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अरुण जेटली ने इमरजेंसी के दौरान जेल में काटे थे 19 महीने, जानें कैसे शुरू की थी छात्र राजनीति

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली को सांस लेने में तकलीफ और बेचैनी की शिकायत के बाद नौ अगस्त को दिल्ली के एम्स में भर्ती थे. 

अरुण जेटली ने इमरजेंसी के दौरान जेल में काटे थे 19 महीने, जानें कैसे शुरू की थी छात्र राजनीति
अरुण जेटली ने नई दिल्ली सेंट जेवियर्स स्कूल से 1957-69 तक पढ़ाई की थी. (फाइल फोटो))

नई दिल्ली: बीजेपी के वरिष्‍ठ नेता और पूर्व वित्‍त मंत्री अरुण जेटली का शनिवार को निधन हो गया है. वह 9 अगस्‍त से दिल्‍ली स्थित एम्‍स में भर्ती थे. रविवार दोपहर 12.07 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली. पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली को सांस लेने में तकलीफ और बेचैनी की शिकायत के बाद नौ अगस्त को दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था.

पिछले कुछ महीने से लगातार गिर रही थी सेहत
पिछले दिनों अरुण जेटली को एक्‍स्‍ट्राकारपोरल मेंब्रेन ऑक्‍सीजनेशन (ECMO) और इंट्रा ऐरोटिक बैलून (IABP) सपोर्ट पर रखा गया था. पिछले कुछ महीनों में वित्त मंत्री अरुण जेटली की सेहत लगातार गिर रही है. खराब सेहत की वजह से ही उन्होंने 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था और खुद को मोदी कैबिनट-2 में खुद को शामिल न करने के लिए पीएम मोदी को पत्र लिखा था. 

ऐसा रहा अरुण जेटली का छात्र जीवन
- अरुण जेटली ने नई दिल्ली सेंट जेवियर्स स्कूल से 1957-69 तक पढ़ाई की.
- इसके बाद उन्होंने श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और डीयू से 1977 में लॉ की डिग्री ली.
- अपनी पढ़ाई के दौरान जेटली को अकादमिक और पाठ्येतर क्रियाकलापों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कई सम्मान मिले.
- डीयू में पढ़ाई के दौरान ही वे 1974 में डीयू स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष बने.
- जेटली सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता के पद पर भी रह चुके हैं.

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1974 से शुरू की छात्र राजनीति
- अरुण जेटली दिल्ली यूनिवर्सिटी कैंपस में पढ़ाई के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े और 1974 में स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष बने.
- इमरजेंसी (1975-1977) के दौरान जेटली को मीसा के तहत 19 महीना जेल में भी काटने पड़े.
- राज नारायण और जयप्रकाश नारायण द्वारा चलाये गए भ्रष्टाचार विरोधी जनांदोलन में भी वो प्रमुख नेताओं में से थे.
- जय प्रकाश नारायण ने उन्हें राष्ट्रीय छात्र और युवा संगठन समिति का संयोजक नियुक्त किया.
- वो नागरिक अधिकार आंदोलन में भी सक्रिय रहे और सतीश झा और स्मिता कोठारी के साथ पीपुल्स यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टीज बुलेटिन की शुरुआत की.
- जेल से रिहा होने के बाद वो जनसंघ में शामिल हो गए थे.