DNA ANALYSIS: ड्रग्स पर बॉलीवुड का 'बंटवारा', किसको बचाने की कोशिश की जा रही है?

क्या बॉलीवुड के खिलाफ षड्यंत्र हो रहा है? ये सवाल देश की संसद में उठा. समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने राज्य सभा में कहा कि ड्रग्स के मामले को लेकर बॉलीवुड को बदनाम करने की साजिश हो रही है. जया बच्चन की नाराजगी गोरखपुर से सांसद और अभिनेता रवि किशन के बयान को लेकर थी.

DNA ANALYSIS: ड्रग्स पर बॉलीवुड का 'बंटवारा', किसको बचाने की कोशिश की जा रही है?

नई दिल्ली: क्या बॉलीवुड के खिलाफ षड्यंत्र हो रहा है? ये सवाल देश की संसद में उठा. समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने राज्य सभा में कहा कि ड्रग्स के मामले को लेकर बॉलीवुड को बदनाम करने की साजिश हो रही है.

जया बच्चन की नाराजगी गोरखपुर से सांसद और अभिनेता रवि किशन के बयान को लेकर थी. रवि किशन ने कल लोक सभा में कहा था कि बॉलीवुड भी ड्रग्स की लत का शिकार है. जया बच्चन की प्रतिक्रिया बेहद अहम है क्योंकि ड्रग्स के मामले पर अब तक फिल्म इंडस्ट्री चुप्पी साधे हुए थी. सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर भी बॉलीवुड दो हिस्सों में बंटा हुआ है. लेकिन जैसे ही जया बच्चन ने संसद में बॉलीवुड को बदनाम करने का आरोप लगाया उनके समर्थन और विरोध में बयानों की झड़ी लग गई.

जया बच्चन के बयान पर सबसे पहली प्रतिक्रिया कंगना की
जया बच्चन के बयान पर सबसे पहली प्रतिक्रिया कंगना रनौत की आई. उन्होंने पूछा कि "जया जी क्या आप तब भी यही कहतीं जब मेरी जगह पर आपकी बेटी श्वेता को पीटा, घसीटा और उसके साथ बदसलूकी की गई होती. वो भी तब जब वो टीनएज में हो? क्या आप यही बात अभिषेक के बारे में बोलतीं, जब उसे लगातार परेशान किया जाता और एक दिन वो अपने घर में लटकता हुआ पाया जाता? मैं आपसे हाथ जोड़कर कहती हूं कि हम लोगों के लिए भी कुछ संवेदना दिखाइए."

जया बच्चन और कंगना रनौत की इस बहस से सवाल उठता है कि क्या एक्टर को सिर्फ एक्टिंग करनी चाहिए या देश के बड़े मुद्दों पर भी बोलना चाहिए? जया बच्चन सांसद हैं और सांसद होने के नाते वो सिर्फ बॉलीवुड का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं. उनसे उम्मीद की जाती है कि वो किसी मुद्दे पर बोलेंगी तो सोच-समझकर बोलेंगी. यह ध्यान देने वाली बात है कि जब पूरा देश सुशांत सिंह राजपूत को न्याय के लिए एकजुट होकर अभियान चला रहा था तब जया बच्चन ने एक शब्द भी नहीं बोला.

जब कंगना रनौत के दफ्तर को अवैध बताकर उस पर बुलडोजर चला दिया गया, तब भी जया बच्चन चुप रहीं. लेकिन हैरानी है कि जब ड्रग्स के मामले में रिया चक्रवर्ती के फंसते ही जया बच्चन बोल पड़ीं. उन्होंने इस बारे में बोलने के लिए देश की संसद को चुना.

जया बच्चन किसको बचाना चाहती हैं?
यहां आपके लिए यह भी जानना जरूरी है कि जया बच्चन के समर्थन में कौन से बड़े-बड़े एक्टर और फिल्मकार सामने आ गए. इनमें फरहान अख्तर, जोया अख्तर, सोनम कपूर, तापसी पन्नू, अनुभव सिन्हा, दीया मिर्जा जैसे कलाकार शामिल हैं. इसीलिए हम पूछ रहे हैं कि एक्टर को सिर्फ एक्टिंग करनी चाहिए या बड़े मुद्दों पर बोलना चाहिए? जिस तरह से सुशांत सिंह राजपूत की मौत में ड्रग्स रैकेट की बात सामने आई है यह सवाल जरूर पूछा जाएगा कि जया बच्चन किसको बचाना चाहती हैं? यह सवाल सिर्फ जया बच्चन से नहीं, बल्कि बॉलीवुड के हर उस कलाकार से है जो अपने ही कुछ साथी कलाकारों के साथ अन्याय पर चुप हैं.

