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जिस डॉग ब्रीड ने लादेन को ढूंढने में की थी मदद, अब वो करेगा दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा

प्रशिक्षण के बाद 'खोज' को सीआईएसएफ के शास्त्री पार्क केनल में रखा जाएगा, ताकि दिल्ली मेट्रो और जरूरत पड़ने पर दिल्ली एयरपोर्ट की सुरक्षा में उन्हें लगाया जा सके.

जिस डॉग ब्रीड ने लादेन को ढूंढने में की थी मदद, अब वो करेगा दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा
ट्रेनिंग के लिए 3 महीने के डॉ़ग को लाया जाता है. ट्रेनिंग के दौरान मेलिनॉयस को धमाकों की आवाज से परचित कराया जाता है. एक ट्रेन्ड डॉग बम और गोली में फर्क समझ लेता है.

नई दिल्ली: भारत की राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाईअड्डा और दिल्ली मेट्रो हमेशा आतंकियों के निशाने पर रहते हैं. इन जगहों की सुरक्षा सीआईेएसएफ के लिए चुनौती बनी हुई है. इन दोनों ही जगहों पर खुफिया एजेंसियों द्वारा फिदायीन (आत्मघाती) हमलों के इनपुट हमेशा मिलते रहते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए सीआईएसएफ अब अपने श्वान दस्ते (डॉग स्कवॉड) में एक खास प्रजाति के डॉग को शामिल करने की योजना बना रही है. खास बात ये है कि बेल्जियन मेलिनॉयस नाम के जिस प्रजाति के डॉग को दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा के लिए तैनात किया जाएगा, उस डॉग ने दुनिया के मोस्ट वांटेड आतंकी ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान के एबटाबाद में उसके खुफिया ठिकाने को ढूंढने में अमेरिकी सैनिकों की मदद की थी.

डॉग स्कवॉड में सबसे महंगा डॉग
सीआईएसएफ के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल डॉक्टर अनिल पांडे ने बताया कि सीआईएसएफ ने 'खोज' को एक निजी डॉग ब्रीडर से हासिल किया है. फिलहाल 'खोज' बेंगुलुरु में सीआईएसएफ डॉग ट्रेनिंग सेंटर में है. 10 महीने तक उसे ट्रेन किया जाएगा. डॉग की ट्रेनिंग और उसे खरीदने में एक लाख रुपये का खर्च आया है. इस लिहाज से 'खोज' सीआईएसएफ के डॉग स्कवॉड का सबसे महंगा डॉग हो गया है. 'खोज' को हासिल करने और फिर ट्रेनिंग पर आने वाला खर्च दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन उठाएगा. 

बहुत आक्रामक होते हैं बेल्जियन मेलिनॉयस
सीआईएसएफ का 'खोज' डॉग बेल्जियन मेलिनॉयस प्रजाति का है. बेल्जियन मेलिनॉयस प्रजाति के ये डॉग खासे आक्रामक होते हैं. यह एक मध्यम आकार की नस्ल वाला डॉग है. मेलिनॉयस नाम फ्रांस के एक शहर पर रखा गया है. इस ब्रीड के डॉग का उपयोग मुख्य रुप से विस्फोटक व नशीले पदार्थ का पता लगाने के लिए होता है. यह डॉग फिदायीन अटैक और आतंकी हमले का मुकाबला करने में सक्षम होते है. डॉग का वजन 25 से 30 किलो होता है और 12 से 15 साल तक जीवित रहते है. काले खड़े कान इसकी खास पहचान है. 

 

व्हाइट हाउस की सुरक्षा में भी तैनात 
बेल्जियन मेलिनॉयस की अदभुत क्षमता के चलते इसे व्हाइट हाउस की सुरक्षा के लिए भी तैनात किया गया है. व्हाइट हाउस की सिक्योरिटी में तैनात करने से पहले अधिकारियों द्वारा दुनियाभर में एक सर्वे के बाद इस डॉग को चुना गया था. 

ये भी है खासियत 
यह डॉग 9 गज की दूरी से गंध को पहचानकर शिकारी की तलाश कर सकता है. यही नहीं 24 घंटे बाद भी व्यक्ति के रास्ते से गुजरने की गंध को पहचान लेता है. 

मल्टी टास्कर होते हैं बेल्जियन मेलिनॉयस 
डॉग की अन्य प्रजातियों की तुलना में बेल्जियन मेलिनॉयस ब्रीड के डॉग कहीं बेहतर साबित हो रहे हैं. 
इस प्रजाति के डॉग 25 से 30 किलोमीटर लगातार चल सकते हैं. 
इनके आक्रमण और दुश्मन को घायल करने की क्षमता भी दूसरी प्रजातियों से अलग है. 
अब तक 250 से अधिक मामलों में डॉग स्कवॉड ने हमलावरों, विस्फोटकों को पकड़ने में मदद की है. 

प्रशिक्षण के बाद 'खोज' को सीआईएसएफ के शास्त्री पार्क केनल में रखा जाएगा, ताकि दिल्ली मेट्रो और जरूरत पड़ने पर दिल्ली एयरपोर्ट की सुरक्षा में उन्हें लगाया जा सके. भारत में अब तक बेल्जियन मेलिनॉयस ब्रीड के डॉग का इस्तेमाल फिलहाल काजीरंगा नेशनल पार्क में हो रहा है. वहां जानवरों की तस्करी पर लगाम कसने में यह डॉग बेहद जरूरी साबित हो रहे हैं. इसके अलावा साल 2011 से सीआईएसएफ इन डॉग का इस्तेमाल नक्सलियों के खिलाफ भी करती आ रही है. 

ट्रेनिंग के लिए 3 महीने के डॉ़ग को लाया जाता है. ट्रेनिंग के दौरान मेलिनॉयस को धमाकों की आवाज से परचित कराया जाता है. एक ट्रेन्ड डॉग बम और गोली में फर्क समझ लेता है. 9 महीने की ट्रेनिंग के बाद एक महीने जंगल में ट्रेनिंग दी जाती है. फिलहाल, सीआईेएसएफ के डॉग स्कवॉड में 60 डॉग है. प्रमुख रूप से लैब्राडॉग, जर्मन शेफर्ड और कॉकर स्पैनियल इत्यादि प्रजाति के डॉग हैं. इनका उपयोग विस्फोटक व संदिग्धों की पहचान के लिए किया जाता है.