'उड़ता पंजाब' के बाद नशे में डूबा Jalore का युवा, खुलेआम बिक रहा Drugs, प्रशासन खामोश

सोलह साल की कम उम्र से ही युवा इस नशे के आदी हो रहे हैं, हालांकि बीस से तीस साल के युवा नशे की गिरफ्त में ज्यादा हैं. यारी-दोस्ती के साथ ये सफर शुरू होता है फिर धीरे-धीरे इस नशे के जाल में ऐसा फंसता है कि उसका निकलना मुश्किल हो जाता है.

'उड़ता पंजाब' के बाद नशे में डूबा Jalore का युवा, खुलेआम बिक रहा Drugs, प्रशासन खामोश
प्रतिकात्मक तस्वीर.

Jalore: नशे ने पंजाब के युवा वर्ग को अपनी गिरफ्त में ले रखा है. ऐसा ही नजारा इन दिनों जालोर जिले के सांचोर (Sanchore) में देखा जा रहा है. नशा अब जालोर जिले के सांचोर के युवाओं के नसों में धीरे-धीरे धुलता जा रहा है. इस नशे ने यहां के युवाओं को अपनी गिरफ्त में तकरीबन पंद्रह से बीस सालों से ले रखा है पर अब यह नशा शराब और सिगरेट से होते हुए स्मैक और एमडी ड्रग्स (MD Drugs) तक पहुंच चुका है. इतना ही नहीं इसकी लत अब यहां के नए बच्चों तक पहुंच चुकी है,जो समाज के लिए एक गंभीर खतरा बनता जा रहा है.

इन इलाकों में अफीम और डोडा पोस्त के बाद अब स्मैक (Smack) एमडी और मेडिकेटेड टेबलेट्स जैसे नशे ने भी अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है. सोलह साल की कम उम्र से ही युवा इस नशे के आदी हो रहे हैं, हालांकि बीस से तीस साल के युवा नशे की गिरफ्त में ज्यादा हैं. यारी-दोस्ती के साथ ये सफर शुरू होता है फिर धीरे-धीरे इस नशे के जाल में ऐसा फंसता है कि उसका निकलना मुश्किल हो जाता है. हमने नशे की गिरफ्त में आये कुछ युवाओं से बात की तो, उन्होंने बताया कि वे पिछले दस से पंद्रह सालों से नशा करते आ रहे हैं. शुरुआत में शराब, अफीम, पोस्त, नशीली गोलियां और फिर स्मैक और अब एमडी का नशा करने लगे.

जानकार हैरानी होगी कि नशा करने के लिए प्रतिदिन तीन से चार हजार रुपये की जरूरत होती है, जिसके लिए वे शुरुआत में तो घर से रुपये लेते थे, लेकिन जब नशे के कारण घर बर्बाद होने लगा और रुपये ख़त्म हुए तो उन्होंने घर का सामान बेचना शुरू कर दिया. इसके साथ लोगो के साथ लूटपाट, चोरी, ठगी और रिश्तेदारों से रुपये मांगना शुरू कर दिया, जिसके लिए कई बार उन्हें जेल तक जाना पड़ा. 

नशेड़ी बेटा बना अपने ही घर में चोर
नशे की गिरफ्त में आए युवकों के परिजनों की हालत काफी चिंताजनक होती है क्योंकि वे अपने खून को नशे से बर्बाद होते हुए अपनी लाचार आंखों से देखते हैं. नशा नहीं मिलने पर जब उनका बेटा दर्द से कराहता है तो मां-बाप के सीने पर खंजर की तरह चोट लगती है बहुत बार नशेड़़ी अपने माता-पिता के साथ पत्नी और बच्चें तक को पीट देता है. घर से सामान बेच देता है और तो और बाहर चोरियां तक भी करने लगता है.

सांचोर, सरवाना, झाब और चितलवाना. सन् 2020 और 2021 में इन थानों में स्मैक और एमडी के खिलाफ कितनी कार्रवाई हुई, इस पर नजर डालते हैं-
सांचोर में 2020 में 9 कार्रवाई में 168 ग्राम स्मैक व 2021 में 1 कार्रवाई में 212 ग्राम स्मैक बरामद की गई. झाब पुलिस थाने में 2020 में 7 ग्राम व 2021 में 26 ग्राम स्मैक बरामद की गई.चितलवाना पुलिस थाने में 2020 में 4 कार्रवाई में 31 ग्राम व 2021 में 2 कार्रवाई में 9 ग्राम स्मैक बरामद की गई.वहीं सरवाना पुलिस थाने में 2020 में एक कार्रवाई में 4 ग्राम स्मैक बरामद की गई वहीं 2021 में एक भी कार्रवाई नहीं हुई.

केवल स्मैक नशेड़ियों की ही हुई गिरफ्तारी
इन आंकड़ों को देखा जाए तो परिणाम यह निकलता है कि इन कार्रवाइयों में केवल स्मैक के नशेड़ियों को ही पकड़ा है. पुलिस अभी तक उन नशे की सप्लाई करने वाले गिरोह तक नहीं पहुंच पाया है जब तक पुलिस उन गिरोह को नहीं पकड़ेगा तब तक इन नशे पर अंकुश नहीं लग पायेगा.

नशेड़ियों पर काबू के लिए बनी खास कमेटी
जिले में बढ़ रहे स्मैक के कारोबार और नशेड़ियों की तादाद को देखते हुए बिश्नोई महासभा (Bishnoi Mahasabha) जालोर के जिलाध्यक्ष सुरजनराम बिश्नोई ने गांव-गांव जाकर ग्रामीणों की बैठक कर नशे पर अंकुश लगाने के लिए प्रस्ताव लिए वहीं स्मैक के नशेड़ियों व सप्लायरों को उनके घर-घर जाकर चेतावनी भी दी कि अगर नहीं माने तो पकड़कर पुलिस को सुपुर्द करेंगे.इसके लिए प्रत्येक गांव में कमेटी भी बनाई, जो गांव में निगरानी रखेगी और नशेड़ियों की सूचना पुलिस तक पहुंचाएगी.

इतने दामों पर बेची गई स्मैक
सांचोर क्षेत्र से गुजरने वाले NH 68 पर ढाबों पर और गांधव से बाखासर जाने वाले NH 925A पर दुकानों पर खुलेआम स्मैक और एमडी बेची जा रही है. स्मैक एक ग्राम के 1000 रुपये व एमडी एक ग्राम के 2000 रुपये में बेची जा रही है.बावजूद पुलिस इनके खिलाफ अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई.

अस्थाई चौकी पर लटक रहे ताले
वहीं क्षेत्र में बढ़ रहे स्मैक और एमडी के नशेड़ियों को देखते हुए मंत्री सुखराम बिश्नोई (Sukhram Bishnoi) ने कुण्डकी में मंत्री बनते ही अस्थाई चौकी का उदघाटन किया था, लेकिन कुछ माह तक चौकी चालू रहने के बाद अब ताले लटक रहे हैं.जब चौकी चालू थी, तब यहां जरुर नशेड़ियों की संख्या में कमी आई, लेकिन फिर वो ही हालात नजर आ रहे हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में समाज और परिवार दोनों को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. 
Reporter- Bablu Meena