Bharat Bandh: Jaipur में BJP-Congress कार्यकर्ताओं में हाथापाई, पुलिस ने किया लाठीचार्ज

 राजधानी जयपुर में भारत बंद के दौरान भिड़े बीजेपी-कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भिड़ंत हो गई. 

Bharat Bandh: Jaipur में BJP-Congress कार्यकर्ताओं में हाथापाई, पुलिस ने किया लाठीचार्ज
जमकर हंगामा हुआ और यह हंगामा हाथापाई में बदल गया.

जयपुर: किसान आंदोलन के भारत बंद (Bharat Bandh) के दौरान जयपुर (Jaipur News) में प्रदेश बीजेपी कार्यालय के बाहर एनयूएसआई और भाजयुमो कार्यकर्ता (BJP-Congress Workers Clash) आपस में भिड़ गए. किसान आंदोलन और भारत बंद का समर्थन कर रहे एनएययूआई के कार्यकर्ता (NSUI Workers) प्रदर्शन करते हुये प्रदेश बीजेपी मुख्यालय पहुंच गये, जहां पर एनएसयूआई और भाजयुमो कार्यकर्ताओं (Bjp Youth Wing) में झगड़े की नौबत आ गई. झगड़ा एनएसयूआई कार्यकर्ताओं द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी करने और बीजेपी आफिस के सामने मोदी का पुतला जलाने की बात को लेकर हुआ. पुतला जलाने और बीजेपी ऑफिस (BJP HQ) पर भाजयुमो के कार्यकर्ताओं ने ऐतराज जताया तो इस दौरान पुलिस की मौजूदगी के बावजूद दोनों पक्षों में लात—घूंसे चल गये. मौके पर मौजूद पुलिस ने हालांकि स्थिति को नियंत्रण में किया और मामले को शांत करवाया, लेकिन तब तक पथराव भी हो चुका था.

इस पूरे घटनाक्रम पर जयपुर शहर अध्यक्ष राघव शर्मा ने कहा कि क्या यह शालीनता है राजनीति की? राघव शाम ने कहा कि यदि बंद कराना है तो जनता के सहयोग से कराएं, बंद के दौरान प्रदेश कार्यालय पर आकर क्या परंपरा डालना चाहते हैं?

घर प्रदर्शन में शामिल एनएसयूआई कार्यकर्ताओं का कहना था कि वह केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में और किसानों के समर्थन के लिए गांधीवादी तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन भाजयुमो और एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने उनसे झगड़ा किया एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने कहा कि जब तक केंद्रीय कृषि कानून वापस नहीं होंगे तब तक युवा केंद्र सरकार के खिलाफ और मुखर होगा.

प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को मामला शांत करने के लिए एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को दूर तक खदेड़ा तो कुछ कार्यकर्ताओं ने पुलिस को कांग्रेस का राज होने की बात कहते हुए देख लेने की चेतावनी भी दी इस पर पुलिस ने कहा कि प्रदेश में कानून का राज है. पुलिस ने आईनॉक्स चौराहे तक एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को खदेड़ा और पूरे मामले को शांत कराया.

पुलिस ने हालांकि दोनों पक्षों को अलग करके मामला शांत कराया, लेकिन बीजेपी के कार्यकर्ताओं में पुलिस की कार्यशैली को लेकर भी नाराजगी थी. बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह एनएसयूआई का प्रदर्शन नहीं, बल्कि पुलिस के संरक्षण में बीजेपी के कार्यालय पर सुनियोजित हमला था.

इधर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया भी सरकार और प्रशासन के रवैए को लेकर सवाल उठाते हुए दिखाई दिए. पूनिया ने पूछा कि आखिर इस तरह के प्रदर्शन को बढ़ावा देकर सरकार साबित क्या करनी चाहती है? उन्होंने इसे अराजकता का माहौल करार दिया और ट्वीट के जरिये मामला सरकार के संज्ञान में भी काने की कोशिश की.

बीजेपी के कार्यालय पर एनएसयूआई का यह प्रदर्शन भले ही कई जगह चर्चा का केंद्र बन गया हो, लेकिन इसके साथ ही प्रदेश में विपक्षी राजनीतिक दलों के दफ्तर पर प्रदर्शन करने और टकराव की एक नई तरह की राजनीति की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि वसुंधरा राजे के दूसरे कार्यकाल में इस तरह का प्रदर्शन करने की कोशिश भाजयुमो भी कर चुकी है. तब भाजयुमो ने कांग्रेस कार्यालय पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया था, लेकिन तब मुस्तैदी दिखाते हुए पुलिस ने भाजयुमो के कार्यकर्ताओं को कांग्रेस ऑफिस से आधा किलोमीटर पहले ही रोक लिया था. ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि क्या इस बार पुलिस का आकलन पूरी तरह फेल साबित हुआ या एनएसयूआई को पुलिसिया संरक्षण होने के बीजेपी के आरोपों में कोई दम है?

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