जयपुर: SMOG ने बदला बिजनेस मॉडल, भिवाड़ी में 3 नवंबर से 335 इकाइयों में काम बंद

एनजीटी, रीको, उद्योग विभाग और प्रदूषण बोर्ड की सख्ती के बाद औद्योगिक संगठन भी पर्यावरण प्रदूषण में कमी और ग्रीन विकल्पों को अपनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं. 

जयपुर: SMOG ने बदला बिजनेस मॉडल, भिवाड़ी में 3 नवंबर से 335 इकाइयों में काम बंद
प्रतीकात्मक तस्वीर.

जयपुर: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यून ऐसी सभी संस्थाओं, संगठनों, औद्योगिक समूहों और व्यक्तियों पर सख्त हैं, जो दिल्ली की आबोहवा पर असर डाल रहे हैं. एनजीटी के सख्त आदेशों की जद में दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के साथ राजस्थान का भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र भी है.

क्लाइमेट चेंज औद्योगिक इकाइयों को भी अपने बिजनेस प्लान में बदलाव के संकेत दे रहा है. खासकर ग्रीन विकल्पों के उपयोग पर इकाइयां फोकस कर रही हैं.  

इंडस्ट्री अपना रही प्रदूषण कम करने की तकनीक
वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, चीन और अमेरिका के बाद भारत ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन करनेवाला विश्व का तीसरा सबसे बड़ा देश है. कोयले से चलने वाले पावर प्लांट्स, औद्योगिक इकाइयां, ईंट भट्टे, चावल की खेती और पशु इसके प्रमुख कारण हैं, इसमें तेज़ी से बढ़ोत्तरी जारी है. बावजूद इसके अगर विश्व के औसत से तुलना‌‌ की जाए तो भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन औसत काफ़ी कम है. दुनिया में सबसे ज़्यादा कारों की बिक्री के मामले में भारत का नंबर पांचवां है. बढ़ती आमदनी और तेज़ी से हो रहे शहरीकरण के चलते इसमें और भी बढ़ोत्तरी का अनुमान लगाया जा रहा है. इससे विश्व भर में तेल की मांग बढ़ने की भी आशंका है, जिसका सीधा असर हमारी आबोहवा पर पड़ेगा.

सब जगह लागू है एनजीटी का आदेश
देश की राजधानी दिल्ली और प्रदेश की जयपुर इस प्रदूषित हवा का दंश झेल रही है. दिल्ली में फैले स्मॉग के चलते भिवाड़ी में 3 नवंबर से 335 इकाइयों में कामकाज बंद है और 10 हजार श्रमिक घर बैठे हैं. मोटे तौर पर 20 हजार करोड़ रुपये का कामकाज प्रभावित हुआ है. इस मामले में रीको के प्रबंधन निदेशक आशुतोष एटी पेडनेकर का कहना है कि हम पर्यावरण हितैषी उपबंधों को प्रमुखता देकर औद्योगिक उत्पादन में इजाफे का प्रयास कर रहे हैं. एनजीटी का फैसला केवल राजस्थान के भिवाड़ी में ही नहीं, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली भी लागू है. विधि विभाग लगातार इस मामले पर नजर रख रहा हैं. उद्योगों को भी पॉल्यूशन कम करने की तकनीकों को प्रमुखता से अपनाना होगा.

ग्रीन विकल्पों पर फोकस
एनजीटी, रीको, उद्योग विभाग और प्रदूषण बोर्ड की सख्ती के बाद औद्योगिक संगठन भी पर्यावरण प्रदूषण में कमी और ग्रीन विकल्पों को अपनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं. 

महिंद्रा वर्ल्ड सिटी के बिजनेस हेड संजय श्रीवास्तव का कहना है कि इसके लिए इंटीग्रेटैड प्लानिंग जरुरी है. हमें आज का ही नहीं, अगले कुछ दशकों के बारे में भी सोचना है. औद्योगिक समूहों ने इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं. खासकर कॉर्बन उत्सर्जन घटाने के विकल्पों पर फोकस  है. इसके लिए उत्पादन प्रक्रिया में ग्रीन कांसेप्ट शामिल कर रहे हैं. इसमें ग्रीन एनर्जी, ग्रीन ट्रांसपोटेशन, पेड़ों की संख्या में इजाफे, कोयले के उपयोग में कमी, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और तकनीक शामिल है.

अब नहीं चेते तो परिणाम गंभीर
हमारी आबोहवा इतनी खराब है कि आने वाला समय डराने लगा है, औद्योगिक इकाइयां जबरन उत्पादन बंद करने की सख्ती का सामना कर रही हैं. अगर समय रहते ग्रीन विकल्पों और प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग पर फोकस नहीं किया गया तो स्थिति और भयावह होगी. एयर क्वालिटी इंडेक्स राजस्थान के कई जिलों में दोहरे शतक से ऊपर हैं. अगर समय रहते नहीं चेता गया तो स्वास्थ्य पर विपरात प्रभाव पड़ना तय है.