close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल, बेहतर संचालन व्यवस्था से सुधरेगा राज्यों का ‘स्वास्थ्य’: नीति सदस्य

स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर करने के लिये हर जिले में मॉडल अस्पताल होने चाहिए. जो भी सरकारी अस्पताल हैं, मेडिकल कॉलेज हैं, उनमें बेहतर सुविधाएं होनी चाहिए.

संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल, बेहतर संचालन व्यवस्था से सुधरेगा राज्यों का ‘स्वास्थ्य’: नीति सदस्य
फाइल फोटो

नई दिल्ली: नीति आयोग की पिछले सप्ताह स्वास्थ्य सूचकांक पर जारी रिपोर्ट में 21 बड़े राज्यों की रैंकिंग में उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़ी आबादी वाले देश के सूबे फिर से फिसड्डी रहे हैं. स्वास्थ्य और उससे जुड़े कुछ मानकों पर उनकी स्थिति पहले से और बिगड़ी है. इस बारे में नीति आयोग के सदस्य और पेशे से डाक्टर विनोद के. पॉल का कहना है कि जिला अस्पतालों को मॉडल अस्पताल बनाकर, उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग तथा संचालन व्यवस्था को बेहतर बनाकर इन राज्यों में स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत बनायी जा सकती है. पेश है इस समस्या पर डा. पॉल से भाषा के पांच सवाल और उनके जवाब: 

सवाल: नीति आयोग की रिपोर्ट ‘स्वस्थ राज्य, प्रगतिशील भारत’ के अनुसार स्वास्थ्य मोर्चे पर बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड जैसे राज्यों की स्थिति और खराब हुई है. इसकी क्या वजह है ? 

जवाब: जहां तक रिपोर्ट में इन राज्यों की स्थिति खराब होने का सवाल है, इसकी कोई एक वजह नहीं है. रिपोर्ट कुछ मानकों जैसे मृत्यु दर, प्रजनन दर, स्वास्थ्य अधिकारियों की नियुक्ति अवधि, खाली पड़े पद, कोष हस्तांतरण आदि के मोर्चे पर राज्यों के प्रदर्शन पर आधारित है. इनमें से कुछ मानदंडों पर राज्यों का प्रदर्शन खराब होने से उनकी रैंकिंग पर असर पड़ा है. हालांकि, बिहार में मृत्यु दर, चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति अवधि जैसे मानदंड़ों पर स्थिति पहले से बेहतर भी हुई है. वैसे देखा जाए तो संचालन व्यवस्था में खामियां, कोष की कमी और ऐतिहासिक रूप से सामाजिक-आर्थिक पहलू के कारण इन राज्यों की यह स्थिति है.

सवाल: इन राज्यों की स्थिति में सुधार लाने के लिये आप क्या सुझाव देंगे? 

जवाब: मेरे हिसाब से मुख्य रूप से दो चीजों पर गौर करने की जरूरत है. पहला, संसाधन, दूसरा संचालन व्यवस्था. राज्यों के पास जो भी संसाधन हैं, उनका अधिकतम और बेहतर उपयोग होना चाहिए. इसके लिये प्रणाली को मजबूत करने और संचालन व्यवस्था को बेहतर और प्रभावी बनाने की जरूरत है. जिला अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में खाली पदों को जल्द भरा जाए. निगरानी व्यवस्था सुदृढ़ बनायी जाए. मुख्य चिकित्सा अधिकारी जैसे पदों पर जल्दी-जल्दी तबादलों पर अंकुश लगना चाहिए. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आवंटित कोष के अंतरण में समय नहीं लगना चाहिए.

सवाल: इस दिशा में आयोग क्या कर रहा है? क्या ऐसे राज्यों में अत्याधुनिक सुविधाओं वाले अस्पताल और शोध संस्थान स्थापित करने का कोई प्रस्ताव है? 

जवाब: स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर करने के लिये हर जिले में मॉडल अस्पताल होने चाहिए. जो भी सरकारी अस्पताल हैं, मेडिकल कॉलेज हैं, उनमें बेहतर सुविधाएं होनी चाहिए. हम सभी जिला अस्पतालों को एक मॉडल अस्पताल बनाएंगें. यह हमारे एजेंडे में है और इस पर काम जारी है. जहां तक शोध संस्थानों का सवाल है, निश्चित रूप से इसकी कमी है. स्थानीय स्तर पर ऐसे संस्थानों की आवश्यकता है ताकि वहां की बीमारियों और समस्याओं को समझकर उनसे प्रभावी तरीके से निपटा जाए. हम इस दिशा में राज्यों के साथ काम कर रहे हैं और अगले पांच साल में स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक रूप से बदलाव देखने को मिलेगा.

सवाल: क्या आपके मुताबिक स्वास्थ्य क्षेत्र पर केंद्र एवं राज्यों का बजट पर्याप्त है? 

जवाब: स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट आवंटन बढ़ाने की जरूरत है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 2025 तक देश में स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद का 2.5 प्रतिशत करना है जो अभी लगभग 1.5 प्रतिशत है. साथ ही राज्यों को अपना बजटीय आवंटन मौजूदा 4.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 8 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है. लेकिन एक चीज पर गौर करने की जरूरत है कि जम्मू कश्मीर, पंजाब, असम जैसे अपेक्षाकृत कमजोर आर्थिक विकास वाले राज्यों का स्वास्थ्य सूचकांक में प्रदर्शन बेहतर हुआ है जबकि गोवा और दिल्ली जैसे उच्च स्तर के आर्थिक विकास वाले राज्यों का प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा है. कहने का मतलब है कि हम मौजूदा संसाधनों का प्रभावी उपयोग करके स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर कर सकते हैं.

सवाल: राज्यों को क्या करना चाहिए, उनसे इस संदर्भ में बात हुई है? 

जवाब: राज्यों के साथ निरंतर बातचीत हो रही है. वैसे, स्वास्थ्य राज्य का विषय है. यदि स्वास्थ्य प्रणाली को बेहतर बनाना है, तो उसमें राज्यों की बड़ी भूमिका है. डाक्टरों, विशेषज्ञों की कमी है. उन्हें आकर्षित करने के लिये राज्यों को बेहतर माहौल बनाने की जरूरत है. जो भी संसाधन है, उसका बेहतर उपयोग उन्हीं को करना है.