चिंतामन मंदिर में तीन रूपों में दर्शन देते हैं गजानंद, भगवान राम ने की थी मूर्ति की स्थापना

 देश भर के प्रसिद्ध गणेश मंदिरों में से एक उज्जैन के चिंतामन मंदिर में गणेश चतुर्थी के मौके पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी. इस दौरान श्रद्धालुओं ने अपनी-अपनी मान्यता को लेकर मंदिर में पूजा-अर्चना की.

चिंतामन मंदिर में तीन रूपों में दर्शन देते हैं गजानंद, भगवान राम ने की थी मूर्ति की स्थापना
चिंतामन गणेश मंदिर की तस्वीर

मनोज जैन/उज्जैन :  देश भर के प्रसिद्ध गणेश मंदिरों में से एक उज्जैन के चिंतामन मंदिर में गणेश चतुर्थी के मौके पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी. इस दौरान श्रद्धालुओं ने अपनी-अपनी मान्यता को लेकर मंदिर में पूजा-अर्चना की. चिंतामन मंदिर में भगवान गणेश के तीन रूप एक साथ विराजमान है, जो चितांमण गणेश, इच्छामण गणेश और सिद्धिविनायक के रूप में जाने जाते हैं. ये भक्तों को एक अलग ही अनोखे स्वरूप में दर्शन देते हैं क्योंकि यह स्वंम भू है. यहां सिर्फ हाथी की सूण्ड वाले मस्तक ही है

चिंतामन मंदिर में भगवान का श्रृंगार सिंदूर से किया जाता है.श्रृंगार से पहले दूध और जल से अभिषेक किया जाता है और विशेष रूप से मोदक एवं मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाया जाता है. भगवान गणेश को तीन पत्तों वाली दूब विशेषकर भक्तों द्वारा चढ़ाई जाती है. यहां भक्त गणेश जी के दर्शन कर मंदिर के पीछे उल्टा स्वास्तिक बनाकर मनोकामना मांगते है और जब मनोकामना पूर्ण हो जाती है तो वह वापस दर्शन करने आते हैं.

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भगवान राम, सीता और लक्ष्मण ने की थी मूर्ति की स्थापना
चिंतामण गणपति की स्थापना के बारे में कई कहानियां प्रचलित है.ऐसा माना जाता है कि राजा दशरथ के उज्जैन में पिण्डदान के दौरान भगवान रामचन्द्र ने यहां आकर पूजा अर्चना की थी. सतयुग में राम,लक्ष्मण और सीता मां वनवास पर थे तब वे घूमते-घूमते यहां पर आये तब सीता मां को बहुत प्यास लगी. लक्ष्मण जी ने अपने तीर इस स्थान पर मारा जिससे पृथ्वी में से पानी निकला और यहां एक बावडी बन गई. माता सीता ने इसी जल से अपना उपवास खोला था. तभी भगवान राम ने चिंतामण,लक्ष्मण ने इच्छामण एवं सिद्धिविनायक की पूजा अर्चना की थी. मंदिर के सामने आज भी वह बावडी मोजूद है. जिसे लक्ष्मण बावड़ी के नाम से जाना जाता है.

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