DNA ANALYSIS: वाहनों के बोझ से कैसे कमजोर हो रही Delhi की आर्थिक इम्‍युनिटी, 3 Points में समझें

आर्थिक सर्वेक्षण 2020-2021 के मुताबिक, दिल्ली में 31 मार्च 2020 तक कुल वाहनों की संख्या 1 करोड़ 18 लाख पहुंच चुकी है, जिनमें कार और जीप 33 लाख से ज्‍यादा है, दोपहिया वाहन लगभग 80 लाख हैं.

DNA ANALYSIS: वाहनों के बोझ से कैसे कमजोर हो रही Delhi की आर्थिक इम्‍युनिटी, 3 Points में समझें

नई दिल्‍ली: आज हम आपका ध्यान एक ऐसी खबर की तरफ ले जाना चाहते हैं, जो आपको बैलगाड़ी वाले जमाने में वापस ले जाएगी. ये खबर दिल्ली विधान सभा में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2020-2021 से जुड़ी है. इस आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, दिल्ली में एक हजार लोगों पर वाहनों की संख्या 643 हो गई है. सोचिए, एक हजार लोगों पर दिल्ली में 643 वाहन हैं. यानी वो दिन दूर नहीं, जब दिल्ली में हर एक व्यक्ति पर एक वाहन होगा और ये स्थिति ही आपको बैलगाड़ी वाले जमाने में वापस ले जाएगी. 

2005-2006 में सिर्फ 317 थी वाहनों की संख्‍या 

आर्थिक सर्वेक्षण 2020-2021 के मुताबिक, दिल्ली में 31 मार्च 2020 तक कुल वाहनों की संख्या 1 करोड़ 18 लाख पहुंच चुकी है, जिनमें कार और जीप 33 लाख से ज्‍यादा है, दोपहिया वाहन लगभग 80 लाख हैं, ऑटो रिक्शा करीब 1 लाख 15 हजार हैं, टैक्सियों की संख्या भी इतनी ही है और समान ढुलाई वाले वाहन जैसे ट्रक और ट्रैक्टर की संख्या 2 लाख 63 हजार. इन सभी को जोड़ दें, तो दिल्ली में कुल वाहन 1 करोड़ 18 लाख हैं. यानी एक हजार लोगों पर वाहनों की संख्या 643 है, जो 2005-2006 में सिर्फ 317 थी.

यानी पिछले 15 वर्षों में दो गुना वाहन दिल्ली की सड़कों पर बढ़ गए और ये आंकड़ा सुनने में आपको भी बहुत अच्छा लग रहा होगा. कई छोटे शहरों और गांवों के लोगों को ये भी लग सकता है कि दिल्ली के लोग समृद्ध हुए हैं और अब वो सिर्फ अपनी जरूरतें ही पूरी नहीं कर रहे, बल्कि सुविधाओं का गियर भी उनके हाथ में आ गया है, लेकिन ऐसा सोचने वालों को अब हम कुछ और बातें बताना चाहते हैं और हमें लगता है कि ये जानने के बाद आप यही कहेंगे कि Too Much Car, किसी भी शहर को बेकार बना सकती है.

कमजोर हो रही दिल्ली की आर्थिक इम्‍युनिटी 

दिल्ली में सड़कों की कुल लम्बाई 33 हजार 198 मीटर है यानी हर एक किलोमीटर पर 369 वाहनों का बोझ है और इस बोझ ने अब दिल्ली की आर्थिक इम्‍युनिटी को भी कमजोर करना शुरू कर दिया है.  इसे आप तीन पॉइंट्स में समझिए-

पहला पॉइंट,  इससे गाड़ियों की प्रति घंटा स्‍पीड पर असर पड़ा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली की सड़कों पर एक गाड़ी औसतन 20 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है. हालांकि सुबह 9 से दोपहर 12 बजे के बीच, जब पीक आवर्स होते हैं, तब कई अहम रास्तों पर गाड़ियों की औसतन स्‍पीड घटकर 9 किलोमीटर प्रति घंटा रह जाती है. ये हालात अभी हैं. सोचिए, आज से 10 वर्षों के बाद दिल्ली में क्या होगा. 

लोगों को 10 किलोमीटर दूर जाने के लिए भी कई घंटे का समय लगेगा और वो बैलगाड़ी वाले जमाने में पहुंच जाएंगे. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि, एक अनुमान के मुताबिक, बैलगाड़ी 5 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है यानी ऐसी स्थिति हो जाएगी कि आप गाड़ी में जाएं या बैलगाड़ी में कोई अंतर नहीं रह जाएगा, बल्कि बैलगाड़ी से चलने में आपका तेल का खर्च भी बचेगा.

दूसरा पॉइंट दिल्ली में वाहनों की संख्या तो बढ़ गई लेकिन इन वाहनों को खड़ा करने के लिए अब जगह मिलनी मुश्किल हो गई है. राजधानी में हर दिन पार्किंग को लेकर दिल्ली पुलिस को 250 कॉल्‍स की जाती हैं और एक व्यक्ति औसतन हर दिन में 20 मिनट यही ढूंढने में खर्च कर देता है कि वो अपनी गाड़ी को कहां पार्क करें. यानी साल के 4 दिन दिल्लीवालों के इसी में खर्च हो जाते हैं और लगभग 8 दिन दिल्ली के लोग हर साल ट्रैफिक जाम में बिता देते हैं.

एक अहम बात ये भी है कि दिल्ली में कुल रजिस्‍टर्ड वाहनों की संख्या 1 करोड़ 18 लाख है और अगर किसी एक दिन ये सारे वाहन एक साथ पार्क कर दिए जाएं, तो दिल्ली में लोगों के लिए पैदल चलने की जगह ही नहीं बचेगी. सोचिए, वाहनों ने देश की राजधानी दिल्ली का क्या हाल कर दिया है.

आखिरी पॉइंट ये है कि दिल्ली की कुल जनसंख्या 1 करोड़ 87 लाख है. लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि इन 1 करोड़ 87 लाख लोगों में से लगभग 35 लाख लोग ही ऐसे हैं, जो इनकम टैक्‍स देते हैं. यानी वाहनों की संख्या इनकम टैक्स देने वालों की संख्या से तीन गुना ज्‍यादा है.

हर परिवार के पास औसतन तीन गाड़ियां

महत्वपूर्ण बात ये है कि दिल्ली के जो करोड़ों लोग ये कहते हैं कि उनकी इनकम, टैक्‍स के दायरे में नहीं आती. उन लोगों के पास भी गाड़ियां और दोपहिया वाहन हैं. खुद दिल्ली सरकार के मुताबिक, राजधानी में 36 लाख परिवार रहते हैं यानी इस हिसाब से हर परिवार के पास औसतन तीन गाड़ियां हैं. अब आप खुद सोचिए कि दिल्ली की सड़कों पर बढ़ता गाड़ियों का बोझ कैसे राजधानी में विकास की स्‍पीड को भी स्‍लो कर रहा है.

1975 में आई मशहूर फिल्‍म दीवार में अमिताभ बच्चन का एक डायलॉग था कि मेरे पास बंगला है, गाड़ी है, बैंक बैलेंस है, तुम्हारे पास क्या है? अगर आज की स्थिति में उन्होंने ये डायलॉग बोला होता तो उनसे ये सवाल पूछा जाता कि गाड़ी तो है लेकिन गाड़ी चलाने के लिए सड़क और पार्किंग भी है क्या?

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