Rajasthan Budget 2021: पुलिस ने रखी बड़ी मांगें, Hard Duty एलाउंस की भी है उम्मीद

प्रदेश में पुलिसकर्मी काफी लंबे समय से ग्रेड पे (Grade pay) बढ़ाने, साप्ताहिक अवकाश देने, हार्ड ड्यूटी एलाउंस (Hard duty allowance) बढ़ाने आदि की मांग कर रहे हैं. ऐसे में उन्हें सरकार की ओर से बजट में राहत मिलने की उम्मीद है.

Rajasthan Budget 2021: पुलिस ने रखी बड़ी मांगें, Hard Duty एलाउंस की भी है उम्मीद
राजस्थान सरकार के बजट से पुलिसकर्मियों को इस बार खासा उम्मीदें हैं.

Jaipur: राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) की ओर से कल बजट (Budget) पेश किया जाएगा, जिसे लेकर पुलिसकर्मियों को भी काफी उम्मीद है. प्रदेश में पुलिसकर्मी काफी लंबे समय से ग्रेड पे (Grade pay) बढ़ाने, साप्ताहिक अवकाश देने, हार्ड ड्यूटी एलाउंस (Hard duty allowance) बढ़ाने आदि की मांग कर रहे हैं. ऐसे में उन्हें सरकार की ओर से बजट में राहत मिलने की उम्मीद है.

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राजस्थान पुलिस (Rajasthan Police) के जवानों की ओर से विभिन्न माध्यमों से सरकार तक उनकी मांग पहुंचाने का प्रयास किया गया है. अब जब 24 फरवरी को सरकार की ओर से बजट पेश किया जाना है तो तमाम पुलिसकर्मियों की निगाहें सरकार की ओर से की जाने वाली घोषणाओं पर टिकी हुई हैं.

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राजस्थान सरकार के बजट से पुलिसकर्मियों को इस बार खासा उम्मीदें हैं. पुलिसकर्मी पिछले कई सालों से कुछ बेसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिन्हें दूर करवाने के लिए पुलिस अधिकारी भी प्रयास कर रहे हैं. ऐसे में उम्मीद जतायी जा रही है कि पुलिसकर्मियों को इस बजट में राहत मिल सकती है. पूर्व पुलिस अधिकारी राजेंद्र सिंह (Rajendra Singh) का कहना है कि राजस्थान में प्रत्येक थाने पर जाब्ते की कमी है. इस समस्या को दूर करने के लिए राजस्थान सरकार को बजट में पुलिस भर्ती आयोग का गठन करने की घोषणा करनी चाहिए. पुलिस भर्ती आयोग का गठन होने से राजस्थान में लगातार पुलिस की भर्तियां चलती रहेंगी और इसके साथ ही पुलिसकर्मियों के ट्रांसफर, पोस्टिंग और प्रमोशन को लेकर भी काम होता रहेगा. इससे जाब्ते की कमी से जूझ रहे पुलिस थानों की समस्या का समाधान हो सकेगा. 

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16 घंटे से अधिक करना पड़ता है काम
वहीं दूसरी ओर राजस्थान पुलिस में जो पुलिसकर्मी कार्यालय में कार्यरत हैं, उन्हें शनिवार और रविवार का अवकाश प्राप्त होता है. इसके साथ ही त्योहारों पर भी उन्हें अवकाश मिल जाता है, लेकिन वहीं जो पुलिसकर्मी फील्ड में तैनात हैं, उन्हें किसी भी तरह का साप्ताहिक अवकाश नहीं मिलता है. फील्ड में तैनात पुलिसकर्मियों को 16 घंटे से भी अधिक समय तक काम करना पड़ता है. कार्यालय में काम करने वाले पुलिसकर्मियों को 8.33 फीसदी हार्ड ड्यूटी एलाउंस दिया जाता है और फील्ड में काम करने वाले पुलिसकर्मियों को भी इतना ही हार्ड ड्यूटी एलाउंस दिया जाता है. ऐसे में सरकार को बजट में फील्ड में तैनात पुलिसकर्मियों के हार्ड ड्यूटी एलाउंस में 50 फीसदी की बढ़ोतरी करते हुए 16.66 फीसदी हार्ड ड्यूटी एलाउंस देने की घोषणा करनी चाहिए ताकि पुलिस कर्मियों का उत्साह और मनोबल बना रहे. इसके साथ ही पुलिसकर्मी अपने परिवार के साथ कुछ वक्त व्यतित कर सकें, इसे ध्यान में रखते हुए साप्ताहिक अवकाश का प्रावधान भी देना चाहिए. पुलिस के जवानों का जो ग्रेड-पे है वह 2800 रुपये का है, जबकि चयनित वेतनमान 3600 रुपये ग्रेड-पे है. चयनित वेतनमान की श्रंखला को रोककर पुलिसकर्मियों को 2800 रुपये ग्रेड-पे दिया जाता है, जिस पर सरकार को अमल करते हुए ग्रेड-पे को 2800 से 3600 रुपये करना चाहिए.

