शराबबंदी पर सरकार का यू-टर्न! बीजेपी का तंज- गंगाजल लेकर खाई झूठी कसम
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शराबबंदी पर सरकार का यू-टर्न! बीजेपी का तंज- गंगाजल लेकर खाई झूठी कसम

अंबिकापुर में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम (mohan markam) ने पूर्ण शराबबंदी (prohibition) को लेकर साफ कह दिया कि प्रदेश में 60 प्रतिशत अनुसूचित क्षेत्र (schedule area) है. ऐसे में शराबबंदी करना ठीक नहीं है.

शराबबंदी पर सरकार का यू-टर्न! बीजेपी का तंज- गंगाजल लेकर खाई झूठी कसम

सरगुजा/रायपुर: प्रदेश में एक बार फिर पूर्ण शराबबंदी (prohibition) को लेकर सियासत होने लगी है. अंबिकापुर पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम (mohan markam) ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि प्रदेश में 60 प्रतिशत अनुसूचित क्षेत्र (schedule area) है. ऐसे में शराब बंदी करना ठीक नहीं है. हालांकि शराब बंदी पर फैसला सरकार को लेना है. अब मरकाम के इस बयान पर बीजेपी हमलावर हो गई गई है. बीजेपी कांग्रेस सरकार को गंगाजल लेकर झूठी कसम खाने वाली बता रही है.

60% हिस्से शराब बंदी संभव नहीं
छत्तीसगढ़ में शराब बंदी के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं भी आदिवासी क्षेत्र से हूं. हमारे में पैदा होने से मरने तक के हर नेग में महुए के फूल और सोमरस का इस्तेमाल होता है. आपने देखा होगा वेद पुराणों में इसके बार में जिक्र है. ऐसे में इन 60 प्रतिशत आदिवासी क्षेत्र (scheduled area) में संभव नहीं है कि शराब बंदी हो. रही बात 40 प्रतिशत क्षेत्र की बात तो सरकार को इस पर फैसला लेना है.

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बीजेपी पर साधा निशाना
मोहन मरकाम (mohan markam) शुक्रवार को अंबिकापुर में डिजीटल सदस्यता अभियान में हिस्सा लेने आए थे. इस दौरान उन्होंने बीजेपी को निशाने में लेते हुए कहा कि कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र के सभी वादे पूरे किए हैं. बीजेपी ने कितने वादे पूरे किए वो इस बात की हिसाब दें.

गंगाजल लेकर किए झूठे वादे
मोहन मरकाम के इस बयाम पर बीजेपी ने हमला बोला है. बीजेपी प्रवक्ता अनुराग सिंहदेव ने कहा कि कांग्रेस की सरकार ने गंगाजल लेकर जो शपथ लिया और झूठ बोला. जो लोग छत्तीसगढ़ के सनातन धर्म अनुयाई हैं वे उन्हें कई वर्षों तक माफ नहीं करेंगे. मोहन मरकाम पहले भी यह कह चुके हैं कि हम शराबबंदी नहीं करेंगे. अब वे अनुसूचित क्षेत्र का बहाना बना कर अपने घोषणा पत्र से मुकर रहे हैं.

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यू-टर्न ले रही है कांग्रेस
आदिवासी समाज के लोग जो शराब से परेशान हैं और बर्बाद हो रहे हैं वे चाहते हैं कि शराबबंदी हो जाए तो क्या उनकी भावना का अब कोई कद्र नहीं है. आदिवासी महिलाएं और बहने जिन्हें शराब के कारण रोजाना किसी ने किसी समस्या का सामना करना पड़ा है. सरकार उनके बारे में कुछ नहीं सोच रही है. कुल मिलाकर कांग्रेस सरकार ने जो वादे किए थे उसमें अब वह यू-टर्न लेते हुए दिखाई दे रही है.

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चुनावी घोषणापत्र में किया था वादा

2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के घोषणा पत्र में शराबबंदी का भी वादा किया गया था. यही वजह है कि सरकार बनने के बाद से बीजेपी लगातार कांग्रेस सरकार से सवाल कर रही थी कि आखिर राज्य में शराबबंदी कब की जाएगी. मगर अब तक शराबबंदी राज्य में नहीं की गई है. इसके पहले भी शराबबंदी को लेकर राज्य में सियासत हो चुकी है.

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