राजस्थान: उर्स के मौके पर अजमेर शरीफ में गूंजी खास शाही कव्वाली की धुन

यूं तो ख्वाजा के दरबार में रोज कव्वाली होती है, मगर उर्स के मौके पर ख़ास शाही कव्वाली की बात ही कुछ और है

राजस्थान: उर्स के मौके पर अजमेर शरीफ में गूंजी खास शाही कव्वाली की धुन
दरगाह में यह शाही कव्वाली सिर्फ उर्स के मौके पर ही होती है

अजमेर: कहते है की सूफियों की गिजा कव्वाली होती है, यही वजह है की ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में कव्वाली का खास महत्व है. यहां देश-विदेश से मशहूर कव्वाल अपने- अपने कलाम पेश करने आते है. इन कव्वालियों के रूहानी शब्दों से लोग झूम उठते है और खो जाते है. रौशनी से जगमगाती गरीब नवाज की दरगाह इन दिनों अल्लाह की रहमत रात-दिन बरस रही है.

ख्वाजा की यह दरगाह बेसहारों को सहारा देती है और पूरी सभी अकीदतमंदों की मन्नते मुरादे पूरी करती है. बता दें कि आजकल अजमेर की गलियों में ख्वाजा की इबादत में जुटे कव्वालों ने धूम मचा रखी है, अकीदतमंद जायरीन अपने-अपने अंदाज में ख्वाजा के रंग में रंगे हुए है. यूं तो ख्वाजा के दरबार में रोज कव्वाली होती है, मगर उर्स के मौके पर ख़ास शाही कव्वाली की बात ही कुछ और है. 

दरगाह के महफ़िल खाना में यह शाही कव्वाली सिर्फ उर्स के मौके पर ही होती है. जिसमे देशभर से आये जायरीन भी सूफियाना रंग में रंगने को बेताब रहते है. उर्स के मौके पर रात और दिन दरगाह में कव्वाली से ख्वाजा का जश्न मनाया जाता है. ख्वाजा के गीत गाये जाते है ख्वाजा को याद किया जाता है. कहते है की कव्वाली ख्वाजा गरीब नवाज को बहुत पसंद थी और आज भी पसंद है. यही वजह है की दरगाह में इस हिंदलवली की दरगाह में जगह-जगह कव्वाली पेश की जाती है. 

जानकार बताते हैं की कव्वाली वलियों और सूफी संतो की गिजा होती है. दरगाह के चप्पे-चप्पे पर एसे कई कव्वाल आपको अपनी अकीदत का इज़हार करते हैं और हो भी क्यों ना यह रस्म ख्वाजा के दर से जो इजाद हुई है. हर कोइ कव्वाली सुन कर अपनी रूहानियत की मोहब्बत से ख्वाजा के इश्क में खो जाता है. हर कोइ चाहता है कव्वाली से पैगामे मोहब्बत दिल में बसा कर अपने वतन लौटे. 

दिन हो या रात जायरीन सूफियाना कलामों पर अपना सब कुछ लुटाते नज़र आते है. कव्वाली का ऐसा सुरुर के हर किसी को झूमने को मजबूर कर रहा है. कोइ इन कलामों पर वज्द कर रहा है तो कोइ ख्वाजा की याद में अश्क बहा रहा है. ख्वाजा की याद में अकीदतमंद तड़प रहे है मचल रहे है और अपनी मुरादे मांग रहे है. कव्वाली एक जरिया है दिल को सुकून पहुंचाने का प्यार मोहब्बत भाईचारा फैलाने का. अजमेर दरगाह में इन कव्वालियों के बोल पर सभी मज़हब के लोग झूम उठते है और ख्वाजा साहब की यादों में खो जाते है.