पुलिस और अधिकारियों को अलॉट किए जाएं फ्लैट
बजट आने से पहले पूर्व पुलिस अधिकारी योगेंद्र जोशी ने बताया कि प्रतिवर्ष केंद्र सरकार से राजस्थान सरकार को पुलिस आधुनिकरण के लिए करोड़ों रुपये का बजट मिलता है. जितने का बजट मिलता है, उतना खर्च नहीं हो पाता, जिसके चलते बजट राशि का काफी बड़ा हिस्सा लैप्स हो जाता है. ऐसे में राजस्थान सरकार को केंद्र सरकार से मिलने वाले बजट का सदुपयोग करते हुए किसी स्थान पर जमीन खरीद कर उस पर फ्लैट बनाने चाहिए और पुलिस में आने वाले जवानों व अधिकारियों को फ्लैट अलॉट करने चाहिए. इसके साथ ही पुलिसकर्मियों को दिया जाने वाला किराया भत्ता न देकर एक निश्चित किराया निर्धारित कर पुलिसकर्मी से वसूल करें. ऐसा करने से कुछ समय बाद उस फ्लैट पर उसमें रहने वाले पुलिसकर्मी का अधिकार हो जाएगा और पुलिस विभाग को भी फ्लैट की मेंटेनेंस, अलॉटमेंट आदि चीजों से छुटकारा मिल सकेगा. 

पुलिसकर्मियों को प्रमोशन कैडर के लिए टेस्ट देना पड़ता 
पुलिस आधुनिकरण के तहत यह काम करके केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाले बजट को लैप्स होने से बचाया जा सकता है और साथ ही बजट का सदुपयोग किया जा सकता है. राजस्थान में पुलिसकर्मियों को प्रमोशन कैडर के लिए टेस्ट देना पड़ता है. कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल बनने पर, हेड कांस्टेबल से एएसआई बनने पर और एएसआई से एसआई बनने के लिए दौड़ लगानी पड़ती है. इस प्रकार की प्रक्रिया में कई कॉन्स्टेबल, हेड कांस्टेबल और एएसआई की मृत्यु हो जाती है. 40 वर्ष से अधिक उम्र के अधिकारियों और कर्मचारियों को अनेक प्रकार की बीमारियां होती हैं, जिसके चलते इस तरह के हादसे घटित होते हैं. छत्तीसगढ़ राज्य में कैडर प्रमोशन के लिए टेस्ट न होकर पुलिसकर्मियों की सीनियरिटी और रिकॉर्ड देखा जाता है. उसी तरह की व्यवस्था को राजस्थान में भी सरकार की ओर से लागू किया जाना चाहिए.

राजस्थान पुलिस में वाहनों के चालकों की कमी 
राजस्थान पुलिस में काफी लंबे समय से वाहनों के चालकों की कमी है और अधिकांश जगह पर कॉन्स्टेबल की ओर से ही पुलिस लाइन में, पुलिस थानों में और अधिकारियों की गाड़ी चलाई जाती है. पिछले 5-10 साल से पुलिस में वाहन चलाने वाले कॉन्स्टेबल काफी ट्रेंड हो चुके हैं और उन्हें चालक भत्ता देने और चालकों में समायोजन करने की बजाए उनके स्थान पर चालकों की नई भर्तियां निकाली जाती हैं. जिन भर्तियों में सिफारिश से कई लोग भर्ती हो जाते हैं और कई लोगों को वाहन तक सही तरीके से चलाना नहीं आता है. ऐसे में सरकार को यह व्यवस्था करनी चाहिए कि जो कांस्टेबल काफी लंबे समय से वाहन चला रहे हैं और यदि वह चालक में समायोजित होना चाहते हैं तो उनका समायोजन करना चाहिए. उसके बाद यदि चालकों के पद रिक्त रहते हैं, तब उन पदों पर भर्तियां निकालनी चाहिए.