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प्रियदर्शिनी मट्टू केस: दिल्ली हाई कोर्ट ने LLM परीक्षा के लिए दोषी की पैरोल मंजूर की

अदालत ने कहा कि सिंह की परीक्षा 24 मई को आरंभ होगी और उसे 21 मई को रिहा किया जाएगा. 

प्रियदर्शिनी मट्टू केस: दिल्ली हाई कोर्ट ने LLM परीक्षा के लिए दोषी की पैरोल मंजूर की

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने 1996 में प्रियदर्शिनी मट्टू के बलात्कार एवं हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे संतोष कुमार सिंह की तीन सप्ताह की पैरोल को मंजूरी दे दी है ताकि वह एलएलएम की परीक्षा में बैठ सके. न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने सिंह की पैरोल मंजूर कर ली ताकि वह एलएलएम (मास्टर ऑफ लॉ) के अंतिम वर्ष की परीक्षा में बैठ सके.

सिंह ने 2014 में एलएलएम का प्रथम वर्ष पूरा किया था और उसके बाद द्वितीय वर्ष में दाखिला लिया था. अदालत ने कहा कि सिंह की परीक्षा 24 मई को आरंभ होगी और उसे 21 मई को रिहा किया जाएगा. दिल्ली सरकार ने सिंह की पैरोल याचिका का विरोध नहीं किया.

मट्टू (25) की जनवरी 1996 में बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी. दिल्ली विश्वविद्यालय में कानून के छात्र सिंह को इस मामले में तीन दिसंबर 1999 को निचली अदालत ने बरी कर दिया था लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय ने वर्ष 2006 में 27 अक्टूबर में निचली अदालत का आदेश पलट दिया था और उसे बलात्कार एवं हत्या के दोष में मृत्युदंड दिया था.

पूर्व आईपीएस अधिकारी के बेटे सिंह ने उच्च न्यायालय द्वारा सुनाई गई मौत की सजा और अपनी दोषसिद्धि को चुनौती दी थी. उच्चतम न्यायालय ने अक्टूबर 2010 में सिंह की दोषसिद्धि को बरकरार रखा था लेकिन उसे दी गई मौत की सजा को कम करके आजीवन कारावास में बदल दिया था.

सुनवाई के दौरान सिंह के वकील ने एलएलएम के द्वितीय वर्ष की परीक्षा में बैठने और जून में बेटी के जन्मदिन में शामिल होने के लिए चार सप्ताह की पैरोल मांगी. उन्होंने कहा कि उसने राहत के लिए जेल अधिकारियों से गुहार लगाई थी लेकिन मौजूदा लोकसभा चुनावों के कारण उन्होंने उसे अनुमति नहीं दी. वकील ने कहा कि जेल में सिंह का व्यवहार अच्छा है और वह वहां कानूनी सहायता भी दे रहा है.

दिल्ली सरकार के स्थाई वकील (अपराध) राहुल मेहरा ने वकील जमाल अख्तर के साथ स्थिति रिपोर्ट दायर की और अदालत को बताया कि दोषी ने पहले दी गई छूट का दुरुपयोग नहीं किया और वह जेल में पढ़ाई भी कर रहा है. उन्होंने कहा कि सिंह अर्द्ध-खुली जेल में है और दिल्ली सरकार के सजा समीक्षा बोर्ड ने पहले ही उसे रिहा करने की सिफारिश कर रखी है.

इन दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने कहा कि सिंह को तीन सप्ताह की पैरोल दी जाती है. अदालत ने उसे जेल अधीक्षक की संतुष्टि के लिए 25 हजार रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की जमानत राशि भरने के लिए कहा.