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राजस्थान सरकार ने भामाशाह और आयुष्मान भारत को किया मर्ज, बनाई एक नई योजना

उधर दोनों योजनाओं को एकीकृत रूप से लागू करने का स्वागत तो बीजेपी विधायक और पिछली सरकार में चिकित्सा मंत्री रहे कालीचरण सराफ ने भी किया है.

राजस्थान सरकार ने भामाशाह और आयुष्मान भारत को किया मर्ज, बनाई एक नई योजना
फाइल फोटो

जयपुर: प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की सुधार की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. अब प्रदेश के लोगों को भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के साथ ही आयुष्मान भारत योजना का भी लाभ मिल पाएगा. सरकार के इस फैसले का ज्यादातर लोगों ने स्वागत किया है, वहीं बीजेपी का कहना है कि दोनों ही योजनाएं उनकी पार्टी की सरकार ने शुरू की थी.

कौन सी योजना किसने शुरू की? किसने उसका माइलेज लिया? इसको लेकर कई बार बहस होती रही है. अब भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना और आयुष्मान भारत को एकीकृत किए जाने के बाद एक बार फिर ऐसा ही कुछ नजारा दिख रहा है. उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने दोनों योजनाओं के एकीकरण का स्वागत करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी की सरकार हमेशा जनहित में काम करती आई है और यह काम लगातार जारी रखेगी. पायलट ने कहा कि जनता को स्वास्थ्य सेवाओं में ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके इसके लिए सरकार ने पहले से चल रही भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना और आयुष्मान भारत को एकीकृत रूप में लागू करने का फैसला किया है.

उधर दोनों योजनाओं को एकीकृत रूप से लागू करने का स्वागत तो बीजेपी विधायक और पिछली सरकार में चिकित्सा मंत्री रहे कालीचरण सराफ ने भी किया है. साथ ही सराफ ने यह भी कहा कि योजना का नाम चाहे भामाशाह रखें या आयुष्मान, लेकिन शुरू तो इसे बीजेपी की सरकार ने ही किया था.

कालीचरण सराफ भले ही योजनाओं की शुरुआत बीजेपी सरकार द्वारा करने की बात कह रहे हों, लेकिन उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट कहते हैं कि ज्यादातर योजनाएं जनहित के लिए होती है और वह सरकार द्वारा लागू की जाती है. पायलट ने कहा कि सरकार जनता की होती है ना की किसी एक पार्टी की.

केंद्र और राज्य की तरफ से स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में शुरू की गई दोनों योजनाओं के एकीकरण का स्वागत कांग्रेस और बीजेपी दोनों कर रहे हैं। लेकिन कांग्रेस की तरफ से सवाल इस बात को लेकर भी उठाए जा रहे हैं कि अगर उनकी सरकार उन लोगों की बेहतरी के लिए दोनों योजनाओं को जोड़ सकती है, तो फिर बीजेपी ने आयुष्मान भारत लॉन्च होने के बाद अपनी सरकार के 7 महीने के कार्यकाल में भी ऐसा फैसला क्यों नहीं लिया.