कृषि कानून वापसी बिल पास होने पर राहुल गांधी का आया बयान, सरकार से पूछे ये सवाल
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कृषि कानून वापसी बिल पास होने पर राहुल गांधी का आया बयान, सरकार से पूछे ये सवाल

कृषि कानून वापसी बिल पास होने के बाद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि हमें मालूम था कि 3 काले कानून वापस लेने पड़ेंगे. 3-4 पूंजीपति की शक्ति भारत के सामने खड़ी नहीं हो सकती है. वहीं हुआ और कृषि कानून (Agriculture Law) रद्द करना पड़ा. ये देश और किसानो की सफलता है.

कृषि कानून वापसी बिल पास होने पर राहुल गांधी का आया बयान, सरकार से पूछे ये सवाल

नई दिल्ली: कृषि कानून वापसी बिल (Farm Laws Repeal Bill) सोमवार को लोक सभा के बाद राज्य सभा से भी पास हो गया. कृषि कानून वापसी बिल पास होने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने सरकार पर निशाना साधा और कहा हमें पहले से पता था कि कृषि कानून (Agriculture Laws) वापस होंगे. इसके साथ ही उन्होंने सरकार से कई सवाल किए और पूछा कि सरकार को इस विधेयक पर चर्चा क्यों करना चाहती है.

देश के किसानों की सफलता: राहुल गांधी

कृषि कानून वापसी बिल पास होने के बाद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, 'हमें मालूम था कि 3 काले कानून वापस लेने पड़ेंगे. 3-4 पूंजीपति की शक्ति भारत के सामने खड़ी नहीं हो सकती है. वहीं हुआ और कृषि कानून (Agriculture Law) रद्द करना पड़ा. ये देश और किसानो की सफलता है.'

कृषि कानूनों पर चर्चा से डरती है सरकार: राहुल

राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, 'सरकार ने जिस तरह से कृषि कानूनों (Agriculture Laws) को बिना चर्चा रद्द किया. ये दिखाता है कि सरकार चर्चा से डरती है. वे जानते हैं कि गलत किया है और इस वजह से सरकार डरती है. संसद सत्र के दौरान 3 कृषि कानूनों, मृत किसानों. मुआवजा, काले कानून बनाने वाले के पीछे की शक्ति और अजय मिश्रा चर्चा होनी थी, लेकिन सरकार ने ये होने नहीं दिया. सरकार समझती थी कि किसान गरीब हैं, मजबूर हैं और उनको दबाया जा सकता है.'

राहुल गांधी का सरकार से सवाल

किसानों की मौत का जिम्मेदार कौन है?
सरकार किसानों की सभी मांगों को क्यों नहीं मानती?
एमएसपी पर चर्चा क्यों नहीं की गई?
किसके दबाव में कानून बनाए गए थे?
कर्जमाफी पर चर्चा क्यों नहीं की गई?

संसद की क्या जरूरत: राहुल गांधी

राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा, 'अगर चर्चा की जरुरत नहीं है तो संसद की क्या जरुरत है. इसे बंद कर दें. कृषि कानूनों को लेकर पीएम मोदी ने माफी मांगी मतलब उन्होंने माना की उनकी गलती से सात सौ किसान मरे और ये आंदोलन हुआ. अगर गलती मान ली तो मुआवजा तो देना पड़ेगा. उन्होंने कहा की किसानों का समूह आंदोलन कर रहा है. ये समूह नहीं है, ये सारे किसान हैं. पहले आपने खालिस्तानी कहा और अब समूह कह रहे हो.' उन्होंने कहा कि ये कानून किसानों पर आक्रमण था. किसानों की मुश्किलों की लिस्ट लंबी है और हम उनका समर्थन करते हैं.

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