महाराज के गढ़ में 'नाथ' ने दिया 'कमल' को झटका, कांग्रेस में शामिल हुए BJP नेता सतीश सिकरवार

चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी के बाद बालेंदु शुक्ल, केएल अग्रवाल और अब सतीश सिकरवार बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं.ये बीजेपी के लिए ग्वालियर-चंबल में बड़ा झटका माना जा रहा है. दरअसल, सतीश सिकरवार ग्वालियर के बड़े नेता माने जाते हैं. 

महाराज के गढ़ में 'नाथ' ने दिया 'कमल' को झटका, कांग्रेस में शामिल हुए BJP नेता सतीश सिकरवार
कांग्रेस में शामिल हुए BJP नेता सतीश सिकरवार

भोपाल: मध्य प्रदेश में 27 सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले दल-बदल का खेल शुरू हो गया है. चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी के बाद बालेंदु शुक्ल, केएल अग्रवाल और अब सतीश सिकरवार बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. अपना कुनबा बढ़ाने वाली कांग्रेस का कहना है कि ये खेल पहले बीजेपी ने शुरू किया था. अब उसी पर भारी पड़ रहा है. वहीं शिवराज सरकार के मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि झूठे सपने दिखाकर कांग्रेस ने नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करवाया है. 

2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के प्रत्याशी रहे सतीश सिकरवार ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की है. भोपाल में पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ के बंगले पर अपने समर्थकों के साथ सतीश ने कांग्रेस की सदस्यता ली. उनके साथ करीब 300 समर्थकों ने भी कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की. ये बीजेपी के लिए ग्वालियर-चंबल में बड़ा झटका माना जा रहा है. दरअसल, सतीश सिकरवार ग्वालियर के बड़े नेता माने जाते हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ उनके लोगों के आने से सतीश नाराज चल रहे थे. पिछले चुनाव में कांग्रेस के मुन्नालाल गोयल से चुनाव हार गए थे.

सतीश सिकरवार के कांग्रेस में शामिल होने प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष चंद्रप्रभाष शेखर का कहना है कि जो हमारे यहां से गए वो सत्ता के लालच में गए थे, जो हमारे पास आ रहे हैं वो हमारी विचारधारा के आधार पर आ रहे हैं. ये सिलसिला यूहीं चलता रहेगा. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने दलबदल का ये खेल शुरू किया था. उसने हमारे नेताओं के साथ ही सरकार बनाई थी, लेकिन अब ज्यादा दिन सरकार नहीं चलेगी. 

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वहीं कांग्रेस पर पलटवार करते हुए बीजेपी सरकार में मंत्री और चुनाव प्रबंध समिति के संयोजक भूपेंद्र सिंह ने कहा कि चुनावी दौर में इधर-उधर का खेल चलता रहता है. उन्होंने कहा कि बीजेपी कमजोर पड़ने वालों में से नहीं है. हम उपचुनाव जीतेंगे, कांग्रेस को एक बार फिर हार का सामना करना पड़ेगा. वहीं बीजेपी के पूर्व सांसद आलोक संजर ने कहा कि जिसे बीजेपी की विचारधारा स्वीकार होगी, उसे इंकार कैसे किया जा सकता है.

आपको बता दें कि दल-बदल एमपी में नया नहीं है. कांग्रेस की कमजोर कड़ियों को बीजेपी में जोड़ने का सिलसिला 2013 नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव से ऐन वक्त पहले शुरू हुआ था, तब विधानसभा के चलते सत्र में चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी ने कांग्रेस छोड़कर चौंका दिया था. इसके बाद कांग्रेस सांसद राव उदय प्रताप सिंह ने लोकसभा चुनाव के पहले कांग्रेस छोड़ दी थी. वहीं भागीरथ प्रसाद ने तो लोकसभा चुनाव का टिकट मिलने के बाद अगली सुबह ही बीजेपी का दामन थामा और बीजेपी के टिकट से चुनाव लड़ा. छिटपुट तौर पर ये सिलसिला चलता रहा. लेकिन साल 2020 में बीजेपी ने कमलनाथ की चलती सरकार से 22 विधायकों को लाकर सत्ता का सिंहासन हासिल कर लिया. 

गौरतलब है कि सूबे में 10 मार्च को कांग्रेस के 22 विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा देकर बीजेपी का हाथ थाम लिया था और तत्कालीन कमलनाथ सरकार को अल्पमत में लाकर गिरा दिया था.इसके बाद 12 जुलाई को बड़ा मलहरा से कांग्रेस विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी और 17 जुलाई को नेपानगर से कांग्रेस विधायक सुमित्रा देवी कसडेकर ने भी इस्तीफा दे दिया था. 23 जुलाई को मांधाता विधायक ने भी कांग्रेस से दूरी बना ली. इस तरह मार्च से अब तक पार्टी से इस्तीफा देने वालों की संख्या अब 25 हो गई थी.

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