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राजस्थान: लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद हो सकते है कांग्रेस-बीजेपी में बदलाव

इसके साथ ही कांग्रेस-बीजेपी में एक चर्चा इस बात की भी है कि आखिर लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी के प्रदेश संगठन में क्या बदलाव होगा. 

राजस्थान: लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद हो सकते है कांग्रेस-बीजेपी में बदलाव
पार्टियों ने अगले निकाय और पंचायतीराज के चुनाव पर अपना ध्यान लगाने के संकेत दे दिए हैं.

जयपुर: लोकसभा चुनाव के नतीजे 23 मई को साफ हो जाएंगे. सरकार बनाने की कवायद दिल्ली में चलेगी लेकिन राजस्थान में भी दोनों प्रमुख पार्टियों में चुनाव के बाद की तैयारियों पर चर्चा होने लगी है. कांग्रेस के संगठन में बदलाव होगा या नहीं और बीजेपी में क्या होगा, यह सभी के बीच चर्चा का विषय है. हालांकि अटकलों के बीच दोनों ही पार्टियों ने अगले निकाय और पंचायतीराज के चुनाव पर अपना ध्यान लगाने के संकेत दे दिए हैं. 

कांग्रेस और बीजेपी के खेमों में हलचल है. लोकसभा चुनाव के नतीजों को लेकर एग्जिट पोल जो इशारा कर रहे हैं. उससे तो केन्द्र में एनडीए की सरकार बनती दिख रही है. लेकिन इन एग्ज़िट पोल के बीच कांग्रेस ने ईवीएम पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है. इसके साथ ही कांग्रेस-बीजेपी में एक चर्चा इस बात की भी है कि आखिर लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी के प्रदेश संगठन में क्या बदलाव होगा. कई लोगों को इस बात की उत्सुकता है कि क्या बदलाव बड़े पैमाने पर होंगे या आंशिक ही रहेंगे?

हालांकि पीसीसी चीफ और उप मुख्यमन्त्री सचिन पायलट ने अपनी भूमिका को लेकर साफ कर दिया है कि लोकसभा चुनाव के बाद उनका फोकस आगामी पंचायतीराज चुनाव पर होगा. पायलट के इस बयान के मायने यह भी समझे जा सकते हैं कि वे प्रदेशाध्यक्ष की भूमिका में रहते हुए आगामी स्थानीय निकाय चुनाव और पंचायतीराज चुनाव पर ध्यान लगाएंगे.

इधर बीजेपी ने भी लोकसभा चुनाव के नतीजों के दिन मतगणना की तैयारी के साथ ही निकाय चुनाव पर अपना ध्यान लगा दिया है. पिछले दिनों बीजेपी के प्रदेश संगठन महामन्त्री चन्द्रशेखर ने कार्यकर्ताओं से निकाय चुनाव पर चर्चा की तो पार्टी ने सोमवार की बैठक में प्रदेश पदाधिकारियों को निकाय चुनाव और पंचायतीराज चुनाव पर फोकस करने को भी कह दिया है. बीजेपी का कहना है कि पार्टी के लिए हर चुनाव महत्वपूर्ण है. ऐसे में पार्टी नेता अभी से शहरी और ग्रामीण निकाय चुनाव को लेकर तैयारियों में जुट गए है.

निकाय चुनाव की तैयारियों में जुटना पार्टियों के लिए कोई नया काम नहीं है. पीसीसी चीफ सचिन पायलट के बयान के बाद कांग्रेस के सियासी हलकों में सिर्फ इसी बात को लेकर कयास चल रहे हैं कि अब निकाय चुनाव भी पायलट की अगुवाई में ही होने हैं. लेकिन टिकिट वितरण में किसकी कितनी भूमिका रहेगी?