अमिताभ चुप क्यों हैं?
अमिताभ बच्चन भी सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर अब तक चुप हैं. सुशांत सिंह राजपूत के लिए इंसाफ की मांग उठाने वाले चाहते हैं कि वो उनकी मौत पर भी बोलें. लोग यह भी चाहते हैं कि अमिताभ बच्चन बॉलीवुड में ड्रग्स रैकेट पर भी अपनी राय बताएं. लेकिन आज जया बच्चन ने इस मामले पर जो कुछ कहा है उससे साफ हो गया है कि बॉलीवुड दो खेमों बंटा हुआ है. कई फिल्म कलाकारों ने जया बच्चन के बयान के समर्थन में ट्वीट किए. उनके बयान को उनके साहस की निशानी बताया. जया बच्चन ने जो बयान दिया था वो सांसद और अभिनेता रविकिशन की प्रतिक्रिया में था. जया बच्चन के बयान पर रविकिशन ने जो जवाब दिया वो भी आज आपको सुनना चाहिए.

ड्रग्स पर बॉलीवुड का बंटवारा
सुशांत सिंह राजपूत और रिया चक्रवर्ती के ड्रग्स का सेवन करते हुए जो वीडियो ज़ी न्यूज़ ने दिखाए थे, उसके बाद से फिल्मी सितारों के बीच एक बहस छिड़ गई है. ऐसा लग रहा है जैसे ड्रग्स पर बॉलीवुड का बंटवारा हो चुका है. अलग-अलग कैंप बन चुके हैं, अलग-अलग हैशटैग और कैंपेन चलाए जा रहे हैं, अब बहस इस बात पर हो रही है कि बॉलीवुड में ड्रग्स कल्चर की जांच होनी चाहिए या फिर नहीं?

सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर तीन महीने तक मौन व्रत धारण करने वाले बड़े-बड़े कलाकार अब ड्रग्स की जांच पर ही सवाल उठा रहे हैं. ऐसा लगता है कि सुशांत सिंह राजपूत के न्याय की लड़ाई फिर पीछे छूट गई है.

फिल्मी कलाकारों को ड्रग्स की जांच में डिस्काउंट
सवाल ये है कि क्या फिल्मी कलाकारों को ड्रग्स की जांच में डिस्काउंट मिलना चाहिए ? या फिर इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए? बड़े-बड़े अभिनेता, निर्माता निर्देशक ड्रग्स के खिलाफ स्वच्छता अभियान से इतने परेशान क्यों हैं?

ड्रग्स पर 'दम मारो दम' और 'उड़ता पंजाब' जैसी फिल्में तो बनाई जा सकती हैं. फिल्मों में ड्रग्स पार्टियों को ग्लैमरस तरीके से दिखाया जा सकता है लेकिन 'उड़ता बॉलीवुड' और फिल्म इंडस्ट्री में ड्रग्स की जांच को बॉलीवुड को बदनाम करने के तौर पर क्यों देखा जा रहा है? क्या कुछ फिल्मी कलाकारों के लिए ड्रग्स मल्टी विटामिन बन गया है?

अभिनेता अपने हितों और सुविधा के मुताबिक बोलते हैं...
एक सवाल यह भी उठता है कि क्या फिल्मी कलाकार हमेशा सिर्फ अपने फायदे के लिए सोचते हैं ? नेता हों या फिर अभिनेता दोनों की सफलता और असफलता आम जनता ही तय करती है.

नेता और अभिनेता दोनों जनता की तालियों के दम पर ही अपनी कामयाबी की कहानी लिखते हैं. जनता चाहे तो किसी को जीरो से हीरो बना सकती है और हीरो से जीरो बना सकती है. लेकिन ऐसा लगता है कि ज्यादातर फिल्म अभिनेता अपने हितों और सुविधा के मुताबिक बोलते हैं और खामोश रहते हैं. पिछले कुछ वर्षों में बॉलीवुड में एक ट्रेंड देखा जा रहा है जिसमें अपनी फिल्म की रिलीज से पहले फिल्मी कलाकार या तो कोई विवादित बयान देते हैं या फिर किसी विवादित मुद्दे के साथ खड़े हो जाते हैं. शायद ऐसे अभिनेता विवादित मुद्दों पर बयान देकर अपनी फिल्म को प्रमोट कराने की कोशिश करते हैं ?

एक्टर, राजनीति में फ्लॉप क्यों?
देखा जाता है कि जब एक्टर राजनीति में आते हैं तो फ्लॉप हो जाते हैं. बहुत बड़े-बड़े फिल्म कलाकारों की भी यही कहानी है. राजनीति में उनकी हैसियत कभी शो पीस से अधिक की नहीं रही. पहले फिल्म कलाकारों की भूमिका राजनीतिक रैलियों में भीड़ जुटाने वाले की होती थी. लेकिन धीरे-धीरे राजनीतिक दलों ने उन्हें टिकट देकर राजनीति में उतारना शुरू कर दिया.

- इसका सबसे बड़ा उदाहरण अमिताभ बच्चन हैं जिन्हें 1984 में राजीव गांधी ने इलाहाबाद लोकसभा सीट से टिकट दिया था. उन्हें उस दौर के बड़े नेता और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा के खिलाफ उतारा गया था. अमिताभ बच्चन ने हेमवती नंदन बहुगुणा को 1 लाख 87 हजार वोट से हरा दिया. इस हार से हेमवती नंदन बहुगुणा का करियर खत्म हो गया। लेकिन अमिताभ बच्चन भी राजनीति में नहीं चले और मात्र 3 साल बाद उन्हें राजनीति से संन्यास लेना पड़ा.

