रायपुर: आदिवासी नृत्य उत्सव में आदिवासी थाप पर जमकर थिरके राहुल गांधी

27 दिसंबर से 29 दिसंबर तक होने वाले इस महोत्सव का उद्घाटन करने पहुंचे राहुल गांधी ने आदिवासी थाप पर जमकर डांस भी किया.

रायपुर: आदिवासी नृत्य उत्सव में आदिवासी थाप पर जमकर थिरके राहुल गांधी
आदिवासी थाप पर थिरकते राहुल गांधी

रायपुर: रायपुर में शुरू हुआ आदिवासी नृत्य महोत्सव जिसका उद्घाटन राहुल गांधी ने किया, इस महोत्सव का आयोजन रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में किया गया है, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने की और आपको बता दें कि, इस महोत्सव का उद्घाटन करने पहुंचे राहुल गांधी ने भी आदिवासी थाप पर जमकर डांस किया. 27 दिसंबर से 29 दिसंबर तक होने वाले इस आयोजन के लिए चार हजार दर्शकों की क्षमता वाला विशाल डोम तैयार किया गया है. 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राहुल गांधी को सम्बोधित करते हुए कहा कि, हमारे नेता राहुल गांधी कहते थे कि सरकार बने तो हर वर्ग को लगे कि हमारी सरकार है, और हमने 1 वर्ष पूर्ण होने से पहले ही किसानों और आदिवासियों का विश्वास जीता है,साथ ही लोहंडीगुड़ा में आदिवासियों की जमीन उन्हें वापस दिलवाई है. आज हमारे देश में एनआरसी, एनपीआर की बात हो रही है, जबकि हमारे छ्त्तीसगढ में ऐसा कुछ नहीं है, यहाँ अनेकता में एकता है और यही हमारी ताकत है, हम संविधान पर चलने वाले लोग हैं, जो मौलाना अबुल कलाम आजाद के मार्ग पर चलते हैं.

राहुल गांधी ने बताया कि कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन्हे आदिवासी महोत्सव में आने के लिए पूछा था, जिसपर राहुल ने कहा,"सवाल पूछने की जरूरत नही है. जहाँ आदिवासियों की बात होती है मैं वहाँ आऊंगा ही". साथ ही राहुल ने कहा कि आदिवासियों के सामने देश मे बहोत समस्या है, लेकिन मैं खुशी से कहता हूं कि छ्त्तीसगढ की सरकार में आपकी आवाज सुनाई दे रही है. राहुल ने कुपोषण और आदिवासियों की जमीन लौटाने की बात करते हुए अपनी सरकार की तारीफ की और भाजपा पर निशाना साधते हुए देश की अर्थव्यवस्था, नीतियों, नोटबन्दी और जीएसटी के मुद्दों पर भी बातें कही.

बता दें कि इस महोत्सव में 6 देशों सहित 25 राज्यों के आदिवासी कलाकार अपनी कला की प्रस्तुति देंगे. 
27 दिसंबर से 29 दिसंबर तक होने वाले इस आयोजन को लेकर चार हजार दर्शकों की क्षमता वाला विशाल डोम तैयार किया गया है. इसमें दर्शकों के बैठने के साथ ही ग्रीन रूम, फूड जोन और शिल्म ग्राम भी सजेगा। महोत्सव में भारतीय राज्यों के अलावा बांग्लादेश, श्रीलंका, थाईलैंड, यूगांडा, बेलारूस और मालदीव के कलाकार भी शामिल हो रहे हैं। महोत्सव में चार वर्गों में होने वाली प्रतियोगिताओं में प्रत्येक वर्ग में प्रथम, द्वितीय, तृतीय पुरस्कार तो होंगे ही साथ ही कई सांत्वना पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे. 
27 दिसंबर : असम का बागरूंगा नृत्य, तेलंगाना का कोया, झारखंड का छाऊ, ओडिशा का सिंगारी, गुजरात का सिद्दी, राजस्थान का सहरिया स्वांग, जम्मू का गुजर, हिमाचल प्रदेश का घुरई, लद्दाख का लद्दाखी, उत्तराखंड का झांझी, केरल का तैयम, महाराष्ट्र का तड़पा, तेलंगाना का गुसाड़ी, मध्यप्रदेश का भगोरिया, अरूणाचल प्रदेश का रेह, आंध्रप्रदेश का लंबाड़ी और उत्तरप्रदेश का गरद नृत्य का कलाकार प्रस्तुति देंगे। इसके बाद थाईलैंड, बांग्लादेश, बेलारूस, मालदीव और युगांडा के कलाकारों द्वारा अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी.
28 दिसंबर : गुजरात का वसावा नृत्य, आंध्रप्रदेश का ढिमसा, त्रिपुरा का ममिता, झारखंड का पायका, तमिलनाडु का टोडा, आरूणाचल प्रदेश का आदि, राजस्थान का गवरी, कोंडगांव का हुल्की सहित असम और मध्यप्रदेश राज्य का नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। गुजरात का राठवा नृत्य, हिमाचल प्रदेश का किन्नौरा, पश्चिम बंगाल का संथाली, ओडिशा का दुरवा, बिहार का करमा, अंडमान निकोबार का निकोबारी, तेलंगाना का माथुरी, त्रिपुरा का होजागिरी, उत्तराखंड का हारूल, मणिपुर का थांगकुल, छत्तीसगढ़ का दंडामि माड़िया, बांग्लादेश, युगांडा, बेलारूस, श्रीलंका, थाईलैंड, मालदीव के कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे.
29 दिसंबर : उत्तराखंड का लाष्पा, जम्मू का बकरवाल, मध्यप्रदेश का भड़म, हिमाचल प्रदेश का गद्दी, कर्नाटक और सिक्किम का नृत्य, झारखंड का दमकच, दंतेवाड़ा का दंडामी, तेलंगाना, लद्दाख का नृत्य, उत्तरखंड का मुखौटा, गुजरात, सिक्किम का नृत्य, केरल का मरायूराट्टम, त्रिपुरा का संगराई,  मध्यप्रदेश का करमा, कोंडगांव का गौर मार नृत्य होगा। इसके साथ ही श्रीलंका, थाईलैड, मालदीव, बांग्लादेश, युगांडा और बेलारूस के कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे.