DNA ANALYSIS: आंदोलन के नाम पर होटल में रह रहे किसानों के '5 स्‍टार' नेताओं का सच

पिछले करीब 100 दिनों से भारत के नए कृषि कानून के विरोध में किसान दिल्ली के सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर मौजूद हैं. मौसम कैसा भी हो वो टेंट में रुकते हैं, सड़क पर खाना खाते हैं, पर उनके हित की बात करने वाले कुछ नेता दिल्ली की सीमा पर बने थ्री स्टार होटलों में रुकते हैं.

DNA ANALYSIS: आंदोलन के नाम पर होटल में रह रहे किसानों के '5 स्‍टार' नेताओं का सच

नई दिल्‍ली: आज हम आपको किसान आंदोलन की याद दिलाना चाहते हैं जिसे शायद कुछ लोग भूल भी गए होंगे. आंदोलन के बारे में हम जो आपको बताने जा रहे हैं उसे आप बहुत ध्यान से सुनिए और समझिए क्योंकि, इसके बाद आपको दिल्ली की सीमा में चल रहे किसान आंदोलन का एक नया सच समझ में आएगा.

पिछले करीब 100 दिनों से भारत के नए कृषि कानून के विरोध में किसान दिल्ली के सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर मौजूद हैं. मौसम कैसा भी हो वो टेंट में रुकते हैं, सड़क पर खाना खाते हैं, पर उनके हित की बात करने वाले कुछ नेता दिल्ली की सीमा पर बने थ्री स्टार होटलों में रुकते हैं. वो दिन में आंदोलन स्थल पर होते हैं और फिर रात को होटल में ठहरते में. 

किसान सड़क पर और 5 स्‍टार नेता होटल में

जिन दो किसान नेताओं के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं, उनमें से एक हैं भारतीय किसान यूनियन-राजेवाल संगठन के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल और दूसरे हैं जमूहरी किसान सभा के महासचिव कुलवंत सिंह संधू. ये दोनों नेता सिंघु बॉर्डर से कुछ दूरी पर मौजूद एक 3 स्‍टार होटल में रुकते हैं, जिसके सबूत हमारे पास हैं और वो हैं उस होटल के बिल जहां ये रुके थे.

hotel bill

बलबीर सिंह राजेवाल ने 19 दिसंबर 2020 से 28 जनवरी 2021 तक 1 लाख 8 हजार 382 रुपये का बिल चुकाया. बलबीर सिंह अभी भी उसी होटल में रुक रहे हैं. इस हिसाब से 9 मार्च तक का उनका बिल 2 लाख 40 हजार से ज्यादा का हो गया होगा. 

farmers protest

खाने-पीने का मुफ्त इंतजाम 

देश में किसानों की आय 8 हजार 300 रुपये प्रति महीना है, यानी उनकी प्रतिदिन की कमाई 276 रुपये हुई. दूसरी तरफ उनके ही किसान नेता प्रतिदिन 2700 रुपये सिर्फ होटल के कमरे का किराया दे रहे हैं. किसान नेता कुलवंत सिंह संधू भी 27 दिसंबर से इसी 3 स्‍टार  होटल में अपने बेटे के साथ रुक रहे हैं, लेकिन कुलवंत सिंह संधू पर होटल के मालिक काफी मेहरबान रहे. उनके ठहरने, खाने-पीने का सारा इंतजाम मुफ्त में था. मतलब होटल के आतिथ्‍य सत्‍कार का मज़ा उठाने के लिए उन्हें एक भी रुपया नहीं देना पड़ा.

40 किसान नेताओं के हाथ में आंदोलन की कमान

पिछले वर्ष दिसंबर से शुरू हुए किसान आंदोलन की कमान कुल 40 किसान नेताओं के हाथ में है.  बलबीर सिंह राजेवाल और कुलवंत सिंह संधू इन्हीं किसान नेताओं में से एक हैं. एक खास बात और बता दें कि बलबीर सिंह राजेवाल को किसान आंदोलन का थिंक टैंक कहा जाता है. मतलब आंदोलन की दिशा और दशा कैसी रहेगी इसके पीछे इनका बड़ा हाथ होता है.

किसान नेताओं पर मेहरबानी करने वाला होटल मालिक कौन है?

