Rajasthan Electricity Regulatory Commission की जनसुनवाई, Online मांगे गए सुझाव

ऑनलाइन जनसुनवाई में प्रदेश के दो दर्जन औद्योगिक और कारोबारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर अपना विरोध दर्ज करवाया.

Rajasthan Electricity Regulatory Commission की जनसुनवाई, Online मांगे गए सुझाव
ऑनलाइन जनसुनवाई में प्रदेश के दो दर्जन औद्योगिक और कारोबारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर अपना विरोध दर्ज करवाया.
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Jaipur: राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (Rajasthan Electricity Regulatory Commission) की ओर से ग्रिड इंटरेक्टिव डिस्ट्रीब्यूटेड रिन्यूएल एनर्जी जनरेशन सिस्टम 2021 के जारी ड्राफ्ट पर जनसुनवाई चल रही है. 

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ऑनलाइन जनसुनवाई में प्रदेश के दो दर्जन औद्योगिक और कारोबारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर अपना विरोध दर्ज करवाया. संगठनों ने अपनी आपत्ति में कहा है कि आरईआरसी 2020 के अंतर्गत नेट मीटरिंग की सुविधा सिर्फ एलटी घरेलू, एलटी कृषि तथा पब्लिक स्ट्रीट लाइटिंग तक सीमित करने और वाणिज्यिक एवं औद्योगिक इकाइयों को यह सुविधा नहीं देने से इससे जुड़े लाखों लोगों पर इसका बुरा असर पड़ेगा.

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राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग की जनसुनवाई

  • रिन्यूएल एनर्जी से जुडे़ हालिया ड्राफ्ट पर ऑनलाइन मांगे सुझाव
  • ग्रिड इंटरेक्टिव डिस्ट्रीब्यूटेड रिन्यूएल एनर्जी जनरेशन सिस्टम 2021 का ड्राफ्ट
  • राजस्थान के दो दर्जन संगठनों ने दर्ज करवाई अपनी आपत्ति
  • फोर्टी, यूकोरी, रियर, बीकानेर, कोटा, भिवाड़ी सहित
  • कई जिलों के औद्योगिक संगठनों ने जताया गहरा विरोध
  • 10 किलोवॉट तक लोड के लिए नेट मीटरिंग
  • 10 किलोवॉट से ऊपर लोड के लिए ग्रोस मीटरिंग के प्रावधान का विरोध
  • राजस्थान में रिन्यूएल एनर्जी इंडस्ट्री के खत्म होने का जताया अंदेशा

रिन्यूएल एनर्जी 2021 ड्राफ्ट पर जनसुनवाई जारी 
ग्रिड इंटरेक्टिव डिस्ट्रीब्यूटेड रिन्यूएल एनर्जी जनरेशन सिस्टम 2021 के ड्राफ्ट पर जनसुनवाई जारी है. इस बार कोविड के चलते राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग ने जनसुनवाई ऑनलाइन रखी है, लेकिन संगठनों का कहना है कि विरोध से बचने के लिए आयोग डिजिटल मोड पर है. कारोबारी उन प्रावधानों का विरोध दर्ज करवा रहे है जो उनके कारोबार पर ब्रेक लगा रहे हैं. उद्यमी सुनील बंसल का कहना है कि वर्तमान में कुल बिजली उपयोग का एक प्रतिशत सौर ऊर्जा पर निर्धारित है, ऐसे में इस इंडस्ट्री को बचाने से पहले ही खत्म करने की कार्रवाही नए ड्राफ्ट में है.

केन्द्र की ओर से जारी किए गए विद्युत नियम 2020 के तहत सौर ऊर्जा के 10 किलोवॉट तक लोड के लिए नेट मीटरिंग और 10 किलोवॉट से ऊपर  लोड के लिए ग्रोस मीटरिंग के प्रावधान किए है. राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग द्वारा जारी किए गए प्रारूप का नार्थ इंडिया मॉडल मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन और रियर रिन्यूएबल एनर्जी एसोसिएशन सहित प्रदेश के कई व्यापारिक एवं औद्योगिक संगठनों ने विरोध प्रकट किया. अब जनसुनवाई मे भी प्रमुखता से विरोध दर्ज करवाया गया है.

क्या कहना है औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों का 
औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि मिनिस्ट्री ऑफ पॉवर भारत सरकार और राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग दोनों ने ही नियमों में बदलाव का कारण डिस्कॉम को होने वाला घाटा बताया, जबकि डिस्कॉम तो अपने वजूद में आने से पहले से ही घाटे में है. जहां एक तरफ सरकार उपभोक्ता को प्रोडयूसर की तरह मान्यता दे रही है जो कि न सिर्फ बिजली का उपभोग करेगा बल्कि उसका उत्पादन भी करेगा, वहीं दूसरी तरफ उसके अधिकारों का हनन करके डिस्कॉम का एकाधिकार चलाना चाहती है. जनसुनवाई के बाद आरईआरसी को अपना फैसला सुनाना है, हालांकि आपत्तियां इतनी हैं कि सरकार के फैसले को आगे बढ़ाने में आयोग को विरोध झेलना पड़ सकता है.