता हेमंत सोरेन दोनों सीटों से आगे चल रहे हैं.

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रुझानों पर भविष्‍यवाणी करना सही नहीं: रघुबर दास
मुख्‍यमंत्री रघुबर दास ने रुझानों पर कहा है कि अभी रुझानों पर कुछ कहना सही नहीं है. नतीजे आने के बाद संगठन विचार करेगा. लोकतंत्र में कोई भी जश्‍न मना सकता है लेकिन हमारा भरोसा है कि हम ही चुनाव जीतेंगे. उन्‍होंने कहा कि ये रुझान अंतिम परिणाम नहीं हैं. अभी कई राउंड की वोटों की गिनती बाकी है. ऐसे में इस वक्‍त रुझानों पर भविष्‍यवाणी करना सही नहीं होगा. मैं बाद में इस मुद्दे पर प्रेस कांफ्रेंस करूंगा. उन्‍होंने विधानसभा चुनाव के संबंध में कहा कि हम चुनाव जीतेंगे और बीजेपी के नेतृत्‍व में सरकार बनाएंगे. उन्‍होंने ZEE NEWS से खास बातचीत करते हुए कहा कि हमें चुनाव में जीत का पूरा भरोसा है.

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आजसू और जेवीएम
यदि आजसू की बात की जाए तो चुनावों से पहले ये पार्टी बीजेपी के साथ सत्‍ता में थी और इसके नेता सुदेश महतो उपमुख्‍यमंत्री थे लेकिन लेकिन चुनाव के वक्‍त सीटों पर सहमति नहीं बन पाने के कारण इसने अलग से चुनाव लड़ा. इसी तरह बाबूलाल मरांडी की जेवीएम भी 3 सीटों पर आगे चल रही है. बाबूलाल मरांडी ने रुझानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है नतीजे हमारी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं हैं. लेकिन हम जनादेश का सम्‍मान करते हैं. जनादेश के मुताबिक हम अपनी भूमिका निभाएंगे. पूरी तरह से नतीजे आने के बाद हम इस पर विचार करेंगे.

रघुबर दास बनाम सरयू राय
वैसे मतगणना के दिन जिस सीट पर सबकी निगाहें टिकी हैं, वह है जमशेदपुर पूर्वी सीट. मुख्यमंत्री रघुवर दास वर्ष 1995 से यहां से जीतते आ रहे हैं. उनके खिलाफ उनके पूर्व-कैबिनेट सहयोगी सरयू राय मैदान में हैं. राय ने पार्टी से टिकट कटने के बाद बगावत कर मुख्यमंत्री की राह का कांटा बनने का फैसला किया. इस सीट पर फिलहाल सरयू राय आगे चल रहे हैं. उन्‍होंने कहा कि आगे आने वाले राउंड में 1500-2000 वोटों की बढ़त मेरी जारी रह सकती है और अंत में 30 हजार वोटों के अंतर से मेरे जीतने की संभावना है.

हॉट सीटें
अन्य महत्वपूर्ण सीटें हैं-दुमका और बरहेट, जहां से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन चुनाव लड़ रहे हैं. दुमका में वह समाज कल्याण मंत्री लुईस मरांडी के खिलाफ मैदान में हैं. वह दोनों ही सीटों पर आगे चल रहे हैं. इसी तरह जेवीएम नेता बाबूलाल मरांडी धनवार सीट से आगे चल रहे हैं. वहीं आजसू नेता सुदेश महतो सिल्‍ली से आगे चल रहे हैं.

रुझानों के सियासी मायने
1. यदि बीजेपी सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो पाई तो हाल में महाराष्‍ट्र के हाथ में निकलने के बाद झारखंड के रूप में एक और राज्‍य बीजेपी के हाथ से निकल सकता है. हरियाणा में भी बीजेपी को स्‍पष्‍ट बहुमत नहीं मिला था और पार्टी को चुनावों बाद दुष्‍यंत चौटाला से हाथ मिलाना पड़ा था.

2. नागरिकता संशोधन कानून का बीजेपी को कोई लाभ नहीं मिला. इस वक्‍त पूरे देश में ये सबसे अहम मुद्दा है. इसके खिलाफ देशव्‍यापी विरोध-प्रदर्शनों में अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है. वैसे जब ये कानून अस्तित्‍व में आया तो झारखंड के तीन चरणों के चुनाव हो चुके थे और दो चरण रह गए थे.

3. बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने चुनावों में राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का बार-बार उल्‍लेख किया. लेकिन रुझान बता रहे हैं कि राम मंदिर पर आए नतीजों का लाभ पार्टी को नहीं मिला.

4. विपक्ष पर जनता का विश्‍वास पहले की तुलना में बढ़ा है. 2017 के बाद के विधानसभा चुनावों में एक ट्रेंड ये देखने को मिल रहा है कि जहां भी विपक्ष एकजुट होकर लड़ता है, वहां बीजेपी लक्ष्‍य के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाई. इस बार झारखंड के चुनावों में बीजेपी ने अबकी बार 65 पार का नारा दिया था.

5. चुनावों में मुख्‍यमंत्री रघुबर दास को लेकर बीजेपी के अंदरखाने में भी विरोध के सुर उठे. नतीजा ये रहा कि पार्टी के वरिष्‍ठ नेता सरयू राय उनके खिलाफ मैदान में ही निर्दलीय प्रत्‍याशी के रूप में उतर गए. पार्टी का एक धड़ा रघुबर दास के चेहरे के साथ चुनाव में जाने के पक्ष में नहीं था. उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े किए गए. रुझानों को देखकर ऐसा लगता है कि जनता ने भी उन पर अपेक्षित भरोसा नहीं जताया.

6. बीजेपी अपने दम पर राज्‍यों में सरकार नहीं बना पा रही है.

7. क्षेत्रीय पार्टियां बीजेपी के लिए चुनौती बन रही हैं.

8. वोटरों का बीजेपी से मोहभंग हो रहा है. बीजेपी सरकार के कामकाज पर वोटरों का भरोसा कमजोर हो रहा है.

9. रघुवर सरकार के कामकाज पर जनता ने भरोसा नहीं किया.

10. राज्‍यों के मुद्दों को बीजेपी ने नजरअंदाज किया.

झारखंड में बीजेपी की 5 भूलें
1. स्‍थानीय मुद्दों की अनदेखी: रघुबर दास के नेतृत्‍व में बीजेपी ने जनता के स्‍थानीय मुद्दों की अनदेखी कर आर्टिकल 370, राम मंदिर, नागरिकता संशोधन कानून जैसे विषयों पर फोकस किया. इन मुद्दों के कारण पार्टी स्‍थानीय आधार पर लोगों से जुड़ नहीं सकी.

2. नेताओं की बगावत: बीजेपी के अंदर सरयू राय के नेतृत्‍व में एक धड़ा रघुबर दास की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा था. रघुबर दास को मुख्‍यमंत्री के रूप में फिर से पेश नहीं करने की भी मांग इस धड़े ने की. लेकिन जब उनकी मांग को नामंजूर कर दिया तो वरिष्‍ठ नेता सरयू राय ने पार्टी से बगावत करते हुए जमदेशपुर पूर्व से रघुबर दास के खिलाफ खम ठोकने का निश्‍चय कर लिया. नतीजतन भितरघात का पार्टी को नुकसान हुआ.

3. गैर-आदिवासी कार्ड: पिछली बार चुनावों के बाद बीजेपी ने चुनावों में 37 सीटें हासिल करने के बाद गैर-आदिवासी कार्ड खेलते हुए रघुबर दास को मुख्‍यमंत्री बनाने का निश्‍चय किया. हालांकि विपक्ष ने उनको 'बाहरी' कहा. इस बार भी चुनावों में विपक्ष ने हेमंत सोरेन के समर्थन में आदिवासी बनाम गैर-आदिवासी कार्ड खेला.

4. महंगाई: चुनावों के दौरान प्‍याज समेत खाद्य वस्‍तुओं की बढ़ी कीमतों को भी विपक्ष ने मुद्दा बनाया.

5. बेरोजगारी: राज्‍य के चुनावों में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा रहा. स्‍थानीय स्‍तर पर हरियाणा लोक सेवा आयोग समेत सरकारी नौकरियों में भर्तियों का नहीं आना बड़ा मुद्दा रहा.