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बीकानेर: वर-वधु ने पोधों को साथ लेकर लगाए शादी के फेरे, दिया पर्यावरण सरंक्षण का संदेश

बीकानेर के जिले के छोटे से गांव थावरिया के निवासी हजारीराम तरड़ ने अपने पोते की शादी के लिए बारात नापासर ले कर गए. 

बीकानेर: वर-वधु ने पोधों को साथ लेकर लगाए शादी के फेरे, दिया पर्यावरण सरंक्षण का संदेश
दादा की ख्वाहिश थी कि उनके पोतों की बारात में पटाखों की जगह पेड़ बांटे जाए.

त्रिभुवन रंगा/बीकानेर: 'पर्यावरण की करोगे सुरक्षा, तभी होगी देश की रक्षा', 'पेड़ लगाओ धरती बचाओ' ऐसे स्लोगन हम रोजाना सड़को के किनारे. दीवारों या होल्डिंग पर देखते है. लेकिन असल जीवन में पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर सभी विचारों को उतारने लिए एक जज्बा होना चाहिए. केंद्र व राज्य सरकारें कई तरह की योजनाओं को क्रियान्वित भी किया है लेकिन आशानुरूप सफलता नहीं मिली है. लेकिन बीकानेर के एक परिवार ने समाज के सामने एक ऐसी पहल की है जो अपने आप में एक मिसाल है.

बीकानेर के जिले के छोटे से गांव थावरिया के निवासी हजारीराम तरड़ ने अपने पोते की शादी के लिए बारात नापासर ले कर गए. लेकिन लोग उस वक्त हैरान रह गए जब बारात के आगे पटाखों की जगह पेड़ बांटे गए. दूल्हे रामदेव के दादा हजारीराम का कहना कि उनकी ख्वाहिश थी कि उनके पोतों की बारात में पटाखों की जगह पेड़ बांटे जाए. 

दूल्हे के मुताबिक पटाखों से दो नुकसान हो रहे हैं. वो है पैसे और पर्यावरण का. उनसे निकलने वाला धुंआ आस पास के पर्यावरण को दूषित करता है. जब कि पेड़ हमारी आने वाली पीढ़ी को भी सुरक्षित रखेगा. उनकी ख्वाहिश को पोतों द्वारा पूरा करने पर दादा भी खुशी से फुले नहीं समा रहे. इतना ही नहीं शादी की रस्म पूरी होने के बाद समधी के आंगन में वर वधू से पेड़ लगवाते हुवे समधी से निवेदन किया कि इसे अपनी बेटी की तरह पाले. 

वहीं इस अनोखी शादी में पूर्व मंत्री वीरेंद्र बेनीवाल भी मौजूद रहे. पर्यावरण की सुरक्षा की पहल को लेकर नवदंपति ने नवचार किए. वर-वधू ने पेड़ को हाथ मे लेकर पवित्र अग्नि के फेरे लिए आम जन को संदेश दिया. जहां आम शादी में पति-पत्नी जीवन भर साथ निभाने के सात वचन लेते है. लेकिन इन दोनों एक नई परिपाटी को ईजाद कर आठवा वचन पेड़ लगाने व पर्यावरण बचाने का लिया.

समाज मे ऐसी पहल आने वाले दिनों दुसरों के लिए एक मिसाल कायम तो करेगी वहीं लोगों पर्यावरण बचाने के लिए प्रेरित भी करेगी. कहने का मतलब ये की अब वो दिन दूर नहीं जब दहेज की जगह पेड़ दिए जाएंगे.