पुलिस से वसूली में सरकार भी 'फेल', उदयपुर के 4 पुलिसकर्मियों से करनी थी वसूली

पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों से बकाया वसूली में महकमे के साथ ही सरकार भी फेल हो गई है.

पुलिस से वसूली में सरकार भी 'फेल', उदयपुर के 4 पुलिसकर्मियों से करनी थी वसूली
फाइल फोटो

विष्णु शर्मा, जयपुर: पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों से बकाया वसूली में महकमे के साथ ही सरकार भी फेल हो गई है. मामला ट्रांसफर के बाद भी सरकारी आवास नहीं छोड़ने वाले पुलिसकर्मियों से किराया वसूली से जुड़ा है. करीब 15 साल बाद भी तत्कालीन पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों से वसूली नहीं की जा सकी. अब पुलिस मुख्यालय ने इस किराया राशि को अवसूलनीय बताकर मामले को खत्म करने की अनुशंषा कर दी है. फिलहाल मामला गृह विभाग से  वित्त विभाग भेजा जा रहा है, जहां से मंजूरी के बाद उसे खत्म किया जाएगा.

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- किराया वसूली का यह  मामला उदयपुर जिला पुलिस का है
- वर्ष 2005-06 में आठ अधिकारियों-कर्मचारियों ने ट्रांसफर के बाद भी सरकारी आवास खाली नहीं किया
- आठाें कर्मचारी-अधिकारियों से पेनल रेट से आवास किराए के  2 लाख  47 हजार 258 रुपए वसूल किए जाने थे
- इनमें चार जनों से 90 हजार 132 रुपए वसूल लिए, लेकिन शेष चार से 1 लाख 57 हजार 124 की वसूली नहीं हो पाई
- मामला महालेखाकार निरीक्षण प्रतिवेदन में आया तो खलबली मची
-  इस बीच चारों रिटायर भी हो गए, लेकिन वसूली नहीं हो पाई
- तत्कालीन डीएसपी नवनीत महर्षि पर 56123 रुपए, आरमोरर किशन सिंह पर 37080 रुपए, एसआई जगदीश नारायण पर 20520 रुपए तथा  सीआई अशफाक मोहम्मद पर 43401 रुपए किराया बकाया है
- वसूली के लिए निदेशक पेंशन और कोषाधिकारी को कई पत्र लिखे गए, लेकिन राशि वसूल नहीं हो पाई
- लाख कोशिशों के बावजूद वसूली नहीं हो पाई तो PHQ ने कुछ दिन पहले  मामला गृह विभाग भेजा

गृह विभाग से जारी होंगे अंतिम आदेश 
पुलिस अधिकारियों से बकाया राशि वसूल नहीं होने के बाद पुलिस मुख्यालय ने मामले के अपलेखन के लिए गृह विभाग को लिखा है. अब गृह विभाग निर्णय लेगा कि मामले को समाप्त किया जाए या नहीं. गृह विभाग के निर्णय के बाद 15 साल पुराने इस मामले के पटाक्षेप होने की संभावना है.

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