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राजस्थान कांग्रेस ने बयानबाजी को लेकर 2 नेताओं को जारी किया कारण बताओ नोटिस

दरअसल लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद राजस्थान मंत्रियों से लेकर पार्टी के पदाधिकारी और दूसरे को कमजोर करने के लिए बयान जारी कर रहे हैं.

राजस्थान कांग्रेस ने बयानबाजी को लेकर 2 नेताओं को जारी किया कारण बताओ नोटिस
अविनाश पांडे ने ज्योति खंडेलवाल और भूप सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

जयपुर: राजस्थान कांग्रेस में बयानबाजी के दौर को रोकने के लिए पार्टी ने अब अनुशासनहीनता का डंडा चलाया है. पार्टी के दो नेताओं को नोटिस जारी कर 7 दिनों में जवाब मांगा है, लेकिन सवाल ये कि नोटिस जारी करने में इतना समय क्यों लिया गया. सवाल यह भी उठ रहे हैं कि इससे पहले जिन नेताओं ने बयान दिए हैं उनके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई.

राजस्थान में कांग्रेस के सत्ता और संगठन के बीच चल रही खींचतान में आ रहे बयानों को रोकने के लिए अब पार्टी के प्रदेश प्रभारी ने कड़ा कदम उठाया है. प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने राजस्थान कांग्रेस के के दो नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और 7 दिनों में जवाब मांगा है. लेकिन सवाल ये कि जब एक दर्जन नेता बयान दे चुके हैं तब कारण बताओ नोटिस दो ही नेताओं को क्यों मिला है. क्या इससे पहले जी नेताओं ने बयान दिए थे वह बयान अनुशासनहीनता की श्रेणी में नहीं आते. सवाल दूसरा कि अगर अगर यह नोटिस पहले दिन की जारी कर दिया जाता तो हो सकता है कि इस तरह से बयानों की झड़ी नहीं लगती. दरअसल लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद राजस्थान मंत्रियों से लेकर पार्टी के पदाधिकारी और दूसरे को कमजोर करने के लिए बयान जारी कर रहे हैं.

सबसे पहले पार्टी के वरिष्ठ मंत्रियों ने इसकी शुरुआत की रमेश मीणा और उदयलाल आंजना बयान देकर यह बताना चाहा की सरकार पर ब्यूरोक्रेसी हावी है, कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं होती है और लोकसभा चुनाव में हार की वजह ये ही रही. इसके बाद एक अन्य मंत्री लालचंद कटारिया प्रेस विज्ञप्ति के जरिए अपना इस्तीफा देकर अज्ञातवास चले गए. हालांकि बाद में सीएम के इस्तीफा स्वीकार नहीं करने पर उन्होंने अपना कामकाज संभाला लेकिन मंत्रियों के इन कदमों से पार्टी के अन्य नेताओं को एक अवसर मिल गया, जिससे बयानों का सिलसिला शुरू हो गया. राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के सचिव और प्रवक्ता सुशील आसोपा ने विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनाने की वजह को लोकसभा चुनाव में हार के लिए जिम्मेदार ठहराया तो हनुमानगढ़ के जिला अध्यक्ष केसी विश्नोई और कुछ अन्य नेताओं ने कि सचिन पायलट के समर्थन में बयान जारी किए.

इसके बाद जयपुर कांग्रेस की प्रत्याशी ज्योति खंडेलवाल ने राहुल गांधी को चिट्ठी लिखकर हार के लिए जयपुर कांग्रेस के कुछ नेताओं को जिम्मेदार ठहराया. कोटा से लोकसभा का चुनाव लड़ने वाले राम नारायण मीणा ने तो राजस्थान में राष्ट्रपति शासन लगने तक की बात कह दी. इतने पर भी मामला नहीं थमा तो कांग्रेस के विधायक पीआर मीणा ने हार का पूरा ठीकरा जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर फोड़ा. वहीं पार्टी के सचिव भूप सिंह ने राजस्थान में हार के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट की कमजोर लीडरशिप को जिम्मेदार बताया. इसी बीच ज्योति खंडेलवाल ने भी राहुल गांधी को एक दूसरी चिट्ठी लिखकर जयपुर कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की और मीडिया में भी पार्टी की हार के लिए कांग्रेस के नेताओं को ही जिम्मेदार बताया. यह सब पता था जब अविनाश पांडे की तरफ से दो बार एडवाइजरी जारी की जा चुकी थी और पीआर मीणा से फोन पर बात कर जवाब भी मांगा जा चुका था लेकिन उसके बावजूद इन नेताओं के खिलाफ कोई ठोस एक्शन नहीं लेने की वजह से बयानबाजी का सिलसिला नहीं रुक पाया.

लेकिन जब पानी सर से ऊपर निकल गया तब आखिरकार अविनाश पांडे ने ज्योति खंडेलवाल और भूप सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. उनके बयानों को अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना है और उनसे 7 दिनों के भीतर जवाब भी मांगा है. जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर या जवाब नहीं देने पर पार्टी उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी इस बात का भी हवाला दिया गया है. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल ये कि इन दोनों नेताओं के बयान अगर पार्टी की गाइडलाइन में अनुशासनहीनता की श्रेणी में आते हैं उससे पहले जी नेताओं ने बयानबाजी की है उनके बयानों को किस श्रेणी में माना जाएगा. उनको किस आधार पर बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया गया है.

पार्टी के इन बयानवीरों में कई वरिष्ठ नेता भी शामिल है मंत्रियों और विधायकों जैसे जिम्मेदार पदों पर भी हैं. इन बयानों ने पार्टी के दो बड़े नेताओं के बीच मतभेद को बढ़ाने का काम किया है. पार्टी को कमजोर करने की दिशा में कोशिश की है तो आखिरकार इन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं. ये सवाल कांग्रेस का हर कार्यकर्ता पूछ रहा है और उम्मीद है पार्टी के भीतर भी इस बात पर मंथन चल रहा होगा. कांग्रेस में इन बयानों को रोकने के लिए दो नेताओं को दिए गए नोटिस अपनी जगह ठीक है लेकिन पार्टी को वरिष्ठ नेताओं की वरिष्ठता का लिहाज नहीं कर उनके खिलाफ भी अनुशासन का डंडा चलाना चाहिए ताकि पूरी पार्टी में एक कड़ा संदेश जाए अन्यथा बयानों का सिलसिला रुकेगा यह कहना मुश्किल है.