एक घटना ने किया इतना दुखी कि पूरे गांव के कुत्तों को दिया निमंत्रण और करवाया शाही भोज

दो-तीन दिन पहले रामजी ने फिर सपने में कुत्तों को पत्तल-चाटते और दुत्कारते देखा था. तो उन्होंने कुत्तों को भोज देने की ठान ली. 

एक घटना ने किया इतना दुखी कि पूरे गांव के कुत्तों को दिया निमंत्रण और करवाया शाही भोज
कुत्तों को भोज कराते रामजी

शिवकांत आचार्य/दतिया: दतिया जिले के ग्राम केवलारी में अनोखा अयोजन देखा गया. अभी तक आपने भंडारों और अन्य समारोहों में पत्तल पर भोजन करते और परोसते हुए लोगों को ही देखा होगा लेकिन यह खबर कुछ ऐसी है जिसमें लोग कुत्तों को भोजन कराने के लिए पहुंचे. आमंत्रण के साथ भोजन करने पहुंचे कुत्तों को आयोजक ने पत्तल डलवाई और उस पर शुद्ध घी की पूड़ी, खीर और बूंदी परोसी. यह अनूठा आयोजन को जिला मुख्यालय से करीब सात किलोमीटर दूर दतिया ब्लॉक के केवलारी में हुआ.

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भागवत कथा के बाद कुत्तों को पत्तल चाटते देखा
कुत्ते के भोज के आयोजन की कहानी बिल्कुल अलग और अनूठी है. दरअसल केवलारी में भागवत कथा का आयोजन किया गया था. भागवत कथा के समापन पर गांव में भंडारे का आयोजन हुआ. जिसमें रामजी अहिरवार ने कुत्तों को जूठी पत्तलें चाटते और लोगों को कुत्तों को दुत्कारते भगाते हुए देखा था. जो उन्हें अच्छा नहीं लगा.

सपने में देखा कुत्तों को 
दो-तीन दिन पहले रामजी ने फिर सपने में कुत्तों को पत्तल-चाटते और दुत्कारते देखा था. तो उन्होंने कुत्तों को भोज देने की ठान ली. रामजी ने इस बारे में अन्य ग्रामीणों को बताया तो उन्होंने भी आयोजन करने पर सहमति देते हुए प्रसन्नता जाहिर कर दी. 

कु्त्तों की भोज का निमंत्रण
फिर बुधवार को सुबह रामजी ने गांव में जिन लोगों के यहां कुत्ते पले हैं, उनके घर जाकर निमंत्रण दिया. शाम के समय दलित बस्ती से लोग अपने-अपने कुत्तों को भोजन कराने के लिए रामजी के यहां पहुंचे. रामजी ने वहां खुद व अन्य ग्रामीणों के सहयोग से पत्तल डाल कर कुत्तों को भोजन कराया. इस दौरान करीब डेढ़ सौ कुत्तों को भोजन कराया. बस्ती में कुत्तों को भोजन कराने के अलावा रामजी ने आसपास के खेतों, खलिहानों व सड़क पर घूमने वाले कुत्तों को भोजन कराया. रामजी के इस काम में अनमोल रावत और मोनू अहिरवार सहित अन्य ग्रामीणों ने भी सहयोग किया.

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हर साल आयोजन करेंगे
रामजी का कहना हैं कि कुत्ते जूठे पत्तल चाटते हैं और लोग उन्हें दुत्कारते हैं. इसलिए हमने सोचा कि एक दिन कुत्तों के लिए भोज का आयोजन किया जाए. रामजी का कहना हैं कि वह जिंदा रहा तो हर साल कुत्तों के लिए भोज का आयोजन करेगा और आने वाले साल में पांच गांव के कुत्तों को भोजन कराएगा. वहीं करीब पांच वर्ष से यह अनूठा आयोजन कर ग्राम दो सौ वफादार जानवर कुत्तों को पकवान बनाकर भोजन कराते चले आ रहे है. इस आयोजन साक्षी पूरा ग्रामवासी बनते है.

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