राजस्थान: गुर्जर आरक्षण के मुद्दे पर सरकार का बयान- 'हम मामले को लेकर गंभीर हैं'

 गुर्जर समाज के लिए 5 फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर कर्नल बैंसला के आंदोलन की चेतावनी का मुद्दा आज विधानसभा में भी उठाया गया

राजस्थान: गुर्जर आरक्षण के मुद्दे पर सरकार का बयान- 'हम मामले को लेकर गंभीर हैं'
गुर्जर समाज ने सरकार को आरक्षण को लेकर 20 दिन का अल्टीमेटम दिया है

सुशांत पारीक/जयपुर: केंद्र सरकार की ओर से आर्थिक आधार पर सवर्ण जातियों को 10 फीसदी आरक्षण देने के ऐलान के बाद अब राजस्थान में भी एक बार फिर से आरक्षण को लेकर सियासत तेज हो गई है, लंबे समय से 5 फ़ीसदी आरक्षण की मांग को लेकर गुर्जर समाज एक बार फिर से आंदोलन की राह पर है, गुर्जर समाज के सबसे बड़े नेता कर्नल किरोड़ी बैसला ने सरकार को इस दिशा में 20 दिन का अल्टीमेटम दिया है.

किरोड़ी बैसला ने सरकार को 20 दिनों में समाधान की कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है. गुर्जर समाज के लिए 5 फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर कर्नल बैंसला के आंदोलन की चेतावनी का मुद्दा आज विधानसभा में भी सुनाई दिया. नेता उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने आरक्षण के इस मसले को उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश की.

राजेंद्र राठौड़ ने सरकार से इस मामले पर उनका पक्ष स्पष्ट करने की मांग करते हुए कहा कि एक तरफ कर्नल बैंसला ने 20 दिनों के बाद बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी दे रखी है वहीं सरकार इस मामले पर हाथ पर हाथ धरे बैठी है. राजेंद्र राठौड़ ने उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट से जवाब की मांग करते हुए कहा कि जब केंद्र सरकार ने संविधान संशोधन करते हुए 50 फ़ीसदी आरक्षण की सीमा को खत्म कर दिया है तो फिर आखिर सरकार गुर्जरों को उनका हक क्यों नहीं दे रही.

वहीं जवाब में सचिन पायलट ने कहा इस मामले को लेकर वर्तमान सरकार बेहद संवेदनशील है लेकिन पिछले 5 साल में राज्य और केंद्र सरकार ने इस दिशा में क्यों कोई ठोस कदम नहीं उठाया. सरकार के भाजपा सरकार के लचर रवैए के चलते कोर्ट में इस मामले में सही ढंग से पैरवी नहीं हो पाई. 

सचिन पायलट ने वसुंधरा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा इनके तानाशाही रवैया के चलते बेहतर गुर्जरों को अपनी जान गंवानी पड़ी. ऐसे में उन्हें कोई हक नहीं है इस तरह के सवाल उठाने का. सचिन पायलट ने कहा स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार इस मामले को लेकर बेहद गंभीर है. हमारी कोशिश है कि पुरजोर तरीके से अदालत में इस मामले की पैरवी की जाए ताकि गुर्जरों को उनका हक मिल सकें.

गौरतलब है कि इससे पहले भी वसुंधरा सरकार के आखिरी में गुर्जरों ने आंदोलन की धमकी दी थी, लेकिन जब तक गुर्जर आंदोलन करते तब तक राज्य में आचार संहिता लग चुकी थी. लेकिन अब राजस्थान में नई सरकार के आते ही गुर्जरों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. हालांकि गहलोत सरकार के गठन के बाद अब तक गुर्जर समाज के नेता और राज्य सरकार के बीच इस मुद्दे पर कोई वार्ता नहीं हुई है.