close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

राजस्थान: नशे की गिरफ्त में प्रदेश के नौनिहाल, बढ़ी पुलिस की मुश्किलें

नशे के दलदल में फंसे बच्चों की इस दुनिया में जब जी मीडिया की टीम पहुंची तो कई चौकाने वाली जानकारियां मिली

राजस्थान: नशे की गिरफ्त में प्रदेश के नौनिहाल, बढ़ी पुलिस की मुश्किलें
इन गलियों में नशे का साम्राज्य स्थापित हो चुका है

अजमेर: बच्चों में बढ़ती नशे की लत दुनिया भर में चिंता का विषय है. लेकिन बात यदि राजस्थान के अजमेर शहर की करें तो अब पानी सर से ऊपर होकर गुजरने लगा है.  बच्चो में नशे की लत के खिलाफ काम करने वाली संस्थाओ की रिपोर्ट चौकाने वाली है. बताया जा रहा है कि अजमेर देश में गोवा के बाद दूसरा शहर है जंहा सब से ज्यादा नशेड़ी बच्चे है. बावजूद इसके अजमेर में आज भी बच्चों के लिए ना तो नशा मुक्ति केंद्र है और ना ही उनके पुनर्वास के कोई इंतजाम. अजमेर में बच्चों में नशे की लत के जमीनी हालात की सच्चाई चौकाने वाली है. 

सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के नाम से ख्यातनाम अजमेर को देश और दुनिया में बड़ी अकीदत के साथ याद किया जाता है. धीरे-धीरे धार्मिक आस्था का यह शहर अपनी एक नई पहचान बना चुका है. लेकिन ख्वाजा साहब से नाम जुड़ने से गौरान्वित होने वाला अजमेर अपनी नई पहचान को लेकर शर्मसार है.  चौकाने वाली बात तो यह है की मासूम बच्चों को गिरफ्त में ले रही नशे की लत के चलते बदनाम होते अजमेर के पास फिलहाल इसका कोई तोड़ नहीं है. अजमेर में नशेड़ी बच्चो का अपना अलग संसार है.  

नशे के दलदल में फंसे बच्चों की इस दुनिया में जब जी मीडिया की टीम पहुंची तो कई चौकाने वाली जानकारियां मिली. दरअसल नशेड़ी बच्चो की इस दुनिया को बसाया गया है दुनिया भर की आस्था का केंद्र माने जाने वाले सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के आसपास बसी सकरी गलियों में. इन गलियों में नशा तस्कर और नशेड़ी बच्चे दोनों अपने आप को महफूस महसूस करते है. यहां इन बच्चों को हर तरह का नशा सहज उपलब्ध हो जाता है. फिर बात चाहे घातक नशा माने जाने वाले स्मैक की हो या चरस और गांजे की. कुल मिला कर इन गलियों में नशे का साम्राज्य स्थापित हो चुका है. इस बात की गवाही भी हमे मिली इन्हीं नशे की लत का शिकार बच्चों से.

वहीं बच्चों के कल्याण के लिए काम करने वाली संस्थाएं चाइल्ड लाइन ने नशे की गिरफ्त में फंसे बच्चों के बारे में विस्तृत सर्वे किया है. इसके अनुसार शहर में सबसे ज्यादा नशेड़ी बच्चे दरगाह इलाके में अंदरकोट, जालियान कब्रिस्तान, डिग्गी, देहली गेट, फव्वारा चौराहा और बजरंगगढ़ के आसपास व रेलवे स्टेशन पर हैं. नशे की गिरफ्त में बच्चों को नशीली सामग्री मुहैया कराने वाले दुकानदारों और असामाजिक तत्वों के बारे में विस्तृत रिपोर्ट जिला पुलिस को संस्थाएं दे चुकी है. स्टेशनरी की दुकानों पर सहज उपलब्ध व्हाइटनर, टायर पंक्चर में काम में लिए जाने वाला सोल्यूशन, सर्दी-जुकाम में ली जाने वाली सिरप और चरस, गांजा, अफीम और डोडा-पोस्त बच्चों को मुहैया कराने वाले करीब दो दर्जन से ज्यादा ठिकाने हैं. इसकी जानकारी संस्थाएं पुलिस को भी मुहैया करवा चुकी है. 

अजमेर में बच्चों में बढ़ती नशे की लत की जानकारी हर किसी के पास है.  लेकिन इस बिमारी का इलाज किसी के पास नहीं. पुलिस के पास अपनी सक्रियता दिखाने के लिए आंकड़ों का सहारा जरूर है लेकिन इन आंकड़ों से हट कर बात करें तो जमीनी हकीकत खुद अपने कहानी कहती दिखाई देती है. दरगाह इलाके के पुलिस डिप्टी राहुल वशिष्ठ की मानें तो पुलिस बच्चो को नशे की लत से दूर रखने के हरसंभव प्रयास करती है. इसी के तहत वर्ष 2018 में विभिन्न संस्थाओ के माध्यम से पुलिस ने 70 बच्चो को रेस्क्यू किया गया. जिनमे से 63 बच्चो को उनके परिवार को सपुर्द किया गया. 7 बच्चों को बाल कल्याण समिति के माध्यम से बाल सम्प्रेषण गृह भेजा गया. जबकि बच्चों को नशा बेचने वालो के खिलाफ 75 मुकदमे दर्ज किये गए. 

वहीं मासूमों के एक संस्था में काम करने वाले आकाश सोनी की मानें तो अजमेर में कई ऐसे गिरोह भी संचालित हैं जो इन बच्चों को नशे की लत का शिकार बनाते हैंं बाद में इन बच्चों को अपराध की दुनिया में धकेल देते हैं. आकाश सोनी के अनुसार ऐसे ही एक गिरोह के खिलाफ जब उन्होंने अभियान छेड़ा तो उनको खुद जान के लाले पड़ गए. नशा तस्करों ने उन्हीं पर जानलेवा हमला कर दिया बाइट आकाश सोनी सदस्य एक उड़ान मासूमों के नाम अजमेर में नशे का यह कारोबार इतना खुलेआम है कि सबको पता है नशा कहां और कैसे मिलता है. बावजूद इसके पुलिस और प्रशासन द्वारा कोई मुकम्मल कार्यवाही आज तक नहीं की गई और ना ही नशेड़ी के रूप में चिन्हित किए गए बच्चों को नशा मुक्त करने और उनके पुनर्वास के कोई इंतजाम किए गए हैं.