- शत्रुघ्न सिन्हा भी फिल्मों में जितने सफल रहे, उतनी सफलता उन्हें राजनीति में नहीं मिली। वो कई बार सांसद बने और वाजपेयी सरकार में मंत्री भी बने. लेकिन अपने बयानों के कारण वो बीजेपी से दूर होते गए. फिलहाल वो कांग्रेस में हैं, लेकिन वहां भी उनकी कोई खास भूमिका नहीं दिखती.

- ऐसे कई नाम गिनाए जा सकते हैं, जिनमें- विनोद खन्ना, अनुपम खेर, गोविंदा, राजबब्बर, परेश रावल, हेमामालिनी और उर्मिला मातोंडकर जैसे नाम हैं.

दक्षिण की राजनीति में फिल्म कलाकारों का हमेशा से बहुत प्रभाव
दूसरी तरफ साउथ की फिल्म इंडस्ट्री है, जहां फिल्मों के कलाकार तमाम बड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते हैं. उनकी राय अक्सर जनता के बीच में बहुत ध्यान से सुनी जाती है. जनता भी उनकी बातों को गंभीरता से लेती है. शायद यही कारण है कि दक्षिण की राजनीति में फिल्म कलाकारों का हमेशा से बहुत प्रभाव रहा है.

- इसकी सबसे बड़ी मिसाल MG रामचंद्रन हैं, जो 10 साल तक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे. वो तमिल फिल्मों के सफल कलाकार थे. आज भी तमिलनाडु में उन्हें भगवान की तरह पूजा जाता है.

- MG रामचंद्रन की ही शिष्या कही जाने वाली जयललिता भी राजनीति के शिखर तक पहुंचीं. 140 फिल्मों में काम कर चुकीं जयललिता 6 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं.

- तमिल फिल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत भले ही खुलकर राजनीति में नहीं आए हैं, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर वो खुलकर अपनी राय रखते हैं. किसी मुद्दे पर रजनीकांत के बयान पूरे देश में गंभीरता से लिए जाते हैं.

- दक्षिण भारत में राजनीति में कामयाब एक्टरों की ये लिस्ट बहुत लंबी है, इसमें NT रामाराव, करुणानिधि, कमल हासन, चिरंजीवी जैसे कई मशहूर नाम शामिल हैं.

 रिया चक्रवर्ती को जमानत से इनकार
उधर, ड्रग्स के मामले में फंस चुकीं रिया चक्रवर्ती की जमानत याचिका पर कोर्ट के फैसले की कॉपी सामने आई है. शुक्रवार को मुंबई की अदालत ने रिया चक्रवर्ती को जमानत से इनकार कर दिया था. उस फैसले की कॉपी हमारे पास है. अदालत ने कई ऐसी बातें बताई हैं जिनके कारण रिया चक्रवर्ती को जमानत नहीं मिली.

इसके मुताबिक ड्रग्स की डिलीवरी और पेमेंट की पूरी जानकारी रिया चक्रवर्ती को होती थी. कई बार तो सुशांत की पसंद की ड्रग्स का फैसला भी रिया चक्रवर्ती ही करती थीं. ड्रग्स के लिए कई बार रिया चक्रवर्ती के क्रेडिट कार्ड से भी पैसे दिए गए हैं. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी NCB के पास कई सबूत हैं जिससे यह साबित होता है कि रिया चक्रवर्ती जब जेल से बाहर जाएंगी तो वो सबूतों के साथ छेड़छाड़ सकती हैं और ड्रग्स सप्लाई करने वालों को अलर्ट कर सकती हैं.

बॉलीवुड और ड्रग्स माफिया
लोक सभा में एक सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि बॉलीवुड और ड्रग्स माफिया के बीच किसी सांठगांठ के सबूत अभी नहीं मिले हैं. ये सवाल केरल में कन्नूर के कांग्रेस सांसद के सुधाकरन ने पूछा था. जवाब में सरकार ने कहा है कि 28 अगस्त को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने इस सिलसिले में एक केस रजिस्टर किया है और अभी तक की जांच के मुताबिक कुल 10 लोग गिरफ्तार किए गए हैं. फिलहाल जांच जारी है.

ड्रग्स के मामले में बॉलीवुड दो कैंप में बंट चुका है. लेकिन कुछ बड़े कलाकार शांत हैं. यहां पर मैं राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की एक मशहूर कविता की कुछ पंक्तियां याद दिलाना चाहूंगा-

समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध
जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध

यानी सत्य और असत्य के युद्ध में जो तटस्थ है गलती उसकी भी है. समय उनका भी अपराध जरूर लिखेगा. सत्य और असत्य की लड़ाई में हमें हर हाल में अपना पक्ष चुनना होगा.

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