यूपी की सबा देश में योग के जरिए दे रही कौमी एकता को बढ़ावा

छात्रा सबा खान हिन्दू-मुस्लिम समुदाय की कौमी एकता के लिए लोगों के लिए मिसाल बन रही है.

यूपी की सबा देश में योग के जरिए दे रही कौमी एकता को बढ़ावा
मुरादाबाद की सबा खान योग के जरिए कौमी एकता को बढ़ावा दे रही है.

विशाल शर्मा/सहरसाः देश में धर्म और जाति के नाम पर राजनीति हो रही है. वहीं, समाज को भी इस आधार पर बांटा जा रहा है. समाज के लोग धर्म और जाति के भवंर में फंसते जा रहे हैं. लोगों को दूसरे धर्म के प्रति भटकाया जा रहा है. लेकिन एक मुस्लिम छात्रा दो धर्मों को बीच की दूरी को पाटने का काम कर रही है. और दो समुदायों के बीच मिसाल खड़ा कर रही है.

यूपी के मुरादाबाद की रहने वाली छात्रा सबा खान हिन्दू-मुस्लिम समुदाय की कौमी एकता के लिए लोगों के लिए मिसाल बन रही है. बिहार के सहरसा में गायत्री शक्ति पीठ में हरिद्वार के देवसंस्कृति विश्वविद्यालय की चार छात्राएं अलग-अलग कोर्स के लिए एक महीने के इंटरनसिप के लिए पहुंची है.

इन छात्रों में से एक का नाम सबा खान है, जो यूपी के मुरादाबाद की रहनेवाली है. सबा खान धर्म मजहब से ऊपर उठकर योग का शिक्षा ग्रहण कर रही है और लोगों को योगा के लिए जागरूक कर रही है.

सबा योगा प्रायाणाम के साथ-साथ लोगों को शरीर को फिट रखने के लिए एरोबिक जुम्बा डांस की ट्रेनिंग दे रही है. इतना ही नहीं सबा खान संस्कृत में वैदिक मंत्रोच्चार भी धारा प्रवाह पढ़ती है, और यज्ञ हवन में भी शामिल होती है. वहीं, गायत्री शक्तिपीठ आने वाले लोग भी सबा खान से योगा के साथ-साथ एरोबिक जुम्बा की ट्रेंनिग ले रही है.

सबा अन्य स्कूलों में भी जाकर बच्चों को योग के लिए जागरूक कर रही है. सबा बताती है कि वो अपने घर मुरादाबाद में भी गरीब बच्चों को योग के गुर सिखाती है. भारतीय संस्कृति पद्धति योग को जो कहा गया है, उसपर सबा खान रिसर्च भी कर रही है.

सबा कहती है हमारी भारतीय संस्कृति अनमोल है और पूरे विश्व मे सबसे समृद्ध चिकित्सा पद्धति योग है. योग से कई बीमारियों पर काबू पाया जा सकता है. हालांकि की पहले दौर में सबा के इस काम से कुछ लोगों ने भी इसका विरोध किया. जिसके बावजूद सबा की अम्मी सहित घर वालों ने सबा का साथ दिया. अपने आगे बढ़ने की लालसा को लेकर सब बातों को दरकिनार करते हुए आज वो यहां तक पहुंची हैं.