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रायपुर: डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज बेहाल, सरकारी अस्पतालों में OPD चलाने का दावा फेल

सरकार ने दावा किया था कि सीनियर डॉक्टरों की ड्यूटी जरूर लगाई गई है लेकिन वह भी इसलिए ड्यूटी पर दिखाई नहीं दे रहे क्योंकि बाहर गेट पर ही अस्पतालों में मरीजों को भीतर जाने से रोका जा रहा है. 

रायपुर: डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज बेहाल, सरकारी अस्पतालों में OPD चलाने का दावा फेल
सरकार ने दावा किया था कि सीनियर डॉक्टरों की ड्यूटी जरूर लगाई गई है.

रायपुर: छत्तीसगढ़ में सोमवार को डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से हजारों की तादात में मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा. मरीजों को पूरे प्रदेश के किसी भी अस्पताल में ओपीडी की सुविधा नहीं मिली. कुछ निजी अस्पतालों में डॉक्टरों ने मानवता के नाते अपनी सेवाएं जरूर थी लेकिन जिन सरकारी अस्पतालों में ओपीडी की सेवाएं संचालित होने का दावा किया गया था वहां ओपीडी की सेवाएं पूरी तरीके से बाधित रही. डॉक्टरों ने पहले से ही हड़ताल की घोषणा कर रखी थी. इसमें जूनियर डॉक्टरों के साथ-साथ आईएमए यानी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से संबंधित डॉक्टर भी शामिल हुए. 

रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में हर रोज  5000 से ज्यादा मरीज ओपीडी में अपनी जांच करवाते हैं लेकिन आज कुछ मरीजों को छोड़कर बाकी सभी को अस्पताल के भीतर घुसने तक नहीं दिया गया. जिन मरीजों की जांच हुई वह इमरजेंसी में अस्पताल में भर्ती के लिए लाए गए थे लेकिन इमरजेंसी में भी उन्हें जिस गंभीरता के साथ डॉक्टरों के द्वारा देखा जाना था वो नहीं हो पाया. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इक्के-दुक्के डॉक्टर ही इमरजेंसी में राउंड लेते नजर आए. इसी तरीके से डीकेएस हॉस्पिटल के साथ जिला चिकित्सालय और दूसरे अस्पतालों में भी ऐसे ही हालात बने रहे. 'ओपीडी बंद है' यह लिखकर सभी जगह पर बोर्ड टांग दिए गए थे और वहां तैनात गार्ड ने मरीजों को भीतर तक जाने नहीं दिया निजी अस्पतालों के भी ऐसे ही हालात बने रहे. दुर्ग, बस्तर, अम्बिकापुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, गरियाबंद, कोरबा जैसे जिलों के भी सरकारी अस्पतालों में ओपीडी नहीं चली, वहां के कई डॉक्टर रायपुर के हड़ताल में शामिल हुए.

जी एमपी सीजी ने अस्पताल जाकर किया रियलिटी चेक 
सरकार ने यह दावा किया था कि सरकारी अस्पतालों में की व्यवस्था संचालित रहेगी लेकिन अंबेडकर अस्पताल में और दूसरे शासकीय अस्पतालों में किसी प्रकार की ओपीडी की व्यवस्था संचालित नहीं है. आईएमए के डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से ना तो जूनियर डॉक्टर और ना ही सीनियर डॉक्टर अस्पतालों में नजर आ रहे. अंबेडकर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भी डॉक्टरों ने राउंड नहीं लिया और ना ही वहां किसी प्रकार से मरीजों का इलाज किया जा रहा है के दुख के डॉक्टर  बीच-बीच में जरूर घूमने आ रहे, लेकिन बाहर निकलकर वह दूसरे डॉक्टरों के प्रोटेस्ट में शामिल हो रहे.

जी एमपी सीजी की टीम ने अंबेडकर अस्पताल पहुंचकर जायजा लेने की कोशिश तो वहां पत्रकारों को भीतर जाने नहीं दिया गया, हमने स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव से इस बारे में बात की. उन्होंने कहा कि शासकीय अस्पतालों में दो घंटे की ओपीडी चलाने के लिए सभी डॉक्टरों को को निर्देश दिया गया है. उन्हें हमने अस्पताल के हाल की भी सूचना दी लेकिन डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन ने ठप इमरजेंसी और ओपीडी की सुविधा को दबाए रखा. इस संबंध में हमने अस्पताल के अधीक्षक डॉ विवेक चौधरी को भी लगाया गया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया. 

सरकार ने दावा किया था कि सीनियर डॉक्टरों की ड्यूटी जरूर लगाई गई है लेकिन वह भी इसलिए ड्यूटी पर दिखाई नहीं दे रहे क्योंकि बाहर गेट पर ही अस्पतालों में मरीजों को भीतर जाने से रोका जा रहा है. आंबेडकर अस्पताल में गेट पर गार्ड मरीजों को भीतर जाने से रोक रहे हैं. उन्होंने पहले ही बाहर बोर्ड पर लिखा है कि ओपीडी बंद है इससे यह साबित हो रहा है की ओपीडी को लेकर सरकार का आदेश और वैकल्पिक व्यवस्था किसी फायदे की नहीं, सारी व्यवस्थाएं बंद है.

ये है मरीजों का हाल
कोई बेमेतरा, कोई बलौदाबाजार, गरियाबंद से ओपीडी में जांच कराने पहुंचा था, लेकिन अस्पताल में उन्हें भीतर घुसने ही नहीं दिया गया. गॉर्ड ने उन्हें रोककर रखे रखा.