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झीरम घाटी हत्याकांडः जांच की दिशा बदली, 8 नए बिंदुओं पर होगी जांच

छत्तीसगढ़ में सबसे बड़े झीरम घाटी कांड की जांच की दिशा बदल दी गयी है. अब इस मामले में राजनीतिक षड्यंत्र के तहत जांच की जाएगी.

झीरम घाटी हत्याकांडः जांच की दिशा बदली, 8 नए बिंदुओं पर होगी जांच
(फाइल फोटो)

रायपुर: छत्तीसगढ़ में सबसे बड़े झीरमघाटी कांड की जांच की दिशा बदल दी गयी है. अब इस मामले में राजनीतिक षड्यंत्र के तहत जांच की जाएगी. इसके लिए सरकार द्वारा तय किये गए 8 नए बिंदुओं को न्यायिक जांच आयोग ने शामिल कर सार्वजनिक अधिसूचना जारी की है. इस अधिसूचना को राजपत्र में प्रकाशित कर लोगों से सबूत के तौर पर जानकारी मांगी गई है. अब कोई भी चाहे तो इस घटना से संबंधित जानकारी आयोग को सौंप सकता है. इस घटना के बारे में जानकारी रखने वाले कोई भी व्यक्ति को शपथपत्र भरकर न्यायिक जांच आयोग के समक्ष अपनी बात रखनी होगी.

आपको बता दें कि 25 मइ 2012 को जगदलपुर- सुकमा रोड पर झीरमघाटी के पास नक्सलियों ने कांग्रेस के काफिले पर हमला किया था. इसमें 27 कांग्रेसियों समेत 31 लोगों की नक्सलियों ने कर दी थी हत्या. इस कांड से संबंधित आम लोगों, स्थानीय निवासी, सुरक्षा कर्मी, किसान से लेकर सभी लोगों से खुलेआम जानकारी के संबंध में जारी की गई है यह अधिसूचना. 

आपको बता दें कि प्रमुख 8 बिंदुओं पर जो जानकारी मांगी गई, उसे छत्तीसगढ़ सरकार ने तय किया था. इसमें ज्यादातर बिंदु राजनीतिक षडयंत्र से संबंधित हैं. इसमें यूनिफाइड कमांड के अध्यक्ष की भूमिका के साथ साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा की सुरक्षा , कांग्रेस नेताओं के काफिले की सुरक्षा, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष स्व. नंदकुमार पटेल पर गरियाबंद में हुए हमले और एलेक्स पॉल मेनन के अपहरण के दौरान नक्सलियों से हुए समझौते को लेकर भी जांच के बिंदु शामिल हैं.

बहुचर्चित जीराम घाटी कांड की न्यायिक जांच के लिए जांच की दिशा में बदलाव किया गया है. 8 बिंदुओं में जांच उन सवालों पर केंद्रित किया गया है जो पिछली सरकार के दौरान गायब थे. कांग्रेस विपक्ष में रहते हुए इन्हीं सवालों पर झीरम घाटी कांड की सीबीआई जांच की मांग करती रही है. झीरम घाटी कांड की जांच के लिए न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में गठित विशेष न्यायिक जांच आयोग ने यह बिंदु तय किए हैं. राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति जो इस घटना के संबंध में जानकारी रखते हैं वह आयोग के कैंप कार्यालय बिलासपुर या सचिव से एडिशनल रजिस्ट्रार उच्च न्यायालय बिलासपुर में जानकारी लिखित में दे सकते हैं. 

कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा जब झीरमघाटी की घटना हुई थी तब उस वक्त भी यह साफ हो गया था कि यह एक आपराधिक और राजनैतिक षड्यंत्र की घटना है . इसकी जब जांच की गई थी तब ना तो NIA की जांच में षड्यंत्र को लेकर जांच बिंदु तय किये गए और न ही आयोग की न्यायिक जांच में इसे शामिल किया गया लेकिन कांग्रेस की सरकार आने के बाद अब न्यायिक जांच आयोग ने अधिसूचना जारी कर आठ नए बिंदुओं को अपनी जांच में शामिल किया गया.

उन्होंने कहा कि इन बिंदुओं पर जानकारी रखने वाले लोगों से शपथ पत्र के माध्यम से जानकारी मांगी गई है. आयोग के कार्य क्षेत्र में इन बिंदुओं को जोड़े जाने और अधिसूचना जारी करने का कांग्रेस स्वागत करती है. कांग्रेस कार्यकर्ता और पीड़ितों के परिजन 2013 से आज तक इस षड्यंत्र के पीछे छुपी सच्चाई का इंतजार करते रहे, जो अब जाकर सामने आएगी.

शैलेश नितिन ने यह भी कहा कि- NIA के गठन में पूर्व की रमन सिंह सरकार ने जो नोडल अधिकारी बनाये थे, उन्होंने जांच में रोड़ा अटकाया था और जब केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी तो इसकी जांच ही नहीं की गई. न्यायिक जांच आयोग भी इन बिंदुओं को शामिल नहीं किये जाने को लेकर अब तक जांच नहीं कर पा रहा था, लेकिन अब इसकी जांच होगी और सच्चाई सामने आएगी. 

बीजेपी ने CM से कहा- आप अपनी जेब से सबूत निकालकर सौंपें
बीजेपी के प्रवक्ता नरेश गुप्ता ने कहा कांग्रेस पार्टी के तात्कालीन प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सैकड़ों बार कहते थे कि उनके पास जेब में झीरमघाटी के संबंध में सबूत हैं, और उसे कहाँ लेकर जाएं यह उन्हें समझ नहीं आ रहा... पार्टी का यह कहना है कि उन सबूतों को अब वो आयोग के सामने रखें.

इतना ही नहीं प्रदेश के एक कैबिनेट मंत्री भी उस घटना में मौके पर मौजूद थे, और वो वहां से चावी लगी बाइट से भाग निकले थे... उनसे भी पूछा जाना चाहिए...झीरमघाटी की जांच में न्यायिक जांच आयोग की अधिसूचना को लेकर पूर्व मंत्री राजेश मूणत का बड़ा बयान. उन्होंने कहा विधानसभा में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे और वर्तमान के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जेब में सबूत रखने की बात कहकर इस मामले को उठाया करते थे.

साथ ही वह यह भी कहते थे इन सबूतों को लेकर वह किसके पास जाएं. उन्होंने कहा-  मेरा यह कहना है कि अब वह अपने पास रखे सबूतों को न्यायिक जांच के समक्ष प्रस्तुत करें और बताएं कि उनके पास ऐसे क्या तथ्य और सबूत थे. उन्हें तो पहले ही उन सबूतों को न्यायिक जांच आयोग के समक्ष रखना था लेकिन उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया.

.एनआईए की जांच में बहुत सारे बिंदुओं पर पड़ताल हुई हालांकि किन बिंदुओं पर जांच हुई मैं यह नहीं बता सकता लेकिन एनआईए की फाइल का मामला ठीक उसी तरीके से है कि राज्य सरकार अपने स्तर पर इस मामले को नए बिंदु तय कर केवल राजनीति के लिए उठाना चाहती है.