जिस होटल में बलबीर सिंह राजेवाल और कुलवंत सिंह संधू ठहरे हैं, दरअसल, वो होटल दिल्ली के एक बिल्‍डर रविंद्र तनेजा का है. रविंद्र तनेजा कौन है, ये हम आपको बताते हैं. हमारे पास ED यानी प्रवर्तन निदेशालय का एक दस्तावेज है. इसमें बताया गया है कि रविंद्र तनेजा गुरुग्राम में हुई मानेसर ज़मीन घोटाले का आरोपी है. रविंद्र तनेजा समेत 13 बिल्‍डर्स ने मानेसर, नौरंगपुर और लखनौला गांवों के किसानों के साथ 1500 करोड़ रुपये का घोटाला किया था. रविंद्र तनेजा समेत इन बिल्‍डर्स ने वर्ष 2004 से 2007 के बीच सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर किसानों की जमीन बहुत सस्ते दाम में खरीद ली थी. इन लोगों ने किसानों को भूमि अधिग्रहण के नाम पर डराकर उनकी 400 एकड़ ज़मीन मात्र 100 करोड़ में खरीद ली गई थी, जबकि उस वक्त 1 एकड़ जमीन की कीमत 4 करोड़ रुपये थी. जब ये जमीनें खरीद ली गईं तब राज्य सरकार ने वर्ष 2007 में नई अधिसूचना लाकर इन ज़मीनों को अधिग्रहण से बाहर कर दिया. 

सिंघु, टिकरी और गाजीपुर सीमा पर जो किसान ये समझकर धरना दे रहे हैं कि नए कृषि कानून के बाद उनकी जमीनें बड़े-बड़े उद्योगपति हड़प लेंगे. उन्हें ये जानकर दुख हुआ होगा कि उनके अपने ही नेता, धोखे से किसानों की जमीन हड़पने वाले बिल्‍डर्स के साथ मिले हुए हैं. उनकी दी गई सुविधाओं का फायदा उठा रहे हैं. 

किसानों और उनके 5 स्‍टार नेताओं में फर्क 

हमने एक ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की है,  जिससे किसानों और उनके 5 स्‍टार नेताओं के फर्क को समझा जा सके और किसान आंदोलन का सच भी सामने आए.

दिल्ली के टिकरी बॉर्डर पर  9 मार्च को जब दिल्ली एनसीआर में जबरदस्त बारिश हुई थी. तब यहां असली किसान टेंट में रुके हुए थे. लेकिन इस टेंट की छत बारिश को झेलने की स्थिति में नहीं थी. छत से पानी टपक रहा था और ये हाल किसी एक टेंट का नहीं, सभी का था. किसान जिस बिस्‍तर पर सोते, वो भी बारिश में पूरी तरह भीग गया. इस पर सोना मुश्किल था. सिंघु बॉर्डर पर भी किसान 100 दिनों से धरने पर हैं. तूफान और बारिश ने इनके सिर से छत छीन ली. तेज हवाओं ने कई टेंट उखाड़ फेंके, जो टेंट टिके हुए हैं, उनका भी भरोसा नहीं है कि वो कब तक टिके रहेंगे.  तो असली किसान प्रदर्शनकारियों के रुकने का इंतजाम कुछ ऐसा है.

शाही सुविधाओं वाले होटल में रुकते थे किसान नेता

अब हम आपको सिंघु बॉर्डर से उस 3 स्‍टार होटल के बारे में बताते हैं, जहां किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल और कुलवंत सिंह संधू रहते थे.  सिंघु बॉर्डर से ढाई किलोमीटर की दूरी पर 3 स्टार टीडीआई क्‍लब रीट्रीट होटल है, जहां दोनों किसान नेता रुके थे. अगर प्रदर्शन स्थल से होटल तक किसी कार से जाएं तो 15 मिनट लगते हैं. मतलब प्रदर्शनस्थल पर काम निपटाकर कभी भी होटल पहुंचकर आराम करना आसान है. इस होटल में शाही सुविधाएं मौजूद हैं.  शानदार कमरे, डाइनिंग हॉल, स्विमिंग पूल सबकुछ है. यानी एक तरफ अपने खेत, अपनी रोजी रोटी छोड़कर असली किसान प्रदर्शन करने के लिए सड़क पर बारिश और तूफान झेलते हैं, दूसरी तरफ इन्हीं किसानों के नेता राजनीतिक बयानबाजी के बाद आराम फरमाने शानदार होटल में ठहरते हैं. 

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