जयपुर: हेरिटेज वॉक-वे हुआ गंदा, प्रशासन को सुध नहीं

पिंक सिटी को भले ही यूनेस्को की हेरिटेज सिटी की लिस्ट में जगह मिल गई हो, लेकिन आज भी हेरिटेज सिटी के नाम पर एक धोखा सा है. 

जयपुर: हेरिटेज वॉक-वे हुआ गंदा, प्रशासन को सुध नहीं
हैरिटेज वॉक-वे

रोशन शर्माजयपुर: पिंक सिटी को भले ही यूनेस्को की हेरिटेज सिटी(Heritage city) की लिस्ट में जगह मिल गई हो, लेकिन आज भी हेरिटेज सिटी(Heritage city) के नाम पर एक धोखा सा है. हेरिटेज सिटी के नाम पर जयपुर वासियों के साथ छलावा किया जा रहा है. तक़रीबन तीन करोड़ रुपये की लागत से जयपुर की चार दीवारी में हेरिटेज वॉक-वे बनाया गया था, लेकिन न जाने इस हेरिटेज वॉक-वे को कौन निगल गया. न तो नगर निगम प्रशासन को भी इस बारे में जानकारी है और न ही और किसी को.

करोड़ों रूपए की लागत से चौड़ा रास्ता और किशनपोल बाजार के बीच हैरिटेज वॉक-वे(Heritage Walkway) बनाया गया था. करीब 1 किमी एरिया में बनाया गया हैरिटेज वॉक-वे(Heritage Walkway) की आज ऐसी दुर्दशा है कि यहां पर न तो पर्यटक जाना पसंद करते हैं और न ही जयपुरवासी. हैरिटेज वॉक-वे का निर्माण जयपुर नगर निगम ने 2014-15 में तीन करोड़ रुपए की लागत से करवाया था. चौड़ा रास्ता से फिल्म कॉलोनी, नानगा ठठेरे की गली, ठठेरों का रास्ता, नाटाणियों का रास्ता, आरोग्य सदन के सामने संघी जी की गली, सकरी गली, मनिहारों का रास्ता, पंडित शिवदीन जी का रास्ता तथा किशनपोल बाजार में राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के सामने तक बनाया गया, लेकिन इसकी दुर्दशा किसी से छिपी हुई नहीं है.

हैरिटेज वॉक-वे के जरिए जयपुर के हैरिटेज और कला को दर्शाने की कोशिश की गई थी, लेकिन आज यहां पर्यटक आना तक पसंद नहीं करते. वॉक-वे पर अक्सर गंदगी रहती है. वॉक-वे(Heritage Walkway) पर रियासतकालीन कला, पुरानी हवेलियां, बाजार व चारदीवारी का वॉटर सिस्टम तथा तब की सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था को दर्शाया जाना था, लेकिन आज ऐसी स्थिति है कि हर किसी को यहां जाने में शर्म आती है.

हेरिटेज वॉक-वे बनाने के पीछे की वजह
हेरिटेज वॉक-वे बनाने के पीछे भी एक बड़ी कहानी है. ब्रिटेन के तत्कालीन प्रिंस चार्ल्स सन 2006 में जब जयपुर घूमने आए थे, तो वे इसी रास्ते में कई घंटों तक घूमे थे और यहां की कला को देखकर अभिभूत हुए थे. तभी से इस रास्ते को हैरिटेज वॉक-वे नाम दिया गया, जिसके बाद राज्य सरकार और जयपुर नगर निगम ने एक किलोमीटर एरिया में हेरिटेज वॉक-वे बनाने का निर्णय लिया. 
इस इलाके में बड़ी संख्या में ठठेरी समाज के लोग रहते हैं, जब पर्यटक यहां की कला और संस्कृति को जानेंगे तो पर्यटन तो बढ़ेगा ही साथ ही यहां के लोगों को रोज़गार भी मिल सकेगा, लेकिन रोज़गार तो दूर की बात यहां पर निगम प्रशासन साफ सफाई रखने में ही समर्थ नहीं है.