सांभर झील में प्रवासी पक्षियों की मौत से लिया सबक, अभी से तैयारियों में जुटा प्रशासन

बता दें कि हर साल सर्दियों में हजारों प्रवासी पक्षी इस विश्व प्रसिद्ध झील में अपना प्राकृतिक ठिकाना बनाते हैं.

सांभर झील में प्रवासी पक्षियों की मौत से लिया सबक, अभी से तैयारियों में जुटा प्रशासन
नेहरा ने कहा कि प्रवासी पक्षी हमारे मेहमान हैं.

जयपुर: पिछले साल सांभर लेक में बोटुलिज्म बीमारी से 15 हजार विदेशी प्रवासी पक्षियों की मौत के बाद जिला प्रशासन अलर्ट हो गया है. 

विदेशी पक्षियों की मॉनिटरिंग के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ झील में काम करने वाले कर्मचारियों को पाबंद किया है कि वे कोई भी म़ृत पक्षी देखें तो तुरंत सूचना जिला प्रशासन को दें. हर साल सर्दियों में हजारों प्रवासी पक्षी इस विश्व प्रसिद्ध झील में अपना प्राकृतिक ठिकाना बनाते हैं.

एक साल पहले सांभर झील में मेहमान बनकर हजारों किलोमीटर दूर का सफर तय करके आए प्रवासी पक्षियों की मौत के बाद इस बार जयपुर जिला प्रशासन पहले से ही तैयारियों में जुट गया हैं. जिला कलक्टर अंतर सिंह नेहरा ने सांभर झील में प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए सम्बन्धित सभी विभागों को समय रहते कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने पूर्व में दिए गए निर्देशों की पालना और सम्बन्धित विभागों की ओर से पक्षियों की सुरक्षा के लिए अब तक किए प्रयासों की समीक्षा भी की. 

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पक्षियों की सुरक्षा की माइक्रो प्लानिंग करें
नेहरा ने कहा कि प्रवासी पक्षी हमारे मेहमान हैं और उनकी सुरक्षा के लिए सभी सम्बन्धित विभाग माइक्रो प्लानिंग करें. झील क्षेत्र में काम कर रहे सांभर सॉल्ट के कार्मिक आते-जाते झील क्षेत्र में हुई हर पक्षी की मृत्यु पर नजर रखें. तहसीलदार, पटवारी, बीडीओ और एसडीएम भी विशेषकर उन क्षेत्रों का सामयिक दौरा करें, जहां मानसून के बाद पिछली बार बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों की एवियन बोट्यूलिज्म के कारण मौत हुई थी. जिला कलक्टर ने निर्देश दिए कि अगर झील क्षेत्र में कहीं किसी पक्षी का कारकस (मृत शरीर)  मिले तो उसका प्रोटोकॉल के अनुसार गड्ढा खोदकर त्वरित और उचित निस्तारण किया जाए. साथ ही नेहरा ने कहा कि जल्द से जल्द झील में वॉच टावर की स्थापना के लिए स्थान चिन्हित कर सांभर सॉल्ट को बताएं.

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पक्षियों को इस बार भी है खतरा
कलक्टर अंतर सिंह नेहरा ने कहा कि पिछले साल बड़ी संख्या में महामारी से पक्षियों के मौत के बाद इस बार भी इसकी आशंका है. इसे देखते हुए प्रभावित पक्षियों की देखभाल के लिए नर्सरी स्थापित करने के लिए जमीन के चिन्हीकरण और अस्थायी नर्सरी की व्यवस्था रखने के निर्देश दिए. सीवरेज प्लांट की स्थापना, मानसून पूर्व और बाद में जल गुणवत्ता के सैम्पल लेने, सोडियम सुपरथेट कचरे के निस्तारण सहित कई विषयों पर सम्बन्धित विभागों को निर्देशित किया. संबंधित विभाग के अधिकारियों ने जिला कलक्टर को बताया कि जयपुर जिले में झील क्षेत्र के दो किलोमीटर क्षेत्र में कोई अवैध खनन नहीं किया जा रहा है. इसके आसपास कोई औद्योगिक इकाई भी नहीं है और अवैध बिजली कनेक्शन भी नहीं हैं. सांभर झील में प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के सम्बन्ध में हाईकोर्ट और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर दिए गए निर्देशों की पालना सुनिश्चित की जाए.

विश्व विख्यात साइट है सांभर झील
सांभर झील एक विश्व विख्यात साइट है. यहां देशी-विदेशी कई तरह के पक्षी रहते हैं और प्रवास पर भी आते हैं. सर्दियों की शुरुआत होते ही हजारों मील दूर से उड़ान भरकर विदेशी पक्षी मेहमान बनकर विश्वविख्यात सांभर झील की ओर आते हैं, लेकिन पिछली बार लंबा सफर तय कर यहां आए इन बेजुबान पक्षियों को क्या पता था कि भोजन-पानी की तलाश में इस ओर रुख करने के बाद वापसी नामुमकिन होगी.