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जयपुर: GST से जुड़ी समस्याएं साफ्टवेयर से होंगी हल, कारोबारियों को मिलेगा सीधा लाभ

छोटे, मध्यम उद्योग और  व्यापार चलाने वाले ऐसे व्यवसायी, जिनका सालाना टर्नओवर डेढ़ करोड़ रुपए से कम है, तो वे अब खुद के अकाउंटिंग, बिलिंग या जीएसटी से जुड़े कार्य फ्री सॉफ्टवेयर से कर सकते हैं.

जयपुर: GST से जुड़ी समस्याएं साफ्टवेयर से होंगी हल, कारोबारियों को मिलेगा सीधा लाभ
जीएसटी को प्रभावी बनाने की कोशिशें जारी हैं.

जयपुर: केंद्र की मोदी सरकार आर्थिक मसले पर अति सक्रिय नजर आ रही हैं. इसके लिए जीएसटी को प्रभावी बनाने की कोशिशें जारी हैं. सरकार ने जीएसटी सरलीकरण की दिशा में छोटे कारोबारियों को तकनीकी मदद के हाथ बढ़ाया गया है. छोटे, मध्यम उद्योग और  व्यापार चलाने वाले ऐसे व्यवसायी, जिनका सालाना टर्नओवर डेढ़ करोड़ रुपए से कम है, तो वे अब खुद के अकाउंटिंग, बिलिंग या जीएसटी से जुड़े कार्य फ्री सॉफ्टवेयर से कर सकते हैं.

जीएसटी काउंसिल के निर्देश पर जीएसटीएन ने सॉफ्टवेयर विक्रेताओं से सहभागिता के तहत माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज के लिए मुफ्त अकाउंटिंग और बिलिंग के लिए कुछ सॉफ्टवेयर की सूची भी उपलब्ध कराई है. यह फ्री सॉफ्टवेयर सक्रिय सामान्य करदाताओं, एसईजेड डेवलपर्स, एसईजेड इकाइयों और करदाताओं को उपलब्ध हैं, जिन्होंने जीएसटी की कंपोजिशन स्कीम को चुना है. इन श्रेणी के कारोबारी या उद्यमी 31 मार्च 2021 तक जब चाहें ये सॉफ्टवेयर डाउनलोड कर सकते हैं. राजस्थान ईकाई अब इसको लेकर जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करेगी. 

ऐसे डाउनलोड करें सॉफ्टवेयर
साफ्टवेयर www.gst.gov.in पर उपलब्ध है. वेबसाइट पर Free Accounting & Billing Software for MSME's लिंक पर क्लिक करने के बाद नया पेज खुलेगा, जिसमें FAQ's और यूजर मैनुअल दिया गया है. फ्री सॉफ्टवेयर में जीएसटी से संबंधित विभिन्न प्रकार के रिटर्न तैयार करने और उन्हें ऑनलाइन फाइल करने की सुविधा दी गई हैं. 

सिंगल यूजर एक्सेस वाले इन सॉफ्टवेयर में सप्लायर, कस्टमर मास्टर डायरेक्टरी, सेल, पर्चेज, कैश, बैंक लेजर, बिलिंग और लेजर प्रिंटिंग, नए सॉफ्टवेयर में डाटा माइग्रेशन, आइटम या बिल सर्च ऑप्शन, ऑटोमैटिक इनवेंट्री, आइटम मास्टर में जीएसटी से संबंधित एचएसएन कोड, विवरण, यूनिट, प्राइस, टैक्स दर, ऑटोमेटिक टैक्स गणना और मास्टर आइटम में टैक्स रेट में बदलाव की सुविधा, सेल्स बिल को कैंसिल करने की सुविधा, डेबिट-क्रेडिट नोट जारी करने सहित तमाम सुविधाएं उपलब्ध है.  

जिन कारोबारियों का सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये तक है, उन्‍हें यह सॉफ्टवेयर मुफ्त में मिलेगा. इससे वे खुद से ही कंपनियों का बिल और अन्‍य लेखा-खातों का ब्योरा तैयार करने, वेयरहाउस के माल का प्रबंधन और जीएसटी रिटर्न तैयार कर पाएंगे. इसमें कर व्यवहारियों को किसी विशेषज्ञ की मदद नहीं लेनी होगी. देश में करीब 80 लाख एमएसएमई ऐसे हैं जिनका कारोबार 1.5 करोड़ रुपये तक या उससे कम है, राजस्थान में यह संख्या 12 लाख के करीब हैं. केंद्र सरकार का मकसद हैं सभी टैक्स प्रक्रिया से जुड़े, जिससे नीति निर्माण में राहत हो.