जयपुर: युवा ज्वैलर ने ISRO को दी अनोखी सलामी, बनाया चांदी का 'चंद्रयान-2'

जयपुर के ज्वैलर ने इसे देश के वैज्ञानिकों की मेहनत को समर्पित किया है. इनका कहना है कि यह प्रतिकृति बिक्री के लिए नहीं होगी, इसे इसरो मुख्यालय का भेंट किया जाएगा.

जयपुर: युवा ज्वैलर ने ISRO को दी अनोखी सलामी, बनाया चांदी का 'चंद्रयान-2'
इसे बनाने में पैंतालीस दिन का समय लगा है.
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जयपुर: भारत विविधताओं में एकता का देश है. विचारधारों का प्रवाह भी इसके लोकतांत्रित स्वरूप को निखारता है. देशवासी राष्ट्र के मुद्दों पर अपनी भावनाएं, एकता और समर्पण को दिखाने में नहीं चूकते. ऐसे ही एक वाकई ने देश का मान विदेशों में भी बढ़ाया, अवसर था इसरो की ओर से चंद्रयान-2 मिशन, जब प्रत्येक भारतवासी एक टक होकर आसमान को निहारता रहा. 

इस मिशन ने भले ही सफलता की अंतिम सीढ़ी पर कदम नहीं रखा, लेकिन देश वैज्ञानिकों की क्षमता, कुशलता और बड़े मिशन को लेकर सोच दुनिया के सामने आई. इस मिशन को कारीगरी में ढालने का काम जयपुर के ज्वैर्ल्स ने किया. शुद्व चांदी में हाथ की कारीगरी से चंद्रयान-2 बनाकर. इस चंद्रयान-2 की प्रतिकृति को इसरो को समर्पित करने की चाहत युवा ज्वैलर ऋषभ जैन और राहुल जैन की है. इसके पीछे की प्रेरणा हैं इनके पिता भागचंद जैन. 

जयपुर के ज्वैर्ल्स की कारीगरी
राजस्थान का ज्वैलरी सेक्टर देश दुनिया में अपनी अनूठी कारीगरी के लिए प्रसिद्व है. ज्वैलरी को सामयिक विषयों के साथ ढालने की काबिलियता यहां के ज्वैलर्स में है. नामी फिल्मों, हस्तियों के विवाह समारोह और खास मौकों को यादगार बनाने के लिए ज्वैलरी निर्माण का कौशल यहां के ज्वैर्ल्स के हाथों में पुश्तैनी है. जयपुर के ज्वैलर भागचंद जैन, ऋषभ जैन और राहुल जैन ने अबकी बार चंद्रयान-2 की चांदी से प्रतिकृति बनाई गई है. ज्वैर्ल्स ने इसे देश के वैज्ञानिकों की मेहनत को समर्पित किया है. इनका कहना है कि यह प्रतिकृति बिक्री के लिए नहीं होगी, इसे इसरो मुख्यालय का भेंट किया जाएगा.

मशीन का नहीं हुआ उपयोग
इसे बनाने में पैंतालीस दिन का समय लगा है. 19 इंच उंचाई की चांदी से बनी प्रतिकृति को देखकर हर कोई इसका मुरीद हो रहा है. इसरो के पूर्व चेयरमैन राधाकृष्णन ने भी ट्वीटर पर इसकी प्रशंसा की है. चंद्रयान-2 की प्रतिकृति में चार किलो 92.5 ग्रेउ की चांदी का उपयोग हुआ है. साथ ही जयपुर की ज्वैलरी को प्रसिद्धि दिलाने वाली कला मीनाकारी का भी उपयोग किया गया है. ज्वलैर भागचंद जैन का कहना हैं कि इसे बनाने में मशीन का उपयोग नहीं हुआ है, हाथ की कारीगरी से ही पूरी प्रतिकृति बनाई गई है. ज्वैलर ऋषभ जैन और राहुल जैन का कहना है कि चंद्रयान-2 की प्रतिकृति बिक्री के लिए नहीं हैं, यह हमारे वैज्ञानिकों को समर्पित है. इसके पीएमओ के जरिए इसरो मुख्यालय को सौंपने की इच्छा है. इसे बनाने का मकसद वैज्ञानिक प्रतिभा को सैल्यूट करना रहा है.