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डूंगरपुर के इस गांव में विदेशी समझ रहे जैविक खेती के गुर, हो रहे भारतीय संस्कृति से रूबरू

ये सभी शोधार्थी गांव के एक वयक्ति के यहां पर रहकर जैविक खेती के गुर के सिखने के साथ, यहां का रहन-सहन, ऐतिहासिक स्थलों का दौरा करते हुए भारतीय संस्कृति और भारतीय जीवन शैली को समझ रहे हैं. 

डूंगरपुर के इस गांव में विदेशी समझ रहे जैविक खेती के गुर, हो रहे भारतीय संस्कृति से रूबरू
जिले में रूरल टूरिज्म की काफी संभावनाए हैं.

डूंगरपुर/अखिलेश शर्मा: जिले के चुण्डियावाड़ा गांव में पिछले 15 दिनों से विदेशी शोधार्थी जैविक खेती के गुर सिखने के साथ ग्रामीणों के बीच रहते हुए भारतीय जीवनशैली और संस्कृति से रूबरू हो रहे हैं.

दरअसल, डूंगरपुर जिले की लीलवासा पंचायत में चुण्डियावाड़ा गांव में स्पेन के 7 शोधार्थी और अमेरिका के 1 शोधार्थी पिछले 15 दिन से आये हुए हैं. ये सभी शोधार्थी गांव के ईश्वरसिंह राठोड़के निवास पर रहकर जैविक खेती के गुर के सिखने के साथ, यहां का रहन-सहन, ऐतिहासिक स्थलों का दौरा करते हुए भारतीय संस्कृति और भारतीय जीवन शैली को समझ रहे हैं. शोधार्थी ग्रामीणों के साथ संवाद करने के साथ स्कूली बच्चो के साथ भी अपना समय बीता रहे है.

विदेशियों ने भारतीय और विदेशी जीवन शैली में फर्क
शोधार्थियों ने मीडिया से बातचीत में बताया कि भारत और स्पेन के जीवन शैली में काफी फर्क है. यहां आज भी लोग स्वयं से जीवन जीते है. यहां के लोग आज भी अपने कामों के लिये खुद पर निर्भर हैं. वहीं, स्पेन की जीवन शैली आधुनिक है. भारत के लोगों का पहनावा बहुत ही अच्छा है. यहां के लोग परिवार के रूप में संयुक्त रहते है. परिवार के लोगों का साथ में भोजन करना अच्छा लगता है.

2006 से आ रहे हैं विदेशी मेहमान
गांव के ईश्वरसिंह राठौड़ ने बताया की साल 2006 से उनके गांव में विदेशी शोधार्थी व विदेशी मेहमान आ रहे है और उनके साथ रहते हुए वे विदेशी मेहमानों को भारतीय संस्कृति व जीवन शैली से अवगत करवाते है.

रूरल टूरिज्म की अपार संभावनाएं
राठौड़ का कहना है कि जिले में रूरल टूरिज्म की काफी संभावनाए है. जिसको बढ़ावा देने के लिए वे ये काम कर रहे हैं. वे इंटरनेट के जरिये इन विदेशी शोधार्थी व मेहमानों से सम्पर्क करते है और उन्हें यहां बुलाते रहते हैं.

स्थानीय लोगों को सरकार से है उम्मीद
स्थानीय लोगों को जिला प्रशासन व प्रदेश सरकार से उम्मीद है कि रूरल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं बनाई जाए. जिससे की डूंगरपुर पर्यटन के मानचित्र पर अपनी अलग एक पहचान बना सके.