दिल्ली: चांदनी चौक में यूं मना चंद्रयान -2 का जश्न, जमकर बिकी चांद और तिरंगे वाली जलेबी

चंद्रयान (Chandrayaan 2) का विक्रम लैंडर (Vikram Lander) आज (6 सितंबर) रात करीब 2 बजे चंद्रमा (Moon) की धरती पर लैंड करेगा. इसे लेकर दुनिया भर की नजरें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (ISRO) पर टिकी हुई हैं. 

दिल्ली: चांदनी चौक में यूं मना चंद्रयान -2 का जश्न, जमकर बिकी चांद और तिरंगे वाली जलेबी
चांदनी चौक की 102 साल पुरानी जलेबी की दुकान में बन रही है यह खास जलेबी

नई दिल्ली: चंद्रयान (Chandrayaan 2) का विक्रम लैंडर (Vikram Lander) आज (6 सितंबर) रात करीब 2 बजे चंद्रमा (Moon) की धरती पर लैंड करेगा. इसे लेकर दुनिया भर की नजरें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (ISRO) पर टिकी हुई हैं. भारत में क्या बच्चे, क्या बड़े सभी चंद्रयान -2 (Chandrayaan 2) की ही चर्चा कर रहे हैं. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) काफी उत्साहित हैं. वह इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए खुद ISRO के मुख्यालय में मौजूद रहेंगे. इस रोमांचक पल को लेकर हरेक हिन्दुस्तानी के दिमाग में तरह-तरह की बातें चल रही हैं. ऐसे में दिल्ली के चांदनी चौक में तिरंगे और चांद के आकर की जलेबी खरीद कर लोग चंद्रयान -2 को सेलिब्रेट कर रहे हैं.

 

आपको बता दें कि चांदनी चौक की 102 साल पुरानी जलेबी की दुकान में शुक्रवार को चांद और तिरंगे वाली जलेबी बन रही है. इस खास जलेबी को आज लोग काफी पसंद कर रहे हैं. दुकान के मालिक रमाकान्त शर्मा भी इस बात से काफी खुश हैं कि उनका यह आइडिया लोगों की खुशी इस खास मौके पर दोगुनी कर रहा है.

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सॉफ्ट लैंडिंग को लेकर आश्वस्त हैं ISRO प्रमुख
चंद्रयान (Chandrayaan) की सफल लैंडिंग को लेकर भले ही आम लोगों के दिमाग में उथल-उथल चल रही है, लेकिन ISRO प्रमुख आश्वस्त हैं. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) चीफ के सिवन (K Sivan) ने न्यूज एजेंस ANI से बातचीत में कहा, 'हम एक ऐसी जगह पर उतरने जा रहे हैं, जहां इससे पहले कोई नहीं गया था. हम सॉफ्ट लैंडिंग के बारे में आश्वस्त हैं. हम रात का इंतजार कर रहे हैं.'

यहां बता दें कि चंद्रयान -2 (Chandrayaan 2) का विक्रम लैंडर (Vikram Lander) अगर सॉफ्ट लैंडिंग में सफल रहता है तो यह एक रिकॉर्ड होगा. आज से पहले रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा. साथ ही भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला विश्व का पहला देश भी बन जाएगा.