Muzaffarpur Seat: डॉ. राज भूषण चौधरी निषाद को लोकसभा चुनाव 2024 में मुजफ्फरपुर से उम्मीदवार बनाया गया है. इस संसदीय सीट पर प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय जय नारायण प्रसाद निषाद के बेटे सांसद अजय निषाद वर्तमान सांसद है. भाजपा ने उन्हीं को रिप्लेस कर डॉ राज भूषण को मुजफ्फरपुर सीट से जगह दी है.
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Muzaffarpur Politics: उत्तर बिहार की एकमात्र सीट मुजफ्फरपुर से भाजपा ने वर्तमान सांसद अजय निषाद का टिकट काटकर डॉ. राज भूषण चौधरी निषाद को लोकसभा चुनाव 2024 का उम्मीदवार बनाया है. टीकत मिलने के बाद डॉ. राज भूषण भी खुलकर चुनावी मैदान में उतर चुके है. बिहार की मुजफ्फरपुर सीट पर 17.3 लाख मतदाता है, अब देखना ये है कि इस संसदीय क्षेत्र में इनको कितना पसंद किया जाएगा. हालांकि उनके राजनीतिक करियर की बात करें तो लोगों के बीच उनकी चर्चा काफी पॉजिटिव है.
कौन है राज भूषण चौधरी, जिन पर भाजपा ने खेला दांव
राज भूषण चौधरी निषाद पेशे से डॉक्टर हैं. सूत्रों की मानें तो उनका घर अहियापुर थाने के विजय छपरा में है और ये समस्तीपुर के रोसड़ा में डॉक्टर हैं. आयुर्विज्ञान तथा शल्य-चिकित्सा स्नातक (MBBS) कर चुके राजभूषण चौधरी निषाद डॉक्टरी की प्रैक्टिस के अलावा निषाद विकास संघ से कई सालों से जुड़े हुए है. इनके राजनीतिक करियर की बात करें तो 2017 में यह मुकेश सहनी के संपर्क में आए और उनके पीछे-पीछे ही जातीय संगठन का काम करते रहे. निषाद विकास संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के नाते मल्लाह जाति को एससी-एसटी का दर्जा दिलाने के लिए राजभूषण चौधरी की सक्रियता दिखती है. मुजफ्फरपुर से चुनाव लड़ने और हारने के बाद राज भूषण चौधरी ने वीआईपी का दामन छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था. इस बार राज भूषण चौधरी पर भाजपा ने दांव खेला है.
हारकर भी बाजीगर बन गए डॉ राज भूषण चौधरी
डॉ. राज भूषण चौधरी निषाद को लोकसभा चुनाव 2024 में मुजफ्फरपुर से उम्मीदवार बनाया गया है. इस संसदीय सीट पर प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय जय नारायण प्रसाद निषाद के बेटे सांसद अजय निषाद वर्तमान सांसद है. भाजपा ने उन्हीं को रिप्लेस कर डॉ राज भूषण को मुजफ्फरपुर सीट से जगह दी है. बता दें कि राजभूषण 2019 में भाजपा प्रत्याशी अजय निषाद के प्रतिद्वंद्वी के रूप में वीआईपी से उम्मीदवार थे, तब उन्हें 254832 मत मिले थे. अजय निषाद को उस चुनाव में करीब 659833 वोट मिले थे. इसके अलावा 4 लाख 8 हजार 237 मतों के अंतर से उनकी जीत मिली थी. हालांकि, केंद्रीय नेतृत्व की ओर से लोकसभा चुनाव को लेकर कराई गई. अंदरूनी सर्वे में भाजपा सांसद के विरोध का खुलासा हुआ था. ये भी संकेत मिला था कि पिछले चुनाव में उनकी जीत उनके काम या कद को लेकर हासिल नहीं हुई थी बल्कि मोदी लहर में जनमत उनके साथ हो लिया था.
इस संसदीय क्षेत्र में 17 लाख से ज्यादा है मतदाता
आयोग की मानें तो बिहार की मुजफ्फरपुर सीट पर 17.3 लाख मतदाता हैं, जिसमें सवर्ण मतदाता साढ़े तीन लाख, यादव पौने दो लाख, मुस्लिम दो लाख और वैश्य सवा दो लाख हैं. मतदाताओं को जानकारी के लिए बता दें कि इसके अलावा यहां अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों की भी संख्या अच्छी-खासी है.
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