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आतंक पीड़ितों की मदद के लिए काबुल गई थी देश की बेटी, आत्मघाती हमले की हुई शिकार

काबुल में 14 जनवरी को एक आतंकवादी हमले के दौरान इमारत के मलबे में दबने की वजह से उनकी मौत हो गई थी. 

आतंक पीड़ितों की मदद के लिए काबुल गई थी देश की बेटी, आत्मघाती हमले की हुई शिकार
जोधपुर की रहने वाली शिप्रा शर्मा अफगानिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर सिविल सोसायटी की डायरेक्टर थी.

जोधपुर/अनुराग हर्ष: अफगानिस्तान के काबुल में हुए आतंकी हमले का शिकार हुई भारत की बेटी शिप्रा शर्मा का दाह संस्कार शुक्रवार को जोधपुर में हुआ. शुक्रवार को ही शिप्रा का पार्थिव शरीर दिल्ली से जोधपुर लाया गया था. जहां स्थानीय सिवांची गेट शमशान में उनका अंतिम संस्कार किया गया. इस घटना की जानकारी के बाद राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने ट्वीट कर उनके परिवार के प्रति संवेदना जताई है.

बताया जाता है कि काबुल में 14 जनवरी को एक आतंकवादी हमले के दौरान आरडीएक्स से भरे ट्रक की टक्कर के बाद उनका कार्यालय का इमारत मलबे की ढ़ेर में बदल गया था. जिसमें दबने की वजह से उनकी मौत हो गई थी. 

आपको  बता दें कि, अफगानिस्तान में आतंक पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के काम में जुटी शिप्रा हादसे के एक दिन पहले ही जोधपुर से अफगानिस्तान गई थी. शिप्रा अफगानिस्तान में आतंक से पीड़ितों के विकास के लिए बनी संस्था अफगानिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर सिविल सोसायटी के डायरेक्टर के रूप में 3 महीनों से काबुल में कार्यरत थी. 

शिप्रा के परिवार के लोगों का कहना है कि अफगानिस्तान जाने से पहले उन्होंने अफगानिस्तान में चल रही आतंकी गतिविधियों और बम-धमाकों के कारण उन्हे वहां जाने से मना किया था. लेकिन शिप्रा ने युसूफ मलाला का उदाहरण देते हुए घरवालों को कहा था कि जब एक छोटी सी बच्ची आतंकवादियों से लड़ सकती है, तो वह क्यो नहीं. साथ ही उन्होंने कहा था कि मौत तो एक न एक दिन आनी है, फिर धमाकों से क्यों डरे.

विदेश मंत्रालय की पहल से शव पहुंचा भारत

14 जनवरी को उसकी मौत की जानकारी मिलने के बाद उसके परिवार के लोगों ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से बात की थी. जिसके बाद शेखावत ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को इस मामले से अवगत कराया और शिप्रा के पार्थिव देह को जल्द से जल्द जोधपुर लाने के लिए पहल करने का आग्रह किया था. विदेश मंत्रालय की पहल से शुक्रवार को शिप्रा का शव जोधपुर पहुंचा.