Chandrayaan-3 Launching Date And time: इसरो (ISRO) चंद्रयान-3 ( Chandrayaan-3) मिशन की लॉन्चिंग के लिए पूरी तरह रेडी है. इसको लेकर इंडिया समेत दुनियाभर के देशों में जिज्ञासा है. जानिया क्या है Chandrayaan-3 के लॉन्चिंग की तारीफ और समय.
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Chandrayaan-3 Launching Date And time: भारत एक बार फिर दुनिया में अपना डंका बजाने के लिए तैयार है. अगर सब कुछ सही रहा तो धरती के साथ चांद पर भी इंडिया का झंडा फहरेगा. इसरो (ISRO) अपना चंद्रयान-3 ( Chandrayaan-3) मिशन लॉन्च करने की पूरी तैयारी कर चुका है. बता दें कि यह मिशन चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) की चंद्रमा की सतह पर असफल लैंडिंग के बाद शुरू किया गया था.
चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग डेट और समय (chandrayaan-3 launch date and time)
इसरो (ISRO) की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार 14 जुलाई को श्रीहरिकोटा (Sriharikota) के सतीश धवन केंद्र से Chandrayaan-3 को लॉन्च किया जाएगा. सूचना मिल रही है कि शुक्रवार की दोपहर 2 बजकर 35 मिनट पर चंद्रयान-3 को प्रक्षेपित किया जाएगा.
क्या है लैंडर और रोवर का नाम (name of lander and rover chandrayaan-3)
जानकारी के अनुसार Chandrayaan-3 के लैंडर और रोवर का नाम वही रहेगा, जो Chandrayaan-2 के लैंडर और रोवर का रखा गया था. बता दें कि चंद्रयान-3 के लैंडर का नाम विक्रम (Vikram) ही रखा जाएगा. लैंडर का नाम विक्रम (Vikram), भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जन्मदाता विक्रम साराभाई (Vikram Sarabhai) के नाम पर रखा गया है. इसी तरह रोवर का नाम प्रज्ञान (Pragyan) होगा.
अगस्त में इस तारीख को होगी सॉफ्ट लैंडिंग (Soft landing in August chandrayaan-3)
विक्रम लैंडर (Vikram Lander) के चंद्र की सतह पर 23 या 24 अगस्त को ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ की उम्मीद जताई जा रही है. वहीं, रोवर प्रज्ञान चंद्रमा की सतह का अध्ययन करेगा. बताया जा रहा कि यह लैंडर का मिशन 14 दिन का होगा. जो चंद्रमा के एक दिन के बराबर होता है.
देखिए वीडियो...
Movement of the launch vehicle to the launch pad. pic.twitter.com/Tu973C6IjC
— ISRO (@isro) July 7, 2023
चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरनेवाला पहला मिशन है चंद्रयान-3
इस बार चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) को अधिक ईंधन और सुरक्षा उपायों को ध्यान में रखते हुए चंद्रमा पर भेजा जा रहा है. इसरो ने जानकारी दी कि इस बार उसने "विफलता-आधारित डिज़ाइन" का ऑप्शन चूज किया है, जिससे यह तय किया जा सके कि कोई चूक होने पर भी लैंडर चंद्रमा पर सफलता से लैंडिंग कर सके. बताया जा रहा है कि इससे पहले जब भी देशों ने चंद्रमा अपने यान भेजे हैं, उन सब की लैंडिंग उत्तरी ध्रुव पर हुई है, जबकि ISRO का चंद्रयान-3 दक्षिणी ध्रुव पर उतरनेवाला पहला मिशन बताया जा रहा है.
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