कोटा: जानें राजस्थान के बदलते सिक्कों का इतिहास, किस शासक के दौर में रहा सबसे खास!

रियासतों में कभी शासकों ने बूंद जैसे छोटे सिक्के चलाए तो कभी कील जैसे सिक्के भी प्रचलन में थे. वजन और काम के हिसाब से ये मुद्रा चलाई जाती थी. 

कोटा: जानें राजस्थान के बदलते सिक्कों का इतिहास, किस शासक के दौर में रहा सबसे खास!
वजन और काम के हिसाब से ये मुद्रा चलाई जाती थी.

केके शर्मा, कोटा: भारत में मुद्रा की तस्वीर बदलने का इतिहास काफी पुराना है. जैसे-जैसे रियासतें बदलीं, शासक बदले, वैसे-वैसे भारत वर्ष में रियासतों में चलने वाली मुद्रा-सिक्कों की तस्वीरें भी बदलती रहीं. कभी बिंदुआकार के सिक्के प्रचलन में आए तो कभी पंचमार्क सिक्के, कभी तांबे के सिक्के तो कभी चांदी-सोने के सिक्के प्रचलन में रहे. सिक्कों का ये इतिहास 2500 साल पुराना है यानि 500 ईसा पूर्व का है, जब से सिक्कों का प्रचलन ज्ञात हुआ.

आज के दौर में जहां सबसे आधुनिक मुद्रा के रूप में क्रिप्टो-करेंसी बिटकॉइन भी प्रचलन में आ चुकी है, वहीं अब जरा इन सिक्कों पर भी नजर डाल लीजिए जो आपको भारतवर्ष के इतिहास के उस दौर में ले जाएगी, जब मुद्रा के नाम पर धातु के एक टुकड़े पर महज एक छापा लगा दिया जाता था. इसे पंचमार्क सिक्कों का नाम दिया गया. सिक्कों का ये इतिहास है लगभग ढाई हजार साल पुराना. उस समय शासक अपना फोटो एक धातु के टुकड़े पर छाप देते थे, जिसे पंचमार्क सिक्कों का नाम दिया गया. हर राजा पंचमार्क सिक्कों पर अलग-अलग निशान छापते थे, जिससे की पता चल सके कि कौन सा सिक्का किस जनपद का है? इतिहासकार और वरिष्ठ मुद्रा विशेषज्ञ एडवोकेट शैलेश जैन बताते हैं कि कुल 14 जनपदें हुआ करती थी और सबकी अलग-अलग मुद्रा थी.  

मुद्रा विशेषज्ञ शैलेश जैन बताते हैं कि सिक्कों के ढाई हजार सालों के इतिहास में पंचमार्क सिक्कों के बाद मौर्य वंशज आए, फिर कुशाण आए, जिसके बाद गुप्त वंशजों ने राज किया. फिर सुल्तान आए. फिर मुगल शासन आया, जिसके बाद ब्रिटिश सरकारों ने राज किया. हर बार मुद्रा और सिक्कों की तस्वीर बदलती रही. बदलते शासन में पंचमार्क सिक्कों से रिपब्लिक मुद्रा तक ये सिक्के विभिन्न आकार लेते रहे.

कील जैसे सिक्के भी चलन में रहे
रियासतों में कभी शासकों ने बूंद जैसे छोटे सिक्के चलाए तो कभी कील जैसे सिक्के भी प्रचलन में थे. वजन और काम के हिसाब से ये मुद्रा चलाई जाती थी. जैसे आज के दौर में 2 हजार का सबसे बड़ा नोट प्रचलन में है. वैसे ही तत्कालीन शासकों ने बड़ी मुद्रा के तौर पर सोने की मोहरें चला रखा थी, जिसका सबसे बड़ा श्रेय राजा समुद्रगुप्त को जाता है, जिसके दौर में सबसे ज्यादा सोने की मुद्रा का प्रचलन था. 

हर दौर में बदली सिक्कों की तस्वीर
मुद्रा विशेषज्ञ शैलेश जैन के अनुसार विजयनगर साम्राज्य में सोने के बिंदु जैसे सिक्के चलते थे, जो संभवतः सबसे छोटे आकार की मुद्रा रही होगी. इसके बाद अलग-अलग शासकों के दौर में सिक्कों का आकार और आकृति बदलती रही. मुद्रा विशेषज्ञ शैलेश जैन के पास लगभग हर शताब्दी और शासकों के दौर के सिक्के मौजूद है, जिनमें सबसे पुराना लगभग चौथी शताब्दी के समय के शासक राजा हर्षवर्धन का सिक्का भी मौजूद है, जिस पर राजा का फ़ोटो छपा हुआ है.

जैन के पास प्राचीन मुद्राओं के ये कलेक्शन बेहद रोचक और महत्वपूर्ण है. प्राचीन मुद्राओं का ये कलेक्शन बताता है कि भारतीय इतिहास और सभ्यता कितनी पुरानी है साथ ही वक्त के बदलते हर दौर और शासन की गवाह भी है. शासन  और आवश्यकताओं के बदलते दौर में मुद्राओं के स्वरूप में परिवर्तन आज भी जारी है, जो अगले इतिहास के कालखंड का गवाह होंगी.