रांची: बीस सालों से बेजुबान के हमदर्द बने हुए हैं ये दंपत्ति, 200 से अधिक जानवरों की बचाई जान

41 वर्षीय सोमेन मजूमदार और उनकी पत्नी सोनाली जानवरों के हमदर्द बन 20 वर्षों से उनकी सेवा कर रहे हैं. 

रांची: बीस सालों से बेजुबान के हमदर्द बने हुए हैं ये दंपत्ति, 200 से अधिक जानवरों की बचाई जान
सोमेन मजूमदार 20 साल पहले बंगाल से रांची आए थे और यहीं के होकर रह गए.

मदन सिंह, रांची: कहते हैं बेजुबानों के दर्द को अक्सर लोग नहीं समझ पाते हैं. लेकिन 41 वर्षीय सोमेन मजूमदार और उनकी पत्नी सोनाली जानवरों के हमदर्द बन 20 वर्षों से उनकी सेवा कर रहे हैं. झारखंड की राजधानी रांची से बीस किलोमीटर दूर पर अनगड़ा के चंद्रा टोली में रहते हैं और जानवरों की मदद करते हैं. 

सोमेन मजूमदार 20 साल पहले बंगाल से रांची आए थे और यहीं के होकर रह गए. करीब 20 वर्षों से सोमेन सड़क दुर्घटनाओं में चोटिल कुत्ते, गाय, भैंस और बिल्ली के लिए मसीहा बने हुए हैं. उनके खान-पान से लेकर इलाज तक का काम सोमेन अपनी पत्नी सोनाली मजूमदार और स्वयंसेवक धीरज के साथ मिलकर कर रहें हैं.

रांची

सोमेन को एक कॉल आ जाए कि इस जगह एक जानवर घायल पड़ा है तो सोमेन वहां फौरन पहुंचते हैं. जिस जानवर की हालात प्राथमिक उपचार के बाद छोड़ देने की होती है तो उसे वहीं छोड़ देते है और जो गंभीर रूप से घायल होते हैं उन्हें वो अपने साथ घर लेकर आते हैं और तब तक उसकी सेवा करते है जब तक वह स्वस्थ्य न हो जाए. 

सोमेन और उनकी पत्नी ने अपने निःस्वार्थ प्रेम और इलाज से तकरीबन 200 से ज़्यादा जानवरों को बचाकर अलग ही कीर्तिमान रचा है. लागातार 20 सालों से ऐसे जानवर जो चल फिर नहीं सकते उनकी देखभाल कर रहें हैं.

कैसे बढ़ा जानवरों से प्रेम
शुरुआत में सोमेन को पालतू जानवरों से लगाव था. मगर अपने पत्नी के स्नेह और जानवरों के लिए प्यार को देखकर दो साल पहले शहर छोड़ गांव में रहने का फैसला किया. दरअसल आस-पास के लोगों को जानवरों के आवाज से परेशानी होती थी और कई बार झगड़ा भी हो जाता था इसलिए सोमेन ने शहर छोड़कर गांव में रहने का निर्णय लिया 

प्रेम विवाह के चलते घर वालों ने तोड़ा रिश्ता
दरअसल सोमेन ओर सोनाली ने प्रेम विवाह किया था और शादी के बाद सोनाली के परिजनों ने सोनाली से अपना रिश्ता तोड़ लिया. सोनाली अपने खाली समय में जानवरों के बीच रहने लगी और ये स्नेह लगातार बढ़ता ही चला गया. आस पास के लोग अगर कुछ दिनों के लिए बाहर जाते हैं तो अपने पालतू जानवर को भी इनके पास छोड़कर जाते हैं.

लोग करते हैं तारीफ
सोमेन के इस कार्य की सराहना आस-पास के लोग भी करते हैं. कहना गलत नहीं होगा कि सोमेन से ओर लोगों को सीख लेने की जरूरत है कि हम जितना इंसान के दर्द को समझते हैं वैसे ही इन बेजुबानों के दर्द को भी समझें.