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राजस्थान: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की लापरवाही से परेशान दिव्यांग

दिव्यांग, विभाग के चक्कर लगाते लगते परेशान हो रहे है. उनका कहना है कि गाड़ी के नंबर व दस्तावेज नही होने से ट्रैफिक कर्मी उनके चालान भी बना रहे है. 

राजस्थान: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की लापरवाही से परेशान दिव्यांग
लापरवाही का नतीजा लाभार्थियों को भुगतना पड़ता है.

मुकेश सोनी/कोटा: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की लापरवाही इन दिनों दिव्यांगो पर भारी पड़ रही है. विभाग द्वारा 20 मेसे 13 दिव्यांगों को मोटो राइज ट्राइ साइकिल योजना में स्कुटी तो बांट दी गई लेकिन स्कुटी की आरसी व इन्श्योरेंस देना भूल गए. दिव्यांग बिना नम्बर, आरसी व इन्श्योरेंस के ही स्कुटी सड़क पर दौड़ा रहे है. 

स्कूलों व कॉलेजों में नियमित जाने में किसी तरह की परेशानी नहीं उठानी पड़े इसी उद्देश्य के लिए दिव्यांगों को मोटराइज्ड ट्राई साइकिल योजना के तहत जिला स्तर पर स्कूटी बांटी गई थी. इसके लिए सत्र 17-18 में मोटराइज्ड ट्राई साइकिल योजना में आवेदन मांगे गए थे. इसके तहत 40 से ज्यादा आवेदन आए थे. जिसमें 20 का चयन किया गया. विभाग ने 20 में से 13 दिव्यांग जनो को इसी मार्च में सूचना केंद्र पर जिला स्तरीय कार्यक्रम में स्कूटी दी. लेकिन विभाग की सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि इन13 दिव्यांगों को गाड़ी के दस्तावेज नहीं सौपे गए. इसके चलते उनके नम्बर तक नहीं आए है. ये बिना नम्बर के ही गाड़िया दौड़ रही है. 

दिव्यांग, विभाग के चक्कर लगाते लगते परेशान हो रहे है. उनका कहना है कि गाड़ी के नंबर व दस्तावेज नही होने से ट्रैफिक कर्मी उनके चालान भी बना रहे है. जिम्मेदार अधिकारी आचार संहिता को कारण बता रहे है और अब दस्तावेज जल्द सौपने व शेष लाभार्थियों को भी स्कूटी देने की बात कह रहे है. 

जिन सात चयनित दिव्यांगों को स्कूटी नही मिली वो विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे है. उनका कहना है कि उनके दस्तावेज में किसी मे फ़ोटो नही है तो किसी मे अद्यापन प्रमाण पत्र का हवाला देते हुए कमी बताई गई. जब दिव्यांगों का चयन कर लिया था तो दस्तावेज भी जांचे जाने थे, लेकिन समय पर उनकी जांच नही की गई. जानबूझकर उन्हें अटका दिए. अब बार चक्कर कटवाए जा रहे है. 

हालांकि सरकारी योजनाओं में ढील पोल व लापरवाही बरतने का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आते रहे है. लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ समय पर कार्यवाई नहीं होने से ऐसे अधिकारियों के हौसले बुलंद होते है, जिनकी लापरवाही का नतीजा लाभार्थियों को भुगतना पड़ता है. उम्मीद है कि लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी ताकि सरकारी योजनाओं की समय पर क्रियान्विति हो सकेगी ओर लाभार्थियों को समय पर लाभ मिलेगा.