MP उपचुनाव 2020: ग्वालियर-चंबल की 16 सीटें तय करेंगी कि सिंधिया का किला बचेगा या ढह जाएगा?
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MP उपचुनाव 2020: ग्वालियर-चंबल की 16 सीटें तय करेंगी कि सिंधिया का किला बचेगा या ढह जाएगा?

सिंधिया शाही परिवार का गढ़ मानी जाने वाली ग्वालियर-चंबल की 16 सीटों पर उनकी साख दांव पर लगी हुई है. यही कारण है कि ग्वालियर चंबल क्षेत्र की हर सीट पर सिंधिया काफी पसीना बहा रहे है.

 MP उपचुनाव 2020: ग्वालियर-चंबल की 16 सीटें तय करेंगी कि सिंधिया का किला बचेगा या ढह जाएगा?

भोपाल: मध्यप्रदेश में हो रहे 28 सीटों पर उपचुनाव के नतीजे तय करेंगे कि सत्ता में कांग्रेस रहेगी या बीजेपी. लेकिन इन नतीजों से सिंधिया राजघराने का फैसला भी होगा. खासतौर पर सिंधिया शाही परिवार का गढ़ मानी जाने वाली ग्वालियर-चंबल की 16 सीटों पर उनकी साख दांव पर लगी हुई है.

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बता दें कि 53 साल पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने भी तत्कालीन मुख्यमंत्री डीपी मिश्रा की सरकार गिरा दी थी, उन्होंने 36 विधायकों को पार्टी से अलग कर लिया था.

सिंधिया के भरोसे समर्थक पूर्व विधायक
उपचुनाव की 28 सीटों पर नेताओं का राजनीतिक भविष्य इस उपचुनाव में दांव पर लगा है. यही कारण है कि ग्वालियर चंबल क्षेत्र की हर सीट पर सिंधिया काफी पसीना बहा रहे है. पूरा क्षेत्र ही सिंधिया घराने के प्रभाव का माना जाता है तभी तो यहां कि सारी सीटों पर कांग्रेस के विधायक जीत कर आए थे. अब सभी बागी विधायक सिंधिया के भरोसे चुनाव जीतना चाह रहे है. 

कोरोना भी रोक न सका
इस उपचुनाव ने सभी की नींद उड़ा रखी है. प्रत्याशी समझ नही पा रहे कि इस बार कौन जीतेगा और किसे हार का सामना पड़ेूगा. वही मतदाताओं की खामोशी ने भी दोनों दलों की चिंता बढ़ा रखी है. सत्ता बचाने और सत्ता पर काबिज बने रहने के लिए बीजेपी-कांग्रेस नेताओं को कोरोना महामारी भी रोक नही पाई.

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विजयाराजे सिंधिया ने गिराई थी सरकार
डीपी मिश्रा की सरकार के समय ग्वालियर से शुरू हुए छात्र आंदोलन ने प्रदेश सरकार को हिला दिया था. आंदोलन के दौरान महाराज बाड़ा ग्वालियर में प्रदर्शन में पुलिस ने छात्रों पर फायरिंग कर दी. जिसमें एक छात्र की मौत हो गई थी. इसे लेकर विजयाराजे सिंधिया अपनी ही सरकार के खिलाफ हो गई. इसे लेकर जब तत्कालीन मुख्यमंत्री डीपी मिश्रा से मिलने भोपाल पहुंची तो वहीं एसपी को हटाने की मांग रखी जो स्वीकार नहीं की गई. इसके बाद राजमाता ने 36 विधायकों के साथ कांग्रेस छोड़ दी और संयुक्त विधायक दल गठित किया. इससे सरकार अल्पमत में आ गई और राष्ट्रपति ने प्रदेश की डीपी मिश्रा सरकार को बर्खास्त कर दिया.

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