अधिकारी के सामने मां ने फैलाया आंचल, रोते हुए बोली- मैडम, मेरी लाडली से मिलवा दो

प्रार्थी प्रेमसिंह ने बताया कि उनकी 15 वर्षीय पुत्री गुड़ी रोजाना की तरह बकरी चराने जंगल की ओर गई थी. काफी समय बीत जाने के बाद भी घर नहीं लौटने पर परिवार के होश उड़ गए. प

अधिकारी के सामने मां ने फैलाया आंचल, रोते हुए बोली- मैडम, मेरी लाडली से मिलवा दो
दोनों पीड़ित परिवारों ने रो-रोकर अधिकारी को अपनी वेदना से अवगत करवाया.

Ajmer: मैडम, हमारी बच्ची को हम से मिलवा दो... सिसकता गला, भीगी आंखें, ममता के आंचल से जुड़ी यादें, असहाय होने का भाव लिए मदद की गुहार लगाते परिजन और उनके रूंधे गले से बार-बार यही आवाज निकल रही थी. मैडम हमारी बच्ची को हम से मिलवा दो.

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दरअसल, पूरा मामला तीर्थ नगरी पुष्कर (Pushkar) के दो अलग - अलग परिवारों से जुड़ा हुआ है, जिनमें उनकी नाबालिग बालिकाओं के अचानक लापता होने के बाद पुलिस द्वारा संतोषजनक कार्यवाही नहीं होने पर राजस्थान बाल अधिकार संरक्षण आयोग (Rajasthan Child Rights Protection Commission) की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल (Sangeeta Beniwal) के पैरों में गिरकर प्रार्थी अभिभावकों ने मदद की गुहार लगाई.

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प्रदेश में बाल अपराधों के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने के साथ साथ बच्चों को बाल अपराधों (Juvenile crimes) के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से सूबे के विभिन्न जिलों में राजस्थान बाल अधिकार संरक्षण आयोग दौरा कर रहा है. इसके चलते गुरुवार दोपहर आयोग की टीम सहित अध्यक्षा संगीता बेनीवाल पुष्कर के राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय पहुंची, जहां उन्होंने जागरूकता कार्यक्रम में हिस्सा लिया. 

बेटी का कई दिनों से नहीं मिला सुराग
कार्यक्रम के बाद दोनों पीड़ित परिवारों ने उन्हें अपनी वेदना से अवगत करवाया. पहला मामला लगभग 4 महीने पुराना है. प्रार्थी दुर्गा लाल ने लिखित शिकायत देकर बताया कि उसकी 16 वर्षीय पुत्री अर्चना किराने का सामान लेने बाजार गई थी. काफी देर बाद भी बच्ची के घर नहीं लौटने के बाद उसने पुष्कर थाने में शक के आधार पर नामजद आरोपी विकास के खिलाफ परिवाद दर्ज करवाया. महीनों बीत जाने के बाद भी पुष्कर पुलिस से संतोषजनक जवाब नहीं मिला और न ही उनकी लाडली का कोई सुराग मिल पाया है. वहीं, दूसरा मामला 10 दिन पूर्व पुष्कर के निकटवर्ती ग्राम कवालाई का है. 

बकरी चराने गई पर वापस नहीं लौटी
प्रार्थी प्रेमसिंह ने बताया कि उनकी 15 वर्षीय पुत्री गुड़ी रोजाना की तरह बकरी चराने जंगल की ओर गई थी. काफी समय बीत जाने के बाद भी घर नहीं लौटने पर परिवार के होश उड़ गए. परिवार के लोगों ने पहले तो अपने स्तर पर बच्ची की तलाश की पर कोई सुराग नहीं मिलने पर अभिभावकों ने पुष्कर थाने में परिवाद दर्ज करवाया. 10 दिन बीत जाने के बाद भी परिवार को संतोषजनक जवाब पुलिस द्वारा नहीं मिला. इस खफा होकर परिजनों ने आयोग की अध्यक्षा संगीता बेनीवाल के पैरों में पड़ कर मदद की गुहार लगाई. इस दौरान पीड़ित परिवार इतने भावुक हो गए थे कि उनकी अपनी संतान को सही सलामत पानी की चाहत उनकी आंखों से आंसू बन कर टपक रही थी. गुमशुदा गुडी की मां ने अपना आंचल फ़ैलाकर कहा कि मैडम हमारी बच्ची को हम से मिलवा दो. प्रार्थियों की वेदना सुनकर राजस्थान बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल ने थाना प्रभारी राजेश मीणा को संबंधित मामले में त्वरित कार्यवाही करते हुए निश्चित समय में पुनः जवाब देने के निर्देश दिये. 

बालिकाओं को किया जागरूक
बेनीवाल ने राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के जागरूकता कार्यक्रम में भाग लिया, जिसमें बालिकाओं को चल चित्र के माध्यम से गुड़ टच-बैड टच सहित युवा पीढ़ी में बढ़ रही नशे की लत के संबंध में बालिकाओं को जागरूक किया. साथ ही बाल अधिकार ओर बाल अपराधों के संबंध में बेनीवाल बालिकाओं से सीधी चर्चा भी की. पत्रकारों से बातचीत के दौरान कस्बे के मुख्य मार्गों में नाबालिग बच्चों द्वारा भिक्षावृत्ति में लिप्त होने की बात पर पूछे गए सवाल पर अध्यक्षा बेनीवाल ने सक्षम अधिकारियों से संबंध में रिपोर्ट तलब करने की बात कही.

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक
प्रदेश में बढ़ते बाल अपराधों की रोकथाम के लिये भले ही जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हों पर न्याय और मदद की गुहार लगा रहे बाल अपराधों के पीड़ित परिजनो को जब यूं अधिकारियो के पैर पकड़ने की नौबत आ जाये तो पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है. 

Reporter- Manveer Singh