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राजस्थान: विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पर अब भी असमंजस है जारी, नहीं हो सका फैसला

राजधानी दिल्ली में दो दिन पहले पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक में राजस्थान के लिए नेता प्रतिपक्ष के मसले पर चर्चा तो हुई, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका.

राजस्थान: विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पर अब भी असमंजस है जारी, नहीं हो सका फैसला
राजस्थान में प्रतिपक्ष का नेता तय करने के लिए केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली और बीजेपी के प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है. (फोटो साभार: rajassembly.nic.in)

शशि मोहन, जयपुर: राज्य में विधानसभा चुनाव हारने के बाद भारतीय जनता पार्टी अब सदन में मुख्य विपक्षी दल बन चुकी है. कांग्रेस को सीएम के अलावा मंत्रिमंडल के गठन में देरी के आरोप में घेरने वाली बीजेपी अब तक नेता प्रतिपक्ष के नाम पर अब तक कोई फैसला नहीं ले पाई है. 

बताया जा रहा है कि, राजधानी दिल्ली में दो दिन पहले पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक में राजस्थान के लिए नेता प्रतिपक्ष के मसले पर चर्चा तो हुई, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका. फिलहाल राज्य में नेता प्रतिपक्ष पर चल रही चर्चा में वसुंधरा राजे का नाम सबसे आगे है. लेकिन राजे के अलावा किसी और के भी नेता प्रतिपक्ष बनने के कयास भी लगाए जा रहे हैं. 

वैसे विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कांग्रेस में मुख्यमंत्री का नाम तय करने को लेकर तीन दिन का इंतजार करना पड़ा और इसे लेकर बीजेपी ने सत्ताधारी दल पर खूब निशाना भी साधा था. लेकिन विधायक दल के नेता के मसले पर कांग्रेस को घेरने वाली बीजेपी खुद अभी तक विपक्ष का नेता तय नहीं कर पाई है. 

इस संबंध में पार्टी सूत्रों का कहना है कि बीजेपी में नेता प्रतिपक्ष को लेकर अभी तक कोई विवाद सामने नहीं है. लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायकों को विधायक दल के नेता का इंतजार तो है ही. 

इस संबंध में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदनलाल सैनी का कहना है कि प्रतिपक्ष का नेता तय करने के लिए केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली और बीजेपी के प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है. जल्द दोनों नेता जयपुर आएंगे और विधायक दल की बैठक के बाद नेता प्रतिपक्ष के नाम का ऐलान भी करेंगे.

नेता प्रतिपक्ष के लिए वसुंधरा है स्वाभाविक दावेदार, अन्य नामों पर भी चल रही है चर्चा

साल 2003 और 2013 में दो बार बीजेपी की सरकारों में वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री रह चुकी हैं. इसके साथ ही वर्ष 2008 से 2013 के दौरान बीजेपी के विपक्ष में रहते हुए वसुंधरा राजे ही नेता प्रतिपक्ष भी रहीं. ऐसे में अभी तक वसुंधरा राजे को ही नेता प्रतिपक्ष का स्वाभाविक दावेदार माना जा रहा था. लेकिन इस पद पर फैसले को लेकर हो रही देरी के चलते इस बात के कयास लगाए जाने लगे हैं कि बीजेपी इस बार किसी नए चेहरे को भी मौका दे सकती है. 

राजस्थान बीजेपी में जारी है आपसी खिंचतान

जबकि दूसरी तरफ राजनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि बीते साल अप्रैल में अशोक परनामी के इस्तीफे के बाद नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर केंद्र और राज्य के नेतृत्व में काफी खींचतान हुई. इस खींचतान के बाद अब केंद्र भी ज्यादा सतर्क दिख रहा है और संभव है इसी कारण नेता प्रतिपक्ष के चुनाव में देरी हो रही हो. बीजेपी नेताओं में इस बात को लेकर भी असमंजस दिख रहा है कि प्रतिपक्ष के नेता का चुनाव विधायक दल करेगा या फिर केंद्रीय नेतृत्व इस पद पर कोई नाम तय करेगा. बहरहाल 15 जनवरी से नई विधानसभा का पहला सत्र शुरू होने जा रहा है और इससे पहले बीजेपी को अपना अपने नेता का चुनाव करना होगा.