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राजस्थान: गर्मी के बाद अब बिजली बिल करेगा जनता को परेशान, डिस्कॉम ने बढ़ाया सरचार्ज

जून और जुलाई में बिजली की रिकॉर्ड खपत होती है, उपभोक्ताओं का मीटर तेजी से दौड़ता है. इन महीनों में डेढ़ गुना अधिक बिजली की खपत गर्मी के चलते होती है.

राजस्थान: गर्मी के बाद अब बिजली बिल करेगा जनता को परेशान, डिस्कॉम ने बढ़ाया सरचार्ज
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर: राजस्थान के उपभोक्ताओं को अब बिजली महंगी मिलेगी. डिस्कॉम्स ने उपयोग में ली गई बिजली पर फ्यूल सरचार्ज के नाम पर 8 से 15 फ़ीसदी अधिक राशि वसूलने की तैयारी कर ली है. आरईआरसी ने फ्यूल सरचार्ज राशि 55 पैसे प्रति यूनिट करने को मंजूरी दे दी है. अक्टूबर 2018 से डिस्कॉम्स अपने बिजली बिल में अधिकतम 37 पैसे प्रति यूनिट फ्यूल सरचार्ज की वसूली कर रहे थे. जिसके बाद अब सरचार्ज 55 पैसे बढ़ने से उपभोक्ताओं का औसत बिल तीन सौ रुपए बढ़ने की आशंका है.

55 पैसे प्रति यूनिट का भार
जून और जुलाई में बिजली की रिकॉर्ड खपत होती है, उपभोक्ताओं का मीटर तेजी से दौड़ता है. इन महीनों में डेढ़ गुना अधिक बिजली की खपत गर्मी के चलते होती है. इसी बीच महंगाई की मार देने वाली खबर यह है कि विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों के फ्यूल सरचार्ज राशि प्रति यूनिट 37 पैसे से बढ़ाकर 55 पैसे करने की मांग को स्वीकार कर लिया है. अब जून और जुलाई के बिलों में बिजली का बिल बढ़ी हुई राशि जोड़कर आएगा. 

400 करोड़ रुपये वसूलने की तैयारी
बिजली कंपनियां करीब 400 करोड़ रुपए इस चार्ज के जरिए वसूलने की तैयारी में है. बढ़े हुए बिजली बिल की मार ईमानदार उपभोक्ताओं पर पड़ेगी. डिस्कॉम के अधिकारियों के अनुसार नियामक आयोग के निर्देश पर फ्यूल सरचार्ज पहले बिजली खरीद की 10 फीसदी तक वसूल सकते थे लेकिन अब इसे बढ़ाकर 15% कर दिया गया है. 55 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से वसूली की जाएगी. यह राशि दो किस्तों में वसूली जाएगी. डिस्कॉम्स अक्टूबर 2018 से फ्यूल सरचार्ज की राशि अधिकतम वसूल रहा है. इससे पहले के 5 वर्षों में कभी भी इतनी बढ़ी हुई राशि नहीं वसूली गई. 

इस आधार पर बढ़ाई राशि
आरईआरसी प्रत्येक वर्ष बिजली खरीद समेत अन्य खर्चों को जोड़कर टैरिफ तय करता है. इसमें स्थाई लागत के साथ वेरिएबल कॉस्ट के रूप में बिजली टैरिफ निर्धारित की जाती है. वेरिएबल कॉस्ट कोयला, डीजल और परिवहन खर्च के आधार पर तय होती है. जिसकी वसूली उपभोक्ताओं से करने को प्राथमिकता दी जाती है. वर्ष 2009 से शुरू हुए फ्यूल सरचार्ज को प्रत्येक 3 महीनों में बदला जाता है. बिजली वितरण कंपनियां महंगी दरों पर खरीदी गई बिजली का अंतर भी सर चार्ज के रूप में वसूल रही है. 

विधानसभा में उठेगा मामला
पिछले दो महीनों में बिजली कंपनियों ने बिजली बेचने से अधिक खरीदी है. जिसका भार उपभोक्ताओं पर पड़ने जा रहा है. प्रदेश में कांग्रेस के सत्ता में आते ही कहा गया था कि पानी और बिजली की दरों में बढ़ोतरी नहीं होगी लेकिन नियामक आयोग के सहारे की गई बढ़ोतरी विधानसभा में विपक्ष को हंगामा खड़ा करने का मौका दे सकती हैं.