सबसे पहले कर्फ्यू लगाने के बाद अब क्यों पड़ी राजस्थान को 'महा कर्फ्यू' की जरुरत

भीलवाड़ा में बढ़ते केस को देखते हुए राज्य सरकार ने देश का पहला 'महा कर्फ्यू' लगा दिया है, जो 13 अप्रैल तक चलेगा.

सबसे पहले कर्फ्यू लगाने के बाद अब क्यों पड़ी राजस्थान को 'महा कर्फ्यू' की जरुरत
अब तक देश में 2576 लोग इस महामारी से संक्रमित हो गए हैं.

अजमेर: कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. राजस्थान में अब तक कोरोना वायरस का आंकड़ा 166 पहुंच गया है. आज कोरोनावायरस के नए 21 पॉजिटिव केस सामने आए हैं. राजस्थान में अब तक तबलीगी जमात से जुड़े 35 कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आ चुके हैं. वहीं, देश में कोरोना वायरस की संख्या में तबलीगी जमात के बाद से कोरोना के केस में अचानक बढ़ोतरी हुई है. अब तक देश में 2576 लोग इस महामारी से संक्रमित हो गए हैं और 72 लोगों की जान चली गई है. 

प्रदेश में कोरोना के बढ़ते प्रभाव के कारण सरकार की चिंताएं बढ़ने लगी हैं. यही वजह है कि सीएम गहलोत ने कोरोना की चुनौती से निपटने में सहयोग करने की अपील की है. साथ ही, सीएम ने तबलीगी जमात के संपर्क में आने वाले नागरिकों से कहा है कि वह खुद को छिपाए नहीं, तुरंत अपना परीक्षण कराएं. वहीं, भीलवाड़ा में बढ़ते केस को देखते हुए राज्य सरकार ने देश का पहला 'महा कर्फ्यू' लगा दिया है, जो 13 अप्रैल तक चलेगा.

क्यों बना भीलवाड़ा कोरोना का हॉटस्पॉट?
राजस्थान के भीलवाड़ा में 20 मार्च को संक्रमण का पहला केस बांगड़ हॉस्पिटल के डॉक्टर में मिला था. अगले दिन उसी अस्पताल के तीन डॉक्टर और स्टाफ में संक्रमण की पुष्टि हुई थी. डॉक्टर को कई दिन से सर्दी-जुकाम था, लेकिन इसके बावजूद भी वह लगातार मरीजों के संपर्क में रहा, और उनका इलाज करता रहा. चिकित्सा विभाग के सूत्रों की मुताबिक भीलवाड़ा के बांगड़ हॉस्पिटल के डॉक्टर की लापरवाही से शहर सहित जिले भर में कोरोना वायरस फैला है. अब तक सामने आए सभी संदिग्ध और पॉजिटिव मरीज इसी हॉस्पिटल से हैं. चिकित्सा विभाग ने इन मरीजों को हाई रिस्क और जनरल केटेगरी में रखा है.

हाई रिस्क में उन्हीं लोगों को शामिल किया है जो संक्रमित डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ़ के सम्पर्क में आए थे. जनरल केटेगरी में परिचितों के सम्पर्क में आए लोगों को रखा गया है. चिकित्सा विभाग ने अब तक 56025 घरों और 2,80, 937 लोगों का सर्वे पूरा कर लिया है. इनमें 84 विदेश से आए लोग भी शामिल हैं. भीलवाड़ा के 6 निजी चिकित्सालय रामस्नेही, केशव पोरवाल, सिद्धि विनायक, अरिहंत और सोनी हॉस्पिटल में 25 बेड के 5 आइसोलेशन वार्ड बनाए गए हैं.

ये भी पढ़ें: भीलवाड़ा में लगाया गया देश का पहला 'महा कर्फ्यू', एंट्री के सभी पास किए गए कैंसिल

जापान के लोगों से लेनी चाहिए राजस्थान को सीख
चीन के बाद कोरोना वायरस का पहला मामला जापान में सामने आया था, लेकिन आज भी जापान में स्थित सामान्य है. वहां के लोग रोज ऑफिस जा रहे हैं. कोई रेस्तरां बंद नहीं है. कोई मॉल बंद नहीं है और ना ही कोई लॉकडाउन लगाया गया है. क्योंकि वहां के लोग हम से कहीं ज्यादा जागरुक हैं. वे बहुत पहले से सोशल डिस्टेंसिग को फॉलो करते आ रहे हैं.

जापान के लोग जब किसी से मिलते हैं तो वे हाथ मिलाने के बजाय झुक कर नमन करते हैं. उनके यहां बच्चों को स्कूल से ही साफ-सफाई की ट्रेनिंग दी जाती है. जबकि, हमारे यहां भी लोगों से मिलते समय हाथ मिलाने के बजाय नमस्ते करने की परंपरा है, लेकिन हम इसे उतना फॉलो नहीं करते जितना की वो अपनी संस्कृति को करते हैं. अगर, अब भी हम सोशल डिस्टेंसिंग को और साफ-सफाई को अच्छे से फॉलो करें, बाहर निकलते वक्त मास्क का इस्तेमाल करें, तो हो सकता है कि आने वाले समय में हम कोरोना को मात दे दें.