नागरिकता संशोधन बिल को मोदी कैबिनेट की मंजूरी: हिंदू शरणार्थियों के हक पर हाहाकार क्यों?

इस बिल में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर मुस्लिम धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता दिए जाने की बात कही गई है. 

नागरिकता संशोधन बिल को मोदी कैबिनेट की मंजूरी: हिंदू शरणार्थियों के हक पर हाहाकार क्यों?
पूरी संभावना है कि इस बिल को इसी हफ्ते लोकसभा में पेश किया जाएगा.

नई दिल्ली: केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill 2019) को मंजूरी दे दी. कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद इस बिल को संसद में पेश किया जाएगा. पूरी संभावना है कि इस बिल को इसी हफ्ते लोकसभा (Lok Sabha) में पेश किया जाएगा. इस बिल के कानून बन जाने के बाद अफगानिस्तान (Afghanistan), बांग्लादेश (Bangladesh) और पाकिस्तान (Pakistan) से आए 6 धर्मों यानी हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म मानने वाले अल्पसंख्यक शरणार्थियों को भारत में नागरिकता मिल सकेगी. इससे पहले भी संसद में इस बिल को रखा जा चुका है, हालांकि ये बिल राज्यसभा में पास नहीं हो सका था. बड़ा सवाल यही है कि क्या हिंदुओं को शरण से भारत हिंदू राष्ट्र बन जाएगा? 

उधर, कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि बिल संविधान का उल्लंघन है. बीजेपी सांसद रवि किशन ने भारत को हिंदू राष्ट्र बताया है. रवि किशन ने कहा, "सौ करोड़ हिन्दू रहते हैं. यहां जब इतने सारे मुसलमान देश हैं. इतने क्रिस्चियन देश हैं तो सौ करोड़ का ये हिंदू देश होता है. सौ करोड़ की मेजोरिटी जहां है, ये हम लोगों के लिए अद्भुत बात है. हमारा अस्तित्व हमारी पहचान हमारी संस्कृति संस्कार जीवित है, उसको जीवित करने के लिए माटी है जिसका नाम भारत है." 

सियासती महाभारत नागरिकता संशोधन बिल को लेकर छिड़ गई है. पहले आप ये समझ लीजिए ये बिल जिन शरणार्थियों के लिए है, उनकी तादाद भारत में कितनी है. 62,000  हिंदू शरणार्थी श्रीलंका के हैं. 1,00,000 तिब्बत के हैं. 36,000 म्यांमार के हैं. करीब 2 लाख दूसरे देश शरणार्थी हैं. देश में 400 पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी कैंप हैं. 110 श्रीलंका और दूसरे देश के शरणार्थी कैंप हैं जबकि 39 तिब्बती शरणार्थी कैंप चल रहे हैं. 

 

केद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, "इस बिल के प्रावधान जैसे स्पष्ट होंगे सभी लोग इसका स्वागत करेंगे क्योंकि ये राष्ट्रीय हित में है और प्राकृतिक न्याय के हित में है और किसी के खिलाफ नहीं है."

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कांग्रेस नेता शशि थरूर ने बिल का विरोध करते हुए कहा, "जब एक बिल आता है जो एक मज़हब के खिलाफ, एक मज़हब के लोगों को कोई हक नहीं देता है जो दूसरों के लिए देता है. ये तो मेरे खयाल में संविधान के विरुद्ध है, मैं इसके विरुद्ध हूं." बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने कहा, "तीन देश पूरी तरह से केवल मुस्लिम देश हैं, तो वहां से मुसलमान को तो आपत्ति हो ही नहीं सकती. इसलिए जो विवाद उठा है निर्मूल है." 

मोदी सरकार की लगातार कोशिश है कि भारत की संतानों के साथ अब सौतेला व्यवहार बंद होना चाहिए लेकिन विपक्ष को शायद ये मंजूर नहीं है.